इम्प्लांटेबल लूप रखेगा धडकनो पर नजर

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first implanted loop to record patients ECG
अब महाराष्ट्र में बैठकर डॉक्टर बांग्लादेश के एक मरीज की धडकनोँ पर 24 घंटे नजर रखेंगे और उसे रेकॉर्ड भी कर सकेंगे। सुनने में थोडा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है! और इसे सम्भव बनाया है लूप रेकॉर्डर ने, जिसे मरीज के शरीर में इम्प्लांट किया गया है।
बांग्लादेश के 62 साल के बुजुर्ग तोफाज़ल हुसैन कुछ साल पहले तक एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी रहे थे। 2010 से, हुसैन बेहोशी से पीड़ित हो गए थे, जिसका अर्थ है कि अचानक ही बेहोश होना या ब्लैक आउट होने की घटना। ये घटनाएं दिन में किसी भी समय हो जाती थी जब श्री हुसैन अपना दैनिक काम कर रहे होते थे और इसके बाद अगले 2—3 दिनों तक उन्हें कमजोरी रहती थी। परिणामस्वरूप, बांग्लादेश में कई केन्द्रों में और कई डॉक्टर्स द्वारा उनकी पूरी जांच की गई, लेकिन बेहोशी की इस घटना का सही कारण पता नहीं चल पाया। डॉक्टर्स भी इन घटनाओं के पीछे के सही कारण और इसे कैसे ठीक किया जाए को लेकर संशय में थे। अगले कुछ महीनें में इन घटनाओं की बारंबारता बढ़ गई और इसलिए इस मरीज ने भारत में बड़े कार्डिएक केन्द्र जाने का फैसला किया। काफी रिसर्च और अपने परिवार एवं दोस्तों के सुझाव के बाद, उन्होंने मुंबई, भारत में नानावटी सुपर स्पेशलिटी जाने का फैसला किया।
हुसैन ने नानावटी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. सलिल शिरोडकर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श किया, जिन्होंने पिछली रिपोर्ट्स की समीक्षा की और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मरीज को अपने दिल की लय पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी। इस तरह से लगातार निगरानी करने से उन्हें बेहोशी आने की घटना के समय अपने दिल की लय को रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी और बीमारी का निदान और इलाज करने में मदद मिलेगी। मरीज को इम्प्लांटेबल लूप रिकॉर्डर लगाने का सुझाव दिया गया जिससे अगले 3 सालों तक चौबीसों घंटे उनकी ईसीजी की जांच करने में मदद मिलेगी। इससे डॉक्टर और उनकी टीम को बेहोशी आने के समय ईसीजी दर्ज करने और इन घटनाओं के पीछे का सही कारण समझने में मदद मिलेगी।
यह ऑपरेशन डॉ. सलिल शिरोडकर और विशेषज्ञों की उनकी टीम द्वारा किया गया था। यह दुर्लभ प्रक्रिया महाराष्ट्र में पहली बार की गई थी।
डॉ. सलिल शिरोडकर ने कहा, “इम्प्लांटेबल लूप रिकॉर्डर जो बहुत ही छोटा डिवाइस है, उसे लोकल एनेस्थीसिया के तहत छाती की त्वचा में लगाया गया था। यह डिवाइस उनके बांग्लादेश में रहने पर भी उनकी स्थिति की जांच करने में हमारी मदद कर रहा है। यह डिवाइस लगातार ईसीजी लेने के समान ही लगातार मरीज की दिल की लय को रिकॉर्ड करेगा और कोई भी असामान्य लय होने पर मोबाइल अलर्ट के रूप में संबंधित डॉक्टर को तुरंत ही सूचना भेजी जाएगी और डॉक्टर उस असामान्य लय को ऑनलाइन देख सकता है। इस तरह की तकनीक ने हमें विभिन्न देशों के मरीजों का इलाज करने में सक्षम किया है।”
इस डिवाइस को तेजी से और न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया से लगाया जा सकता है। यह डिवाइस ब्लूटूथ वायरलेस तकनीक के साथ आता है। इन तरह के मामलों में, ये डिवाइस उन मरीजों और परिवार के लिए मददगार होते हैं जो दूर हैं और जिन्हें तुरंत डॉक्टर से परामर्श की जरूरत होती है। यह डिवाइस दिल की लय संबंधित समस्याओं पर नजर रखता है, जिसे दर्ज करके मुख्य सर्वर और डॉक्टर को भेजा जाता है ताकि तुरंत कार्यवाही की जा सके।

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