समझे डाइट और डाइटिंग का फर्क

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dietजीवनशैली में बदलाव के साथ जितनी तेजी से स्वास्थ्य समस्या बढ रही है उतनी ही गति से लोग फिट्नेस  (fitness)और डाइटिंग (dieting) को लेकर जागरुक भी हो रहे हैं। बावजूद इसके अधिकतर लोग फिट्नेस का गोल  (fitness goal) हासिल करने से पीछे रह जाते हैं। खास बात यह है कि इसकी वजह उनकी कोशिश में कमी नहीं बल्कि बेसिक जानकारी का अभाव होता है। मसलन ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि उन्हे फैट और कार्बोहाइड्रेट्स बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। दूध पिएंगे तो मोटे हो जायेंगे अथवा अनाज की जगह भी सिर्फ फल सब्जिया खाकर ज्यादा सेहतमंद रहेंगे आदि। जबकि असल में ऐसा नहीं होता। आइये जानते हैं डाइट और डाइटिंग से जुडे ऐसे ही बुनियादी व जरुरी फैक्ट्स:

अगर नहीं ली बेहतर डाइट :  बेहतर डाइट न लेने से ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, आंखों की रोशनी और हड्डियों में कमजोरी आती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का काम करते हैं। कम कैलोरी डाइट लेने की वजह से शरीर में मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन गड़बड़ा जाता है। जिसका असर नर्व और मांसपेशियों में देखने को मिलता है। इसके अलावा इसकी वजह से दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा कम हो जाती है, जिसकी वजह से क्लिनिकल डिप्रेशन की समस्या हो जाती है।

अकसर महिलाओं में समुचित डाइट न लेने से महिलाओं में एनीमिया, अनियमित मासिक धर्म, बाल, नाखूनों और त्वचा सम्बंधी शिकायतें देखने को मिलती है। कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा लेने से केटोसिस की समस्या हो जाती है, जिसका असर किडनी पर पड़ता है। कार्बोहाइड्रेट आपके दिमाग और शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। शरीर को जितनी कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है, उससे कम लेने से शरीर में कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं होती है। खाना खाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आपको कितनी कैलोरी की आवश्यकता है।

डाइट में इन्हें न करें नजरअंदाज

दूध है जरूरी 

दूध प्रत्येक आयु वर्ग की रोजमर्रा की जीवशैली में शामिल होना चाहिए। हालांकि दूध की शुद्धता को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहते हैं। दूध में पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, विटामिन ए, डी, फॉस्फोरस, विटामिन बी12, प्रोटीन, पौटेशियम, जिंक और मैग्नीशियम की अधिकता होती है। यह हड्डियों की मजबूती के लिहाज से बेहतर होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए दूध काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होती है। उम्र बढ़ने के साथ लोगों की भूख कम होती है, ऐसे में उन लोगों के लिहाज से काफी उपयोगी होते हैं।

फैट से न करें परहेज

शरीर की कोशिकाओं को मजबूत करने के लिए, हार्मोन मैनुफैक्चर करने के लिए, ऊर्जा प्रदान करने में और अंगों की रक्षा करने के लिहाज से लाभदायक होता है। विटामिन ए, डी, ई और के फैट में घुलनशील हो जाते है, ऐसे में शरीर से उनका उत्सर्जन जरूरी हो जाता है। फैट की पर्याप्त मात्रा ही शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन इसे अपनी डाइट से नदारद नहीं करना चाहिए। डाइट में ली जाने वाली फैट कैलोरी की मात्रा, कुल ली जाने वाली कैलोरी से दस प्रतिशत अधिक नहीं होनी चाहिए। शरीर को फैट की आवश्यकता कम मात्रा में होती है। डाइट में फैट की जरूरत इसलिए होती है कि ताकि जरूरी हार्मोन बन सकें और फैट में घुलनशील विटामिनों का अवशोषण हो सकें।

शाम को कम खाना

डिनर के समय शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है। चूंकि आपको दिन के समय शारीरिक रूप से ज्यादा काम करते हैं और इस दौरान आपको अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है। शाम के समय शरीर थका हुआ होता है, ऐसे में उसे खाना पचाने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अगर आपने रात को देर में डिनर कर रहे हैं, ऐसे में खाने से पहले थोड़ा स्नैक खा लें, जिससे आपको भूख कम लगेगी।

