इंफेक्शन के इलाज मे बेस्ट है होमियोपैथी

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अक्सर हम गले, नाक, कान और मुंह के मामूली संक्रमण मे भी एंटीबायटिक दवाईयों का सेवन करते हैं। इनका आपको इनसे फायदा हो ना हो, बार-बार इस्तेमाल करने से एंटिबायटिक दवा के लिए शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। पर शायद आपको यह नहीं पता होगा कि इन समस्याओ के इलाज में होमियोपैथी ज्यादा असरदार साबित होती है और इनसे रेजिस्टेंस का खतरा भी नहीं होता है। एक्स्पर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ मामूली इंफेक्शन ही नहीं, हेपेटाइटस ए जैसे खतरनाक संक्रमण को भी काबू में किया जा सकता है। अगर होलिस्टिक ऐप्रोच के साथ अगर न्यूट्रीशनल सप्लिमेंट और हर्बल लिवर सपोर्ट के साथ अगर होमियोपैथी से इलाज किया जाए तो रिजल्ट काफी अच्छा मिलता है।

इसी सिलसिले में हमने होमियोपैथी के जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. ए. के. अरुण से बात की। उन्होने बताया, भारत जैसे विकासशील देशों मे एलोपैथी का महंगा इलाज आम आदमी की पंहुच से बाहर होता जा रहा है, ऐसे में होमियोपैथी एक सस्ता और मुकम्मल विकल्प साबित हो सकता है। साथ ही रोगों को जड़ से खत्म करने की प्रकृति के कारण इसका प्रचलन विश्व भर मे काफी तेजी से बढ़ रहा है।

हॉवर्ड की रिपोर्ट ने भी की है पुष्टि
हाल ही मे अमेरीकन जनरल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हॉवर्ड के अध्ययन में इन दावों कि पुष्टि हुई। इस अध्ययन के अनुसार होमियोपैथी के इस्तेमाल से अनावश्यक एंटीबायटिक के सेवन में कमी आएगी। इससे ये आम लोगों के स्वास्थय के लिए लाभकारी साबित होगी। एंटीबॉयोटिक के कम सेवन करने से लोगों मे रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत होगी। इसके अलावा श्वास से जुड़ी समस्याओं का होमियोपैथी के माध्यम से सस्ता और सफल इलाज मुमकिन हो पाएगा।

एंटीबयटिक के अधिक इस्तेमाल से नुकसान
एक अध्ययन के मुताबिक भारत जैसे विकासशील देशों में 50 प्रतिशत लोग एंटीबॉयोटिक का इस्तेमाल करते हैं। डॉक्टर की सलाह लिए बिना लोग अधिकतर आम मेडिकल स्टोर से एंटीबॉयोटिक दवा ले लेते हैं। दरअसल एंटीबॉयोटिक का इस्तेमाल शरीर में संक्रमण के दौरान जन्मे बैक्टीरिया को मारने का काम करता है। लेकिन एंटीबॉयोटिक के अधिक सेवन करने से बुरे बैक्टीरिया के साथ अच्छे बैक्टीरिया भी मर जाते हैं जिनकी हमारे शरीर को जरूरत होती है। एंटीबॉयोटिक के अधिक सेवन से हमारा शरीर उन एंटीबॉयोटिक के अनरूप ढल जाता हैं और एक समय बाद हमारे शरीर पर इनका कोई प्रभाव नही पड़ता। जिस कारण रोगो के प्रति हमारी प्रतिरोधक क्षमता कम हो होने लगती है।

होमियोपैथी के हैं कई फायदे
जब भी हम किसी रोग से संबंधित इलाज कराते हैं तो हमें उस रोग से जल्द छुटकारा चाहिए होता है। कभी-कभी वो रोग कुछ समय बाद हमारे शरीर के अंदर फिर अपना असर दिखाने लगता है। अगर हम अपने बीमारियों का इलाज होमियोपैथी के जरिए कराते हैं तो इससे बीमारी की जड़ शरीर के अंदर से उखड़ जाती हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी लंबा समय लगता है पर असरदार होता है।

होमियोपैथी चिकित्सा अन्य चिकित्सा सुविधाओं से काफी किफायती है। इससे सभी लोग आसानी से अपने रोगों का इलाज करा सकते हैं। आमतौर पर होमियोपैथी में मीठी गोलियों में सप्लीमेंटस डालकर मरीजों को दिया जाता है। जिस कारण बच्चे भी इसे पसंद करते हैं।

महामारी में भी सार्थक साबित हुई
होमियोपैथी का बढ़ता चलन सिर्फ इसके किफायती होने या मीठी गोलियों के द्वारा ही नही है बल्कि इसकी सार्थकता के कारण है। 1854 में लंदन में फैली महामारी कॉलरा मे एलोपैथी चिकित्सा के 53.2% मृत्युदर के मुकाबले होमियोपैथिक उपचार से कॉलरा रोगियों की मृत्युदर मात्र 24.4% थी। इसके अलावा 1892 मे जब येलो फीवर ने लगभग पूरे जर्मनी को अपनी चपेट में ले लिया था उस समय भी इस पर होमियोपैथी दवाओं द्वारा ही नियंत्रण पाया गया था। इसके बाद 1962-64 मे न्यूयार्क मे फैली डिप्थीरिया और 1918 दुनिया भर मे फैले इन्फ्लूएंजा के रोकथाम मे भी होमियोपैथी की अहम भुमिका रही।

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