गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी के खतरे भी कम नहीं

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अधिकतर बड़े बाईपास ऑपरेशन मे जो खतरे होते हैं वे इसमे भी हैं। बाइपास सर्जरी के मरीजों को न सिर्फ अच्छी देख-रेख की बल्कि बल्कि इसमे खास डाइट और दवाओं की जरूरत भी हो सकती है। वजन-घटाने की सर्जरी कराने वाले 5 से 10% मरीजों को कोंप्लीकेशन ठीक करने के लिए फॉलो-अप सर्जरी की जरूरत पड़ती है। एब्डोमीनल हर्निया सबसे आम समस्या है जिसके लिए फॉलो-अप सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

होती हैं ये समस्याएँ
गैस्ट्रिक बाईपास की जो रेयर जटिलता है, वह है टांके अथवा सूचर के पास से लीकेज होना, पेट अथवा छोटी आंत मे अल्सर होना, फेफड़े अथवा पैरों मे खून का थक्का जमना (इससे बचने के लिए सभी मरीजों को ऑपरेशन के बाद कंप्रेशन स्टॉकिंग पहनने और एलएमडब्ल्यूएच थेरपी जरूर लेने की सलाह दी जाती है) पाउच या भोजन नाली मे खिंचाव से मरीज को उल्टी, पेट मे दर्द, गालब्लेडर मे सूजन और वजन घटने की प्रक्रिया फेल होने जैसी समस्या भी हो सकती है (हालांकि यह बेहद रेयर है)। पित्त की पथरी पित्त मे एकत्र होने वाले कोलेस्ट्रॉल व अन्य तत्वों का गुच्छ होती है। जब तेजी से अधिक मात्रा मे वजन कम हो रहा होता है तब, मरीज को पित्त की पथरी होने की आशंका ज्यादा होती है।

30% को हो जाती है न्यूट्रीशन की कमी
वजन घटाने की सर्जरी करने वाले तकरीबन 30% मरीजों मे पौष्टिकता की कमी हो जाती है, जैसे कि एनीमिया, आस्टियोपोरोसिस और मेटाबोलिक बोन डीजीज। अगर विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा मे लिए जाए तो इन दिक्कतों से बचा जा सकता है। ऐसे मे हमारे न्युट्रीशन के साथ फॉलो-अप जारी रखने की सलाह दी जाती है।

सर्जरी के बाद गर्भधारण मे दिक्कत
गर्भधारण की उम्र वाली महिलाओं को सर्जरी के बाद 12 से 15 महीने तक गर्भधारण, जब तक कि उनका वजन स्थिर न हो जाए, न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि तेजी से घटता वजन भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है।
चूंकि गैस्ट्रिक बाइपास प्रक्रिया रिवर्स हो सकती है, ऐसे मे सर्जरी करने का फैसला करने से पहले मरीजों को इसके फायदे-नुकसान के बारे मे समझ लेना बेहद जरूरी है।

गैस्ट्रिक बैंडिंग के खतरे
अधिकतर मरीजों को कम से कम एक साइड इफेक्ट होता है। सबसे आम साइड इफेक्ट मे शामिल है-मितली और उल्टी आना, हार्टबर्न और पेट मे दर्द। सबसे मभीर साइड इफेक्ट, जैसे कि बैंडेज का फिसलन/चीरा, दोबारा ऑपरेशन या अस्पताल मे भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।
इसका इस्तेमाल उन लोगों मे नहीं किया जाना चाहिए जो सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं हैं, पेट या आंत संबंधी कुछ खास तरह के डिसॉर्डर हैं, कोई संक्रमण है, जल्दी-जल्दी ऐस्पिरिन लेने की जरूरत पड़ती हो अथवा अल्कोहल अथवा ड्रग लेने के आदि हो गए हों। यह उन मरीजों पर भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जो सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा खाने पीने और व्यायाम संबंधी दिए गए सुझाओं को गंभीरता से अपनाने को तैयार नहीं हैं।
चूंकि गैस्ट्रिक बैंडिंग प्रक्रिया रिवर्स हो सकती है, ऐसे मे सर्जरी करने का फैसला करने से पहले मरीजों को इसके फायदे-नुकसान के बारे मे समझ लेना बेहद जरूरी है।

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