नई उड़ान भरने को तैयार है शिवम

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10 साल के शिवम के सपने एक बार फिर नई उड़ान भरने को तैयार हैं। अब वह दूसरे बच्चों की तरह खेलना चाहता है, खूब पढ़ना चाहता है और दुनिया भर मे अपने पैरंट्स का नाम रोशन करना चाहता है। शिवम के जेहन मे एक बार फिर उम्मीद जगाने का क्रेडिट जाता है अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली के डॉक्टरों को।
दरअसल शिवम को कोलैप्स्ड वर्टिब्र नाम की बीमारी थी, जिसमे रीढ़ की हड्डियों के जोड़ मे फ्रैक्चर हो जाता है। रोबोटिक सर्जरी से शिवम की बीमारी का इलाज किया गया है। अपोलो के डॉक्टरों का दावा है कि इस बीमारी मे इससे पहले दुनिया भर मे कहीं भी रोबोटिक सर्जरी नहीं की गई थी। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला मामला है। झारखंड के रहने वाले शिवम को सीने के पास कोलैप्स्ड वर्टिब्रा था। इससे रीढ़ की हड्डी दब रही थी। समस्या पुरानी हो चुकी थी इसलिए इन्फेक्शन हो गया था और उस जगह पर पस जमा हो गया था। पहले शिवम को टीबी डाइग्नोस हुआ था। बाद मे बेहतर इलाज के लिए उन्हें झारखंड से दिल्ली, अपोलो अस्पताल मे लाया गया। सीनियर कंसलटैंट, न्यूरोसर्जरी, यहां डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और मिनिमल ऐक्सेस सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अरुण प्रसाद पूरी जांच के बाद रोबोटिक सर्जरी कराने की सलाह दी।
गुरुवार को आयोजित प्रेस कोन्फ्रेंस मे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि “सामान्य सर्जरी की जाती तो मरीज के सीने में और पीछे बड़ा चीरा लगाया जाता। इससे उसे लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता और घाव सेर से भरने की वजह से उसे डेली रूटीन मे लौटने मे लंबा समय लग जाता। रोबोटिक सर्जरी ने इन सारी दिक्कतों का आसान समाधान दे दिया। एनेसथेटिस्ट डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि, “इस मामले में ऐनेसथीसिया मरीज के दोनों ही फेफेड़े को दिया गया और इसके लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जबकि आम मामलों में एक ही फेफड़े में एनेसथीसिया दी जाती है। यह सर्जरी 15 जुलाई को की गई थी। इस प्रक्रिया में करीब दो घंटे का समय लगा था। अब शिवम आराम से चल सकता है।

-रोबोटिक सर्जरी से जुड़ी शिवम की रीढ़, अब सामान्य ज़िंदगी जी सकेगा 10 साल का बच्चा
-अपोलो अस्पताल का दावा: दुनिया मे पहली बार की गई है कोलैप्स्ड वर्टिब्र की रोबोटिक सर्जरी

कोलैप्स्ड वर्टिब्र की आम वजहें
आस्टियोपोरोसिस
ट्रोंमा
कैंसर/ट्यूमर

लक्षण
गंभीर फ्रैक्चर की हालत मे पीठ मे असहनीय दर्द होता है। लेकिन अगर इसकी वजह आस्टियोपोरोसिस या कोई अन्य बीमारी है, तो लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।

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