दिल को जवां रखने के लिए जरूरी है फ़ाइबर

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High fiber

समझें होल ग्रेन और इसके फाइबर का महत्व

रोजाना होल ग्रेन यानि साबुत अनाज खाने से फाइबर मिलता है जो कि आपके दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है। कोई भी फूड गेहूं, चावल, जौ, मकई या अन्य किसी अनाज से बनता है। ब्रेड, पास्ता, ओटमील और ग्रिट्स यानि बजरी, ये सभी ग्रेन के उत्पाद हैं। मुख्य रूप से दो तरह के ग्रेन उत्पाद होते हैं: होल ग्रेन्स और रिफाइंड ग्रेन्स।
होल ग्रेंस मे पूरा अनाज होता है- इसका चोकर अथवा भूसी, बीज और एंडस्पर्म यानि भ्रूणपोष सब कुछ। इसके उदाहरण हैं, होल व्हीट आटा, ओटमील, होल कॉर्नमील, ब्राउन राइस और बल्गर यानि मोटा पिसा हुआ गेहूं।
रिफाइंड ग्रेंस बहुत महीन पिसा हुआ अथवा प्रोसेस्ड होता है, जिसमे से इसका चोकर और बीज निकल जाता है। इस प्रक्रिया मे अनाज मे पाए जाने वाले बी-विटामिन्स, आयरन और डाइटरी फाइबर का अधिकतर हिस्सा खत्म हो जाता है। रिफाइंड ग्रेंस के उदाहरण हैं गेहूं का आटा, एनरिच्ड ब्रेड या व्हाइट राइस। एनरिच्ड का मतलब होता है, प्रोसेसिंग के बाद अनाज मे बी-विटामिन्स और आयरन दोबारा मिलाया जाता है, मगर इसमे फाइबर नहीं मिलाया जा सकता है।

होल ग्रेंस के फायदे
होल ग्रेन का इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है:
-होल ग्रेंस आमतौर पर डाइटरी फाइबर के अच्छे स्रोत होते हैं; ज्यादा रिफाइंड (प्रोसेस्ड) ग्रेन मे कम फाइबर होता है।

-हेल्दी डाइट वाले फाइबर ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने मे मददगार होते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।

-फाइबर वाला खाना खाने से कम कैलोरी मे ही जल्दी पेट भर जाने का एहसास होता है, जिससे वजन कंट्रोल मे रखना आसान होता है।

ग्रेंस कई तरह के पौष्टिक तत्वों का मुख्य सोर्स भी होते हैं:
• बी विटामिन्स (थियमीन, रिबोफ्लेविन, नियासिन और फोलेट) मेटाबोलिज्म ठीक रखने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
• फोलेट (फोलिक एसिड), जो कि विटामिन बी का एक प्रकार है, शरीर मे रेड ब्लड सेल्स यानि लाल रक्त कण बनाने मे मददगार होता है।
• आयरन ब्लड मे ऑक्सीज़न पहुंचाने का काम करता है।
• मैग्नीशियम एक मिनरल है जो हड्डियों को बनाता है और मांसपेशियों यानि मसल्स से एनर्जी रीलीज़ करने का काम करता है।
• सेलेनियम रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यून सिस्टम को ठीक रखता है।
अपनी डाइट मे कई तरह के अनाज का इस्तेमाल करें क्यूंकि अलग-अलग तरह के अनाज मे अलग-अलग तरह के पौष्टिक तत्व होते हैं। होल ग्रेन फाइबर का बेहतरीन स्रोत हो सकता है, मगर रिफाइंड ग्रेन मे आमतौर पर यह नहीं होता है।

होल ग्रेन वाले प्रॉडक्ट
होल ग्रेन खाने के रंग से नहीं पहचाना जा सकता है। उदाहरण के तौर पर ब्रेड शीरा/गुड़ अथवा अन्य किसी चीज कि वजह से ब्राउन हो सकता है, यह जरूरी नहीं कि इसमे होल ग्रेन हो। ऐसे मे यह जरूरी हो जाता है कि कोई भी फूड खरीदने से पहले उसका लेबल जरूर पढ़ लें। अधिकतर होल-ग्रेन उत्पादों मे इंग्रीडिएंट लिस्ट मे ग्रेन के नाम से पहले होल अथवा होल-ग्रेन लिखा होता है।

डाइटरी फाइबर
फाइबर सोल्यूबल और इनसोल्युबल यानि घुलनशील व अघुलनशील, दो तरह के होते हैं। सोल्यूबल फाइबर दिल की बीमारियों का खतरा कम करता है, क्योंकि इससे एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल कम होता है। ओट्स यानि जई मे अन्य अनाजों के मुक़ाबले सबसे ज्यादा सोल्यूबल फाइबर होता है। सोल्यूबल फाइबर के अच्छे स्रोतों मे ओट ब्रैन, ओटमील, बीन्स, मटर, राइस ब्रैन, बार्ली, रेसेदार फल, स्ट्रॉबेरी और सेब का पल्प आदि शामिल है।
अघुलनशील फाइबर का संबंध दिल संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करने अथवा हाई-रिस्क ग्रुप वालों मे बीमारी के विकास को नियंत्रित करने से है। डाइटरी फाइबर जल्द ही आपको पेट भर जाने का एहसास कराते हैं, ऐसे मे आप कम कैलोरी खाते हैं। जिन चीजों मे अघुलनशील फाइबर अधिक होता है उनमे, होल-व्हीट ब्रेड, व्हीट सीरियल्स, व्हीट ब्रैन, राई, राइस, बार्ली व अन्य कई अनाज, पत्ता गोभी, चुकंदर, गाजर, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, फूल गोभी, सेब की स्किन और शलजम आदि शामिल हैं।
बहुत सारे कमर्शल ओट ब्रैन और व्हीट ब्रैन उत्पाद जैसे कि मफिन, चिप्स, वेफल्स आदि बहुत मामूली मात्रा मे ब्रैन होता है। इन चीजों मे सोडियम, कुल फैट और सैचुरेटेड फैट भी अधिक हो सकता है। ऐसे मे इनका लेबल ध्यान से पढ़ें।

नियमित के खाने मे होल ग्रेन्स की जरूरत
यह आपकी उम्र, जेंडर और कैलोरी की जरूरत पर निर्भर करता है। अगर एक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए हर दिन 2,000 कैलोरी की जरूरत है, तो वह 6 से 8 सर्विंग अनाज खा सकता है (खाने का कम से कम आधा हिस्सा होल ग्रेन फूड का होना चाहिए)। और कुल सब्जियों और फल का 8 से 10 सर्विंग होना चाहिए। (यहाँ एक सर्विंग का मतलब है आधा कप)। हर किसी के लिए खाने से पर्याप्त मात्रा मे फाइबर लेने की सलाह दी जाती है न कि फाइबर सप्लिमेंट लेकर कमी की पूर्ति की जानी चाहिए। कोई भी चीज खरीदते समय उसका लेबल पढ़ें और वही चीजें खरीदें जिसमे अधिक मात्रा मे फाइबर हो। रोज 25 ग्राम तक फाइबर लेने की कोशिश करें।

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