लाइफस्टाइल मैनेजमेंट से भगाएँ सिरदर्द

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Headache management

सिरदर्द वह दर्द है या डिसकंफर्ट है जो सिर, स्कल्प या गर्दन में होता है। गंभीर कारणों से सिरदर्द होना काफी रेयर होता है। आमतौर पर सिरदर्द को लाइफ स्टाइल में बदलाव, रिलैक्सेशन के तरीके सीखकर और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेकर दूर किया जा सकता है। मगर अपनी मर्जी से बार-बार पेनकिलर लेना भी सिरदर्द की वजह हो सकता है, क्योंकि हल्का दर्द होने पर भी पेन किलर लेने की आदत हो जाती है और दो-तीन महीने तक लगातार ऐसा करने से सिरदर्द रीबाउंड हो जाता है और जब तक पेनकिलर न लो ठीक नहीं होता। ऐसे मे एक्सपर्ट्स यह सलाह देते हैं कि जहां तक हो सके सिरदर्द को लाइफस्टाइल मैनेजमेंट से दूर भगाएँ:
मूलचंद हॉस्पिटल के इंटर्नल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. वरिंदर आनंद और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल कहते हैं कि सिरदर्द चार तरह के होते हैं।
1. माइग्रेन, 2. टेंशन हेडेक (मसल्स में खिंचाव),3. ट्युमर हेडेक और 4. साइनस हेडेक।

ये वजहें हैं आम
आमतौर पर स्कल्प की मसल्स में खिंचाव के कारण सिरदर्द होता है।
फिजिकल स्ट्रेस- लंबे टाइम तक मैनुअल लेबर और डेस्क या कंप्यूटर के सामने बैठकर घंटों काम करना।
इमोशनल स्ट्रेस एंड जेनेटिक रीजन- किसी बात को लेकर मूड खराब होने, देर तक किसी बात पर सोचते रहने से भी सिरदर्द हो सकता है। सिरदर्द के लिए जेनेटिक कारण भी 20 पर्सेंट तक जिम्मेदार होते होते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी का माइग्रेन आदि का पारिवारिक इतिहास है तो उसे भी हो सकता है।
– नींद पूरी न होने, वक्त पर खाना नहीं खाने से भी सिर दर्द हो सकता है, क्योंकि नींद पूरी न होने से पूरा नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है और ब्रेन की मसल्स में खिंचाव होता है, जिससे दर्द हो जाता है। वक्त पर खाना न खाने से कई बार शरीर में ग्लूकोज की कमी हो जाती है या पेट में गैस बन जाती है, जिससे सिरदर्द हो सकता है।
– ज्यादा अल्कोहल लेने से भी सिरदर्द हो सकता है।
– किसी और बीमारी की वजह से भी सिर दर्द हो सकता है, यहां तक कि आंख, कान, नाक और गले की दिक्कत भी सिरदर्द दे सकती है।
– एनवायर्नमेंटल फैक्टर भी तेज सिरदर्द के लिए जिम्मेदार होते हैं, उदाहरण के तौर पर गाड़ी के इंजन से निकलने वाला कार्बन मोनोऑक्साइड भी सिरदर्द दे सकता है।

ऐसे करें पहचान
– माइग्रेन हेडेक में आमतौर पर सिर के आधे हिस्से में दर्द होता है और सिरदर्द के वक्त मितली या उल्टी भी आ सकती है। इसकी फ्रिक्वेंसी के हिसाब से मेडिसिन लेनी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर अगर महीने में दो-तीन बार से ज्यादा बार माइग्रेन हो तो डॉक्टर की सलाह से दवा ले सकते हैं।
-टेंशन हेडेक में सिर के आगे वाले हिस्से में दर्द होता है। आमतौर पर यह दर्द आराम करने से ठीक हो जाता है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन अगर जिंदगी में पहली बार ऐसा दर्द होता है तो डॉक्टर की सलाह से सीटी स्कैन कराएं।
-ट्युमर हेडेक में एक दम से अचानक दर्द शुरू होता है और सिर के किसी खास हिस्से में दर्द होता है, जिसे आसानी से प्वाइंट किया जा सकता है। इसमें उल्टी भी आती है।
– साइनस हेडेक में जुकाम, खांसी के साथ सिरदर्द होता है और आमतौर पर आगे झुकने पर तेज दर्द होता है। आमतौर पर मरीज यह शिकायत करता है कि जूतों के फीते बांधते वक्त, नीचे से उठाते वक्त दर्द होता है।

ऐसे मिल सकता है छुटकारा
नींद की आदत सुधारें- रात में कम से कम 6-8 घंटे की नींद जरूर लें और सोने- जागने का शेड्यूल एक जैसा रखने की कोशिश करें।
बेवजह की टेंशन न लें- भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे आगे रहने की टेंशन लेने के बजाय कॉंपिटीशन के साथ सामान्य रूप से जीने की आदत डालें और टेंशन को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन, हॉबी क्लास, गेम्स आदि का सहारा लें।
एक्सरसाइज है महत्वपूर्ण- हेडेक से बचाव में एक्सरसाइज की भूमिका काफी अहम है, क्योंकि इससे शरीर में एंडॉर्फिन रिलीज होता है, जो कि शरीर के लिए नैचरल पेनकिलर का काम करता है।
स्मोकिंग से बचें- स्मोकिंग से खून की नलियां और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे मसल्स में ब्लड सर्कुलेशन सही ढंग से नहीं हो पाता और तेज सिरदर्द हो जाता है।
ज्यादा अल्कोहल से बचें- बहुत ज्यादा अल्कोहल लेना भी हेडेक की वजह हो सकता है, इसलिए कम पिएं। साथ ही डीहाइड्रेशन से बचने के लिए ड्रिंकिंग सेशन के बाद खूब सारा पानी पीने की सलाह भी दी जाती है।
लिक्विड है जरूरी- कई बार डीहाइड्रेशन से भी सिरदर्द हो जाता है। खूब पानी और पर्याप्त हेल्दी फ्ल्युड से माइनर सिरदर्द को रोका जा सकता है।
गर्दन को स्ट्रेच करें- अपनी गर्दन और शरीर के बाकी ऊपरी हिस्से को थोड़ी- थोड़ी देर पर स्ट्रेच करना न भूलें, खासतौर से तब जब आज डेस्क पर या कंप्यूटर, लैपटॉप पर देर तक काम करते हैं।
अच्छा खाएं- आप जो खाते हैं उससे ब्रेन की केमिस्ट्री प्रभावित होती है और इससे ब्लड वेस्सेल्स का साइज भी चेंज हो सकता है। इतना ही नहीं, कुछ खास फूड और बेवरेज से किसी को एलर्जी भी हो सकती है, जिसके इस्तेमाल से सिरदर्द हो सकता है।
ज्यादा कैफीन लेने से बचें- लगातार घंटों काम के स्ट्रेस से बचने के लिए लोग काफी ज्यादा चाय, कॉफी आदि पीते रहते हैं, जिनमें कैफीन होता है। ज्यादा कैफीन लेने से भी सिरदर्द हो सकता है।

इस हालत में बिलकुल न लें पेनकिलर
– प्रेग्नेंसी में अपनी मर्जी से कोई भी पेनकिलर अजन्मे लेना बच्चे के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए ऐसी हालत में पेनकिलर न लें।
– एक दिन में तीन पैग अल्कोहल लेने वाले भी पेन किलर बिल्कुल न लें, क्योंकि यह कॉंबिनेशन तुरंत लिवर को खराब कर सकता है।

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