6 दिन की बच्ची के अंगों से बचीं दो जानें

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Doctors have performed the first organ transplants from a newborn
यूके के डॉक्टरों ने पहली बार किया इस तरह का ऑपरेशन, नियोनेटल केयर के क्षेत्र मे बड़ी उपलब्धि है यह मामला

कुछ लोगों का जन्म ही दूसरों के लिए होता है। 6 दिन की नन्ही परी (New Born) ने यह साबित कर दिया। अपने पैरेंट्स के लिए वह भले कुछ ही दिनों का पैरेंटहुड दे सकी लेकिन दो लोगों को वह नई ज़िंदगी, दुनिया भर के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण और और डॉक्टरों के लिए इलाज का एक नया माइलस्टोन देकर गई है। इस 6 दिन की बच्ची का दिल धड़कना बंद हो गया था, ऐसे मे डॉक्टरों ने दो जरूरतमन्द मरीजों मे बच्ची की किडनी और लीवर सेल्स ट्रांसप्लांट (organ transplants) किए।

जर्नल आर्काइव्ज़ ऑफ डीजीज इन चाइल्डहुड (journal Archives of Diseases in Childhood) मे डॉक्टरों ने लिखा है कि, जन्म के समय ही इस बच्ची कि सेहत काफी खराब थी। जांच से पता लगा कि जन्म से ठीक पहले उसे पर्याप्त मात्रा मे ऑक्सीज़न नहीं मिल सका ऐसे मे रीससिटेशन के बावजूद उसके ब्रेन के सेल्स डैमेज हो गए थे। ऐसे मे 6 दिन बाद उसका दिल धड़कना बंद हो गया।

सारी स्थिति जानने के बाद बच्ची के पैरेंट्स उसके अंगों को दान करने के लिए तैयार हो गए। बच्ची की दोनों किडनियाँ एक ऐसे मरीज को दी गईं जिसका रीनल फेलियर हुआ था और वह डायलिसिस पर था। और उसके लिवर सेल्स एक अन्य मरीज को ट्रांसप्लांट किए गए जिसका लीवर फेल हो चुका था।

डॉक्टरों के मुताबिक यह ऑपरेशन बेहद जटिल था। इस उम्र मे नवजात की किडनी की लंबाई तकरीबन 5 सेंटीमीटर लंबी होती है। डॉक्टरों ने यह उम्मीद जताई है कि जिन लोगों को बच्ची के अंग ट्रांसप्लांट किए गए हैं वे जल्द ही सामान्य जिंदगी जी सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात बच्चों के डोनेटेड अंग न सिर्फ अन्य जरूरतमन्द नवजातों और बड़े बच्चों मे बल्कि एडल्ट लोगों मे भी ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं। इस ट्रांसप्लांटेशन की प्रक्रिया मे शामिल डॉ. गौरव अटरेजा के मुताबिक, यह यूके मे हुआ अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमे ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। इस पूरी प्रक्रिया कि जो सबसे सराहनीय बात है, वह है बच्ची के पैरेंट्स का उसके अंगदान के लिए राजी होना। क्योंकि सच्चाई यह है कि न जाने कितने ही मरीजों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है और अगर लोग अंगदान के लिए आगे आयें तो उनकी जानें बच सकती हैं, मगर अपनों को खोने के बाद लोग इतने निराश हो जाते हैं कि इस पुण्य काम के लिए उन्हें तैयार करना मुश्किल होता है।

नवजात बच्चों के ऑर्गन डोनेशन यूएस, जर्मनी और औस्ट्रेलिया जैसे देशों मे होते हैं, लेकिन यूके मे नवजात बच्चों को मृत मानने के लिए दिशानिर्देश अलग हैं। यहाँ डॉक्टर दो महीने तक के बच्चों को ब्रेन डेड घोषित नहीं कर सकते हैं। रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ इस संबंध मे समीक्षा कर रहा है और मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

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