इबोला के लिए 24/7 हेल्पलाइन शुरू

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इबोला के मद्देनज़र केंदीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि, देश मे अब तक इबोला का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे मे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

शनिवार को शुरू किए गए ‘इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर’ (हेल्‍पलाइन) के टेलीफोन नंबर हैं (011)-23061469, 3205 और 1302। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि, डब्‍ल्‍यूएचओ की घोषणा से पहले ही सरकार ने आवश्‍यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हमने सर्वाधिक उन्‍नत सर्विलांस और ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया है। ईवीडी के किसी भी मामले के इलाज और प्रबंधन के लिए नई दिल्‍ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल की पहचान की गई है। डब्‍ल्‍यूएचओ ने एक यात्री के बारे में मंत्रालय को सचेत किया था जो ईवीडी के एक पुष्‍ट मामले के तौर पर 20 जुलाई को नई दिल्‍ली पहुंचा था। वह साउथ-वेस्ट दिल्‍ली स्थित द्वारका में रह रहा था। यह व्यक्ति स्वस्थ पाया गया है। उसे खुद ही देखभाल करने के लिए आवश्‍यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। उससे कहा गया है कि बीमारी के लक्षण साफ दिखने पर वह संबंधित अधिकारियों को इस बारे में सूचित करे।

इस बीमारी से प्रभावित देशों से भारत आने वाले यात्रियों के बारे में सूचनाएं एकत्रित करने के लिए सिविल एविएशन मंत्रालय और होम मिनिस्ट्री के साथ सलाह-म‍शविरा कर एक खास व्‍यवस्‍था की गई है। हवाई यात्रियों के लिए यह अनिवार्य किया जाएगा कि उन्‍हें हेल्‍थ कार्ड के जरिए अपनी हालिया यात्राओं और भारत में अपने निवास स्‍थान के बारे में जानकारी देनी होगी। इस तरह विकसित होने वाले डाटाबेस से ऐसे लोगों के बारे में पता लगाने में मदद मिलेगी जिनमें आगे चलकर इस बीमारी के लक्षण साफ नजर आने लगेंगे।

हवाई अड्डों और पोर्ट पर सर्विलांस को और पुख्‍ता कर दिया गया है। एकीकृत बीमारी सर्विलांस कार्यक्रम (आईडीएसपी) को बाकायदा चालू कर दिया गया है। पुणे स्थित राष्‍ट्रीय विषाणु विज्ञान केंद्र और दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय बीमारी नियंत्रण केंद्र में इस बीमारी से जुड़े सैंपल के टेस्ट की पूरी तैयारी की जा चुकी है, ताकि इसकी पहचान हो सके।
इसके अलावा, भारतीय दूतावास केंद्र ने इस बीमारी से प्रभावित देशों में रह रहे अनुमानित 47,000 भारतीयों से संपर्क साधने का सिलसिला शुरू कर दिया है। इसके साथ ही इन लोगों को सभी आवश्‍यक जागरूकता मुहैया कराई गई है ताकि इस बीमारी से बचाव के बारे में जागरूकता बढ़ सके।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय अपनी कार्य योजना के क्रियान्‍वयन के लिए राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर आवश्‍यक कदम उठा रहा है। सभी राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों को अपनी खुद की ट्रैकिंग, सर्विलांस और अलग-थलग रखने की सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत से अवगत करा दिया गया है। इस बीमारी से प्रभावित सभी चार देश पश्चिमी अफ्रीका में हैं- गिनी (393 मौतें), सियरा लियोन (286 मौतें), लाइबेरिया (282 मौतें) और नाइजीरिया (1 मौत)।

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