फन के साथ बीमारी न दे दे स्विमिंग पूल

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तपती गर्मी मे पूल (swimming pool) का नीला पानी किसी को भी लुभा सकता है, यही वजह है की गर्मियों मे बहुत सारे लोग स्विमिंग पूल (swimming pool) की मेंबरशिप लेते हैं। लेकिन क्या आपको यह पता है कि पूल मे गोते खाने के दौरान आपका किन चीजों से सामना हो सकता है? अगर आप यह सोचते हैं सिर्फ पूल मे डला क्लोरीन आपको सारी समस्याओं से सुरक्षित कर सकता है, तो आप गलतफहमी मे हैं।

आमतौर पर लोग यह सोचते हैं कि पूल मे क्लोरीन डला है इसलिए इसका पानी स्टेराइल होगा, लेकिन सच तो यह है कि जैसे ही पूल मे कोई इंसान प्रवेश करता है उसके बाद पानी स्टेराइल नहीं रह जाता है। पूल के पानी मे बहुत सारे बैक्टीरिया और जर्म्स हो सकते हैं।

ये बैक्टीरिया और जर्म्स जो आपके अथवा आपके स्वीमर साथियों के शरीर से आते हैं उनपर क्लोरीन का असर होना मुश्किल है।
इसका एक सबसे बड़ा कलप्रिट है यूरीन और इसी की वजह से स्विमर्स की आँखं लाल और इसीटेटेड हो जाती हैं, न कि सिर्फ क्लोरीन की वजह से। दरअसल जब यूरीन क्लोरीन के साथ मिक्स होता है तब एक विशेष प्रकार का रिएक्शन होता है।

जब क्लोरीन यूरिन और अन्य प्रकार के कचरे के साथ फाइट करता गई तब वो हमे बैक्टीरिया और जर्म्स से पूरी तरह प्रोटेक्ट करने की क्षमता खो देता है।
क्लोरीन आपके द्वारा पूल मे लाई गई चीजों के साथ घुल जाता है और ऐसे मे जर्म्स को मारने के लीए यह पर्याप्त मात्रा मे नहीं बचता।

तमाम अध्ययनों के मुताबिक एक व्यक्ति द्वारा पूल मे पहुँचने वाली गंदगी की मात्रा:
• 1 से 2 सोडा कैन के बराबर पसीना
• 0.14 ग्राम यूरीन
• 1 कप मल
• और लाखों प्रकार के जर्म्स
बच्चे 10 ग्राम तक यूरीन पूल मे ले आते हैं। यानी अगर किसी वाटर पार्क मे 1000 बच्चे जाते हैं तो वे लगभग 10,000 ग्राम यूरीन पानी मे छोड़ेंगे।

अन्य खतरे
पूल के पानी मे नोरोवायरस, ई कोलाइ, और लेजियोनेला जैसी बीमारियों का खतरा भी रहता है। क्लोरीन इन्हें मार देता है लेकिन क्लोरीन का असर होने और जर्म्स के मरने के बीच के छोटे से अंतराल मे मामूली मात्रा मे भी पूल का पानी मूंह मे चला जाता है तो इन्फेक्शन हो सकता है।
लेकिन डायरिया मे पाया जाने वाला एक प्रकार का पैरासाइट क्रिप्टोस्पोरीडियम क्लोरीन वाले पानी मे भी 10 दिनों तक जीवित रह सकता है और आपको हफ्तों के लिए बीमार कर सकता है।

2012 मे आई एक सीडीसी स्टडी मे रिसर्चरों ने ऐसे 69 स्विमर्स को लेकर स्टडी की जिन्हें वॉटरबोर्न बीमारियाँ थीं। इनमे से आधे से ज्यादा की बीमारी के लिए पैरासाइट क्रिप्टो जिम्मेदार था। क्रिप्टो क्लोरीन रेजीस्टेंट होता जर्म्स का एक प्रकार है।

स्वास्थ्य मानकों के अनुसार क्लोरीन का स्तर 1.0 से 3.0 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) होना चाहिए।
इस बारे स्विमर्स को अपने स्तर पर सतर्क रहना चाहिए। एक टेस्टिंग किट लेकर रेग्युलर जांच से पूल के पानी मे क्लोरीन का स्तर मापा जा सकता है। बहुत ज्यादा जर्म्स होने पर पानी मे क्लोरीन की मात्रा कम हो सकती है।
साथ ही पूल मे प्रवेश करने से पहले नहाने और बीमार होने की हालत मे पूल से दूर रहकर भी आप पूल को संक्रमित होने से बचा सकते हैं।

जर्म्स फैलने से बचाव के अन्य तरीके:
• अपने मूंह मे पूल का पानी न जाने दें।
• पूल मे मल-मूत्र न छोड़ें।
• स्विमिंग के बीच मे बाथरूम जाने के लिए ब्रेक जरूर लें।

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