गर्भवती महिलाओं के लिए कैलोरी

–          सामान्य महिला को जहां रोजाना 2100 कैलोरी चाहिए, वहीं गर्भवती महिला को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है।

–          स्तनपान कराने वाली महिला को 3000 कैलोरी प्रतिदिन चाहिए। 10 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन से, 35 प्रतिशत कैलोरी वसा से और 55 प्रतिशत कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से आनी चाहिए।

कैलोरी की कितनी मात्रा

प्रत्येक व्यक्ति को शरीर, उम्र, लिंग के आधार पर अलग-अलग कैलोरी की मात्रा की आवश्यकता होती है। 20 से 30 वर्ष की उम्र तक सबसे ज्यादा कैलोरी की आवश्यकता होती है। जहां 25 वर्ष के एक व्यक्ति को 2300 कैलोरी प्रतिदिन आवश्यक होती है, तो वहीं उम्र बढ़ने के साथ यह मात्रा कम होती जाती है। विशेषज्ञों की मानें, तो 25 वर्ष के बाद प्रत्येक दस वर्ष में कैलोरी ग्रहण करने की क्षमता में 2 प्रतिशत की कमी आ जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर 25 वर्ष की उम्र में आपके शरीर को 2300 कैलोरी प्रतिदिन जरूरी होती है, तो वहीं 35 वर्ष की उम्र में आपकी कैलोरी क्षमता 2254 कैलोरी होगी। जहां तक लिंग के आधार पर कैलोरी ग्रहण करने की क्षमता की बात है, तो महिलाओं को पुरूषों की अपेक्षा कम कैलोरी की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाओं को 300 कैलोरी प्रतिदिन और स्तनपान के दौरान 500 कैलोरी आवश्यकता होती है।

बाहर खाएं तो कैलोरी का रखें ध्यान

सूप : ताजे फल चुनें, फलों का जूस पिएं। पूरी तरह से पका हुआ खाना खाएं, शोरबा पिएं।

सब्जियां : ऐसी सब्जियां खाएं, जो ज्यादा रसेदार  न हो (रसेदार सब्जियों में फैट की अधिकता होती है)। मक्खन  या क्रीम से परहेज करें।

सलाद : सलाद के ऊपर क्रीम, मक्खन या पनीर न लगाएं। इसके स्थान पर सिरका या नींबू का प्रयोग करें।

रेस्तरां में खाने के दौरान ?

आपको कितनी कैलोरी की आवश्यकता है, उससे जुड़े खाने के विकल्पों को तलाशें। रेस्तरां में जो मीनू मिलता है, उससे विकल्पों को देखें। रेस्तरां में आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसकी चेकलिस्ट नीचे दी गई है।

–          ताजे फल, सलाद वेजीटेबल, रायता और कम फैट वाली डिश को चुनें। मांसाहारी लोगों के लिए तंदूरी चिकन और मछली बेहतर विकल्प है।

–          अगर मेन्यू में चीजों में पड़े मसालों के बारे में जानकारी नहीं दी गई है, तो आप इसका विवरण मांग लें।

–          मलाई युक्त रसेदार सब्जी, मीट करी, बिरयानी, मलाईदार दूध ऑर्डर करें

बाहर खाने के दौरान

भारतीय

तंदूरी खाना, रायता, दाल और बिना रसे की सब्जी खाएं।

जापानी

सूशी, टोफू और याकीमोनो डिश खाएं। ज्यादा फ्राइ की हुई डिश जैसे टेम्पुरा खाने से परहेज करें।

मैक्सिकन

अगर संभव हो, तो टोस्टाडस, टेको सलाद को फ्राइ किए बिना खाएं। चावल, सेम की फली, भुना हुआ मीट और सालसा बिना क्रीम के खाएं।

इटालियन

टमाटर वाला सॉस ज्यादा खाएं, वेजीटेबिल के साथ गेहूं वाला पास्ता खाएं, भुना हुआ मीट खाएं।

 

 

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