एशिया पर ड्रग रेजिस्टेंस मलेरिया का खतरा!

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drug resistance malaria

साउथ ईस्ट एशियन देशों पर अब ड्रग रेजिस्टेंस मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन मे छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एशिया और अफ्रीका के 10 देशों मे इसके मामले पाए गए हैं। इस नए खुलासे ने ग्लोबल मलेरिया कंट्रोल एंड एलिमिनेशन प्रोग्राम को बड़े खतरे मे डाल दिया है।
स्टडी मे पाया गया है कि दुनिया की सबसे प्रभावी एंटीमलेरिया ड्रग आर्टमिसिनिन के प्रति रेजिस्टेंस भी डिवेलप होने लगा है। ऐसा पहली या दूसरी बार नहीं हुआ है, जब मलेरिया पैरासाइट ने फ्रंट लाइन दवाओं के खिलाफ रेजिस्टेंस डिवेलप किया हो। पहले भी ऐसा हो चुका है और सबसे खास बात यह है कि हर बार इसकी शुरुआत एशिया के एक कोने कंबोडिया-थाईलैंड बॉर्डर से हुई है।
नई स्टडी मे एशिया-अफ्रीका के 10 देशों से 1241 मलेरिया के मरीजों का सैंपल लिया गया था। जांच मे पाया गया कि आर्टमिसिनिन दावा को खिलाफ प्लाज्मोडियम फेल्सिपेरम, जो कि मलेरिया पैरासाइट का सबसे खतरनाक फॉर्म है, ने रेजिस्टेंस डेवेलप कर लिया है। इसके मामले वेस्टर्न कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, ईस्टर्न म्यांमार और नॉर्दर्न कंबोडिया तक फैल चुके हैं। हालांकि स्टडी मे शामिल 3 अफ्रीकन देशों कि साइट्स, जो कि केन्या, नाइजीरिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोंगो का हिस्सा है, मे रेजिस्टेंस के मामले नहीं पाये गए हैं।
स्टडी मे कहा गया है कि रेजिस्टेंस प्रभावित इलाकों मे एंटी मलेरिया ट्रीटमेंट का कोर्स 3 दिन से बढ़ाकर 6 दिन करने से टेम्परेरी राहत मिल सकती है। जहां तक समस्या को कंट्रोल मे लाने का मसला है, तो इसके लिए मौजूदा उपाय काफी नहीं हैं। स्टडी मे शामिल वैज्ञानिक प्रोफेसर निकोलस व्हाइट ने मलेरिया को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ प्राथमिकता मे लाकर गंभीर कदम उठाने की सलाह दी है।

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