इबोला से निबटने को तैयार हैं हम?

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वेस्ट अफ्रीका के 3 देश कर रहे हैं इसकी महामारी से स्ट्रगल, अब तक हो चुकी हैं 825 से ज्यादा मौतें

इबोला वायरस की महामारी ने वेस्ट अफ्रीका के 3 देशों मे महामारी का रूप ले लिया है। वायरस जिस तरह से अपने पाँव पसार रहा है उसे देखते हुए और देशों तक इसका असर पहुँचने के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह बीमारी क्लोज़ कांटैक्ट मे आने से फैलती है और इसके लक्षण मलेरिया, टायफाइड और कालरा से मिलते-जुलते हैं। और इंडिया-अफ्रीका के बीच आने-जाने वालों की अच्छी-ख़ासी संख्या है, और इस मौसम मे यहाँ अधिकतर इलाकों मे मलेरिया, टायफाइड और कालरा जैसी बीमारियों का असर काफी ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे मे अगर वायरस को एंट्री लेवल परर ही रोकने के उपाय नहीं किए गए तो स्वाइन फ्लू वाली स्थिति दोबारा बनते देर नहीं लगेगी।

नया नहीं है वायरस
इबोला वायरस की पहचान पहली बार तकरीबन 4 दशक पहले कॉगो के एक गाँव मे ईबोला नदी के आस-पास हुई थी। इसके बाद से 3 बार इसका आउटब्रेक सामने आ चुका है। नया आउटब्रेक अब तक का सबसे बड़ा है और वेस्ट अफ्रीका के लिए इसका आउटब्रेक नया है। इस बार वेस्ट अफ्रीका लाइबेरिया, गिनी और सियरा लियोन मे अब तक यह महामारी का रूप ले चुका है। अब तक 825 से ज्यादा लोगों की इससे मौत हो चुकी है। जबकि इस वायरस के इन्फेक्शन का पहला मामला इसी साल मार्च महीने मे सामने आया था।

खतरनाक है इबोला
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इबोला वायरस काफी खतरनाक है। इसमे मृत्युदर 90% तक देखा गया है, लेकिन तीनों प्रभावित देशों के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि अब इसके कई मरीज ठीक भी होने लगे हैं और कई इलाकों मे इसकी मृत्युदर 60% तक आ गई है। चूंकि फिलहाल इबोला का कोई निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है, ऐसे मे इन्फेक्शन का खतरा होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर मरीज का डीहाइड्रेशन ठीक रखने की कोशिश करने की सलाह दी जा रही है।

लक्षण कर सकते हैं कनफ्यूज
इबोला के लक्षण मलेरिया, टायफायड और कालरा जैसी बीमारियों से मिलते जुलते हैं। इबोला इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षणों मे बुखार, सरदर्द, मांसपेशियों मे दर्द और गले मे खरास आदि दिक्कतें शामिल हैं। ऐसे मे पहले से प्रभावी मलेरिया, सामान्य फ्लू और टायफायड जैसी बीमारियों से लक्षणों से अलग इसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो सकता है। इबोला इन्फेक्शन मे बाद मे मरीजों को इंटरनल या एक्सटर्नल ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। अक्सर इसमे नाक और कान से ब्लीडिंग होती है।

नजदीकी संपर्क से फैलता है वायरस
इबोला वायरस हवा के जरिये नहीं फैलता है। इसका इन्फेक्शन प्रभावित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क मे आने से फैलता है, क्योंकि इसके वायरस शरीर के फ्लुइड के माध्यम से फैलते हैं। इसमे खून, पसीना, उल्टी, पेशाब, थूक, मल और सीमन आदि शामिल है।

डर और भ्रम का भी है साया
तीनों प्रभावित देशों मे स्थानीय निवासियों के डर और भ्रम की वजह से हेल्थ वर्कर और क्लीनिकों पर अटैक के मामले भी सामने आए हैं। लोगों के दिमाग मे यह भ्रम आ गया है कि महामारी के फैलने की वजह बाहर के देशों से दूर-दराज के इलाकों मे आए डॉक्टर और नर्सें हैं। कई परिवारों ने अपने मरीजों को अस्पतालों से जबर्दस्ती बाहर भी निकाल लिया। सरकारी अधिकारी बीमारी पर नियंत्रण के लिए मरीजों को आइसोलेट करने, लोगों को जागरूक करने और बाहर से आने वाले यात्रियों पर नजर रखने के साथ बॉर्डर के नियमों को भी सख्त किया है।

भारत ने भी जारी की है एडवाइजरी
इबोला वायरस को लेकर भारत मे भी एडवाइजरी जारी की गई है। इंटीग्रेटेड डीजीज सर्विलान्स प्रोग्राम (आईडीएसपी), जो कि बीमारियों के आउटब्रेक पर नजर रखती है, ने राज्यों के हेल्थ इंटेलिजेंस अधिकारियों और नेशनल सेंटर फॉर डीजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) को बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली मे एनसीडीसी मे इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। यह निर्देश दिया गया है कि अगर किसी भी व्यक्ति मे इबोला इन्फेक्शन से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दें और मरीज की अफ्रीका यात्रा की कोई हिस्ट्री हो तो तुरंत उसे आइसोलेशन मे रखें और आईडीएसपी एवं एनसीडीसी को सूचित करें।

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