इबोला: मरीज करेंगे इलाज

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इबोला वायरस की बीमारी (ebola virus disease) से ठीक हो चुके मरीज का संपूर्ण ब्लड अथवा सीरम प्रभावित मरीजों के लिए इस्तेमाल हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नया दिशानिर्देश जारी किया है जिसमें ठीक हो चुके मरीज के संपूर्ण ब्लड अथवा प्लाज्मा के कलेक्शन और इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी है। इसे इबोला वायरस से होने वाली बीमारी के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जिन मरीजों का इबोला वायरस डिजीज का इलाज हुआ है और वे पुनः स्वस्थ हो रहे हैं उन्हें भविष्य के मरीजों के लिए ब्लड अथवा प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

चूंकि इबोला वायरस के लिए अब तक कोई विश्वसनीय इलाज उपलब्ध नहीं है ऐसे में इस बीमारी से ठीक होकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे मरीजों का ब्लड लेकर अन्य पीड़ितों में इसका इस्तेमाल कर इसके परिणाम देखे गए। एक छोटे से ग्रुप पर इस्तेमाल किए गए इस तरीके के काफी संतोषजनक परिणाम सामने आए हैं। इलाज के इस सिद्धांत को कई अन्य संक्रामक बीमारियों के इलाज में भी इस्तेमाल होता आया है।

डब्ल्युएचओ के दिशानिर्देश में इसके सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। इबोला डिजीज यानी ईवीडी से पीड़ित हो चुके वे मरीज जो स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं वे डिस्चार्ज होने के 28 दिनों के भीतर अपना संपूर्ण ब्लड अथवा प्लाज्मा दान कर अन्य मरीजों की जान बचाने में मददगार हो सकते हैं।

दिशानिर्देशों के अनुसार इस तरह के रक्तदान के लिए सिर्फ उन्हीं मरीजों को फिट माना जा सकता है जो डब्ल्युएचओ के मानकों के अनुसार बीमारी से मुक्त पाए जाएंगे और दो बार ईबीओवी आरएनए तकनीक से जांच में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई हो। इन दोनों जांचों के लिए सैंपल 28 घंटे के अंतराल में लिया जाना चाहिए और दोनो ही रिपोर्ट नेगेटिव होनी चाहिए।

इबोला से स्वस्थ हुए मरीजों का डोनेट किया गया ब्लड $2 डिग्री और $6 डिग्री तापमान पर रखा जाना चाहिए लेकिन इसे फ्रीज नहीं किया जाना चाहिए। जहां तक संभव हो इसे ब्लड बैंक के अलग रेफ्रिजरेटर में रखा जाना चाहिए जो सिर्फ इसी तरह के ब्लड स्टोर करने के लिए रखा गया हो। इस रेफ्रिजरेटर में उपयुक्त तापमान निरीक्षण और अलार्म का सिस्टम जरूर होना चाहिए। संपूर्ण ब्लड से अलग किया गया प्लाज्मा अथवा सीधे लिया गया प्लाज्मा भी तरल रूप में $2 डिग्री से $6 डिग्री तापमान के बीच ब्लड बैंक के रेफ्रिजरेटर में 40 दिनों तक रखा जा सकता है। प्लाज्मा को कलेक्शन के 8 घंटों के भीतर फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा की तरह अथवा 18-24 घंटों के भीतर ’प्लाज्मा फ्रोजन विदिन 24 ऑवर के तहत 12 महीनों तक 18 डिग्री से कम तापमान पर रखा जा सकता है।

ईवीडी के सिर्फ उन्ही मरीजों को यह ब्लड अथवा प्लाज्मा चढ़ाया जा सकता है जिनमें वायरस की पुष्टि हो चुकी हो और बीमारी शुरूआती चरण में हो। एबीओ और आरएचडी मैच्ड रक्त अथवा प्लाज्मा यूनिट का चढ़ाने के समय चयन किया जाना चाहिए।

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