आप भी तो नहीं ‘रेडी-टु-ईट’ फूड के दीवाने

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ready to eat foodभागदौड़ भरी इस ज़िंदगी मे अगर किसी मामले मे सबसे ज्यादा समझौता किया जाता है तो वह है खाना पकाना। लेकिन भूख तो भूख है, वो तो लगेगी ही! ऐसे मे ऑप्शन क्या बचता है? पैकेज्ड या ‘रेडी-टु-ईट फूड’ (Ready-to-eat food) का। क्योंकि आजकल यह किसी भी स्टोर मे आसानी से उपलब्ध है और स्वाद मे भी लाजवाब है। आप भी शायद इस बात से इत्तेफाक रखते होंगे। लेकिन जनाब, हर वह चीज आपके जीवन के लिए अच्छी नहीं होती जो आसानी से उपलब्ध हो। अगर आप कभी कभार इन रेडी-टु-ईट (Ready-to-eat food) व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं तो कोई गुनाह नहीं है, लेकिन यदि आप इसके आदी हो चुके हैं तो थम जाइए। खाना पकाने से मिलने वाला यह आराम आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। आइये जानते हैं ‘रेडी-टु-ईट’ फ़ूड के नुकसान (harmful effect):

लेबल पर न करें आँख मूँद कर भरोसा: आप शायद इनके लेबल पढ़कर खुद को संतुष्ट कर लेते होंगे जहां लिखा होता है कि इसमें टृांसफैट, प्रिजर्वेटिव या मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी एमएसजी नहीं मिलाया गया है, लेकिन इनमें ऐसे कई छिपे तत्व भी होते हैं जो अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाएं तो सेहत के लिए हानिकारक साबित होते हैं। तमाम अध्ययन यह बताते हैं कि प्रॉसेस्ड और रेडी टु ईट फूड के लंबे समय तक इस्तेमाल से डायबीटीज, मोटापा और यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है।

हेल्दी न्यूट्रीएंट्स की कमीः पैकेज्ड खाने की चीजों की प्रॉसेसिंग इस तरीके से की जाती है ताकि इन्हें लंबे समय तक स्टोर किया जा सके और खाने के लिए सुरक्षित और स्वादिष्ट रहें लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान इन बातों का ध्यान रख पाना संभव नहीं होता है कि इनमें पोषण भी बरकरार रहे। बड़े ब्रांड जहां अपने उत्पादों में चीनी, नमक, फैट अथवा एडिटिव जैसी चीजें अच्छी क्वॉलिटी का इस्तेमाल करते हैं लेकिन सस्ते ब्रांड के मामले में इन चीजों की गुणवत्ता की भी गारंटी नहीं होती है। ये उत्पाद बनाने वाली कंपनियां उत्पादों को लंबे समय तक ताजा बनाए रखने, उनका फ्लेवर बढ़ाने और टेक्चर व रंग अच्छा दिखाने के लिए आर्टिफ़िशियल स्वीटनर, नमक, फैट या एडिटिव इस्तेमाल करते हैं।

नुकसान पहुंचाने वाली चीजें
आर्टिफ़िशियल स्वीटनर: लोग अक्सर खाने की चीजों के पैकेट पर शुगर फ्री का लेबल देखकर खुश हो जाते हैं लेकिन वे यह नहीं सोचते हैं कि इसमें कृत्रिम शुगर मिलाया गया है। डायबीटीज पीड़ित लोग तो इसे अपने लिए वरदान मान लेते हैं। मगर वे इस बात को लेकर जागरूक नहीं होते हैं कि सैक्रीन, ऐस्पारटेम और फ्रूक्टोस जैसे कृत्रिम शुगर उत्पादकों के लिए आसानी से और कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं। यही वजह है कि वे तकरीबन सभी रेडी टु ईट पैकेज्ड चीजों में इनका इस्तेमाल करते हैं। अध्ययन बताते हैं कि इनके लंबे समय तक इस्तेमाल से कैंसर हो सकता है।

मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी एमएसजीः यह तत्व कृत्रिम अथवा प्राकृतिक दोनों रूपों में उपलब्ध है। मोनोसोडियम ग्लूटामेट खाने की प्राकृतिक चीजों का फ्लेवर बढ़ाता है। लेकिन इसके साथ समस्या यह है कि यह उत्पाद ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर सकता है जिससे कुछ लोगों को माइग्रेन की समस्या हो सकती है।

सोडियम नाइट्रेटः पैकेज्ड व रेडी टु ईट खाने की चीजों खासतौर से मीट वाले उत्पाद की लाइफ बढ़ाने के लिए इसमें सोडियम नाइट्रेट मिलाया जाता है। सोडियम नाइट्रेट वाली चीजें खाने से बालों के झड़ने, त्वचा में एलर्जी, सिरदर्द और पेट की समस्याएं हो सकती हैं।

बेहतर है बचाव
जब भी डिब्बाबंद या पैकेट वाली खाने की चीजें खरीदें तब अपने दिमाग में यह बात जरूर रखें कि यह आपकी सेहत के लिए खतरनाक है। अगर आप लगातार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसके लाजवाब स्वाद और फ्लेवर की आपको आदत लग सकती है। ऐसे में अपनी सेहत की खातिर ऐसी चीजों के लगातार इस्तेमाल और इसकी लत में पड़ने से बचें।

ऐसे सुधारें अपनी आदत
-प्रॉसेस्ड मीट की जगह ताजे रोस्टेड लीन मीट का इस्तेमाल करें
-डिब्बाबंद फलों की जगह ताजे फल खरीदें
-नास्ते में अंकुरित अनाज, दूध और फल आदि का इस्तेमाल अधिक करें
-होल ग्रेन आटा या ब्रेड खरीदें और ह्वाइट ब्रेड के इस्तेमाल से बचें
-खाना पकाने के लिए वक्त निकालें, कुकिंग के आसान तरीके अपनाएं अथवा कोई कुक रखें
-खाने पकाने की शुरूआत छुट्टी वाले दिनो से करें और फिर धीरे-धीरे इसे नियमित की आदत में बदलें
-ऐसे स्नैक्स खरीदें जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक हो

कनिका मल्होत्रा,
सीनियर क्लीनिकल न्युटृीशनिस्ट
हेल्थकेयर ऐट होम

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