इबोला से निबटने के लिए पूरी तैयारी-डॉ. हर्षवर्धन

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इबोला वायरस से सुरक्षा सम्बन्धी तैयारियों के बारे में केन्द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने 6 अगस्त को संसद मे पूरी जानकारी दी।
उन्होने बताया कि, इबोला वायरस एक फाइलोवायरस है, जिसकी पांच अलग-अलग प्रजातियाँ हैं। मौजूदा प्रकोप में जिस विशेष वायरस को अलग किया गया है वह जायर इबोला वायरस है। इबोला वायरस रोग एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जिससे पीड़ित लोगों में 90% तक लोगों की मृत्यु हो जाती है। अफ्रीका में फ्रूट बैट चमगादड़ इबोला वायरस के वाहक हैं, जिनसे पशु (चिम्पांजी, गोरिल्ला, बंदर, वन्य मृग) संक्रमित होते हैं। मनुष्यों को या तो संक्रमित पशुओं से या संक्रमित मनुष्यों से संक्रमण होता है। जब वे संक्रमित शारीरिक फ़्ल्युइड के संपर्क में आते हैं। मौजूदा प्रकोप के दौरान अधिकांश रोग मानव से मानव को होने वाले संक्रमण से फैला है। इबोला वायरस के संक्रमण होने तथा रोग के लक्षण प्रकट होने के बीच की अवधि 2-21 दिन होती है, जिसके दौरान प्रभावित व्यक्तियों से संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता है।
उन्होने कहा कि, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, भारत सरकार ने 02 मई, 2014 और 01 अगस्त, 2014 को स्थिति की समीक्षा की है। इसके बाद राज्य रोग निगरानी इकाइयों को प्रभावित देशों से आने वाले लोगों में वायरस का शुरू में पता लगाने और उसे मैनेज करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए। वायरस के परीक्षण के लिए राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान, पुणे और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, दिल्ली में लैबोरेटरी फेसिलिटी भी बढाई गई है।
विदेश मंत्रालय ने सूचित किया है कि गिनि गणराज्‍य, लाईबेरिया और सियरा लियोन में लगभग 4700 भारतीय हैं जहां से अधिकतम मामलों की सूचना मिली है। इनमें से प्रत्‍येक देश में यह संख्‍या क्रमश: 500, 3000 और 1200 है। लाईबेरिया में भारतीयों की संख्‍या में भारतीय केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल के लगभग 300 कार्मिक शामिल हैं जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं, जो संयुक्‍त राष्‍ट्र शांति रक्षा ऑपरेशन का हिस्‍सा हैं। नाइजीरिया में लगभग 40,000 भारतीय नागरिक काफी बड़ी संख्‍या में मौजूद हैं। यदि प्रभावित देशों में स्थिति बदतर होती है तो इन भारतीयों के भारत लौटने की संभावना हो सकती है। रक्षा मंत्रालय ने सूचित किया है कि अफ्रीकी महाद्वीप में लगभग 7000 भारतीय टुकड़ियां तैनात हैं लेकिन ये प्रभावित देशों में नहीं हैं।
स्वस्थ्य मंत्री ने कहा कि, मैंने 5 अगस्‍त को आयोजित एक बैठक में स्थिति की समीक्षा की है जिसमें स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण, गृह मंत्रालय (आप्रवासी विभाग सहित), विदेश और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इसके अतिरिक्‍त,इस बैठक में सशस्‍त्र सेना, राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। भारत में इस रोग के खतरे, तथा हमारे द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों और किए जाने वाले रोकथाम उपायों, जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों आदि पर विस्‍तार से चर्चा की गई।
मैं संसद के माननीय सदस्‍यों को यह अवगत कराना चाहता हूं कि अफ्रीकी क्षेत्र के बाहर के देशों में इस विषाणु के फैलने का खतरा कम है। फिर भी, सावधानी बरतते हुए हम संबंधित एयरलाइनों से मूल रूप से इबोला विषाणु से प्रभावित देशों से अथवा इनसे गुजर कर भारत आने वाले यात्रियों का ब्‍योरा प्राप्‍त करेंगे और उनके स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्‍टि से उन पर नज़र रखेंगे। इस उद्देश्‍य के लिए, इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदायों तथा प्रभावित देशों से भारत आने वाले यात्रियों में जागरूकता पैदा की जाएगी। आप्रवासन (इमिग्रेशन) जांच के समय प्रभावित देशों से आने वाले तथा वहां से गुजरने वाले यात्रियों को स्‍वयं रिपोर्ट देनी होगी। एयरलाइनों द्वारा उड़ान के दौरान भी इस संबंध में अनाउंसमेंट की जाएंगी। इस रोग के लक्षणों वाले यात्रियों की जांच के लिए हवाईअड्डों/बंदरगाहों पर सुविधा केन्‍द्र स्‍थापित किए जाएंगे। जिन यात्रियों में इसके लक्षण उभरने लगेंगे, उनकी चार हफ्ते तक निगरानी की जाएगी और इन लक्षणों का शुरुआत में पता लगाने के लिए निगरानी प्रणाली को चुस्‍त-दुरुस्‍त बनाया जाएगा। इन लोगों को इस रोग के लक्षण उभरने पर स्‍वयं रिपोर्ट करने की भी सलाह दी जाएगी।
राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र के प्रशासनों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे नोडल अधिकारियों का चयन करें और ऐसे अस्‍पतालों का चयन करें जहां किसी संभावित मामले से निपटने के लिए अलग से वार्ड बनाए जाएं। राज्‍यों से भी यह कहा जायेगा कि वे स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या कार्मिकों और डाक्‍टरों की सुरक्षा के लिए व्‍यक्तिगत सुरक्षात्‍मक उपकरण तैयार रखें। प्रिंट और विजुअल मीडिया के माध्‍यम से जन जागरूकता पैदा की जाएगी। इबोला विषाणु के संबंध में उपचार और निदान संबंधी प्रोटोकॉल को हमारी वेबसाइट पर डाला जायेगा और इसका विभिन्‍न स्‍टेकहोल्‍डरों में प्रचार-प्रसार किया जाएगा। भारतीय चिकित्‍सा संघ को भी नैदानिक एवं उपचार प्रोटोकोलों के संबंध में सभी सदस्‍यों को सूचित करने का अनुरोध किया जा रहा है।

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