हार्ट हेल्दी मंथ है सितम्बर!

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healthy heartसितंबर महीने में सबसे कम होता है हार्ट अटैक, मगर डायबीटीज पीड़ितो के मामले में नहीं। हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के मामले में एक सीजनल पैटर्न भी देखा गया है।

सबसे खतरनाक मामले (तकरीबन 20-30 पर्सेंट मामलों का अंतर) गर्मी के मुकाबले सर्दी के दिनों में अधिक होते हैं। मगर उन लोगों में इस तरह का पैटर्न नहीं दिखता है जो लोग या तो डाबीटीज से पीड़ित हैं अथवा बीटा ब्लॉकर्स या ऐस्पिरिन जैसी दवाओं पर हैं।

हार्ट अटैक के ट्रेंड  जेंडर, भौगोलिक स्थानों,  उम्र और हार्ट अटैक के प्रकार (एसटी एलिवेशन अथवा नॉन-एसटी एलिवेशन) के मामले में अलग-अलग दिखते हैं। अस्पतालों में हार्ट अटैक संबंधी मृत्युदर के मामले में भी सीजनल पैटर्न दिखता है, जो कि सर्दियों में सबसे ज्यादा 9 पर्सेंट और गर्मियों का सबसे ज्यादा 8.4 पर्सेंट होता है। हार्ट अटैक से सबसे ज्यादा मौतें जनवरी में और सबसे कम मौतें सितंबर महीने में होती हैं, इनमें संबंधित खतरों की भिन्नता 18.6 पर्सेंट होती है।

सीने में दर्द का असेसमेंट

एक फोकस्ड हिस्ट्री  पता करें और फिजिकल जांच करें

सबसे पहले जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के कारण को बाहर निकालें

सीने में हो रहा ऐसा दर्द जिसकी जगह को उंगली दिखाकर बताया जा सके और दर्द 30 सेकंड से कम समय तक रहे, वह कार्डिएक संबंधी दर्द नहीं होता है

ईसीजी और/अथवा चेस्ट का एक्सरे करें

एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (acute coronary syndrome)  की आशंका (अगर एक्यूट मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन अथवा अस्थायी एंजाइना यानी चेस्ट पेन है) ऐसे में 300 एमजी का चबाने लायक वॉटर सॉल्युबल ऐस्पिरिन दें और मरीज को आईसीसीयू में शिफ्ट करें /मरीज हॉस्पिटल में नहीं है तो उसे ऐसे एंबुलेंस से जिसमें डीफिब्रिलेटर की सुविधा हो, नजदीकी सीसीयूआई में पहुंचाएं।

अगर उपलब्ध हो तो 80 एमजी एटॉरर्वेसटेटिन (atorvastatin) भी दें, अगर वायग्रा जैसी दवाओं के इस्तेमाल का इतिहास हो तो 600 एमजी क्लॉपीडॉगरल (clopidogrel) और सब लिंगुअल नाइटृट (sublingual nitrate)  भी दें।

ऐसे पहचानते हैं एसीएस

ए. रिपीटीशन,  ड्युरेशन और टाइम  (रात के समय होने वाले दर्द और आराम के समय होने वाले दर्द के मामले में ) एंजाइना से पहले और एंजाइना के समान लक्षणों  की स्थिति बदतर होना।

बी. कार्डियोव्स्कुलर के पहचाने जा चुके इतिहास वाले मरीज में सांस लेने में दिक्कत, मितली आने, पसीना आने और गंभीर चक्कर महसूस होने के सिस्टम में नयापन दिखना ।

सी. ऐसे मरीजों में टिपिकल एंजाइना के लक्षण दिखाई देना जिनमें कार्डियोवस्कुलर डिजीज का कोई इतिहास न हो।

डी. घरघराहट के फिजिकल एग्जामिनेशन में कुछ नया ट्रेंड दिखना (अथवा पहले के मुकाबले स्थिति खराब होना) हाइपोटेंशन, डायफोरेसिस, रेल्स या पल्मनरी एडिमा।

ई.  ट्रांजिएंट  एसटी डेविएशप (1 मिमी से उपर -नीचे) अथवा मल्टिपल प्रीकॉर्डियल लीड्स में टी वेव इन्वर्जन।

एफ. 40 साल की उम्र के बाद पहली बार सांस लेने में तकलीफ महसूस होना अथवा पहली बार एसिडिटी अटैक होना।

हार्ट अटैक के कारण

   गंभीर हार्ट अटैक के खतरे के बढ़ने का संबंध नौ रिस्क फैक्टर से सबसे अधिक होता है। दुनिया भर में 90 पर्सेंट से भी अधिक मामलों में इन नौ परंपरागत रिस्क फैक्टर के आधार हार्ट अटैक का पूर्वानुमान लगाया जाता है। इसका मतलब है कि दुनिया भर में 90 पर्सेंट खतरे को  रोका जा सकता है।

गंभीर हार्ट अटैक के लिए दुनिया भर में जो दो सबसे महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर रहा है उसमें एक असामान्य अपोलिपोप्रोटीन बी/अपोलिपोप्रोटीन ए-1 (एपीओबी/एपीओ-1) का स्तर और सिगरेट पीना (इनसे क्रमशः 4 और 3 गुना खतरा बढ़ जाता है)। इन दोनों को साथ लेकर चलें तो, मौजूदा धूम्रपान और एक असामान्य एपीओबी/एपीओ-1 स्तर ग्लोबल हार्ट डिजीज के 66 पर्सेंट मामलों का पूर्वानुमान लग सकता है। लिपिड और धूम्रपान संबंधी खतरा उम्रदराज लोगों की तुलना में युवाओं (55 साल से कम उम्र के पुरूष व 65 साल से कम उम्र की महिलाओं ) में पाया गया।

– डायबीटीज, हाइपरटेंशन, पेट का मोटापा, मानसिक  उतर-चढ़ाव जैसे कि तनाव और डिप्रेशन, एक्सरसाइज, डाइट और अल्कोहल लेना अन्य रिस्क थे जिनके आधार पर गंभीर हार्ट अटैक का पूर्वानुमान लगाया गया।

–  पेट का मोटापा बीएमआई से बड़ा रिस्क फैक्टर होता है, मोटापे के इंडिकेटर के तौर पर बीएमआई की जगह कमर से हिप के औसत की माप को लिया जाना चाहिए।

– रोजाना फल व सब्जियों का इस्तेमाल, हल्की या कठोर एक्सरसाइज और अल्कोहल का इस्तेमाल (हफ्ते में तीन बार के  आस-पास) जैसे फैक्टर सुरक्षात्मक पाए गए।

 

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