आप कर रहे हैं सही डियोडरंट का इस्तेमाल?

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how to choose right deodorant for sweating
पसीना (sweating) आना अथवा पर्सपिरेशन शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे तपती गर्मी में भी शरीर को ठंडक मिलती है और इसका तापमान नियंत्रण में रहता है। त्वचा के नीचे स्थित पसीने की ग्रंथियों (sweat gland) से नमकीन तरल (salty liquid) निकलता है। शरीर के जिन हिस्सों में सबसे ज्यादा पसीना (sweating) आता है, वे हैं बांहों के निचले हिस्से यानी आर्मपिट, पैर और हाथों की हथेलियां। ऐसी कई वजहें हो सकती हैं जिनसे आपको अत्यधिक पसीना (sweating) आता है। उदाहरण के तौर पर, शारीरिक व्यायाम, तापमान में बढ़ोत्तरी, अचानक दौरा पड़ना अथवा एंग्जाइटी या घबराहट महसूस होना। अधितर लोगों को सामान्य मात्रा में पसीना  (sweating) आना है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें अत्यधिक पसीना आता है। कुछ लोगों की पसीने की ग्रंथियां (sweat gland) ज्यादा सक्रिय होती हैं, यह एक सिंडृोम होता है जिसे हाइपरहाइडृोसिस (hyperhidrosis) कहते हैं। इस समस्या को कम करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। पसीने की दुर्गंध से राहत के लिए डियोडरंट (deodorant) का इस्तेमाल बेहद आम बात है। लेकिन क्या आप सही डियोडरंट (right deodorant) का इस्तेमाल कर रहे हैं? क्या आप यह जानते हैं कि जो उत्पाद आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें कौन से तत्व इस्तेमाल हुए हैं और इनका आपकी त्वचा पर क्या असर हो सकता है? 

सही उत्पाद चुनने के लिए रखें इन बातों का ध्यानः
हानिकारक केमिकल से रहें दूरः एल्युमिनियम कंपाउंड जैसे कि एल्युमिनियम क्लोराइड वाले डियोडरंट कुछ लोगों में त्वचा में इरिटेशन और एलर्जिक रिएक्शन की वजह बन सकते हैं। डियोडरंट में काफी मात्रा में अल्कोहल भी होता है जो संवेदनशील त्वचा पर बुरा असर डाल सकता है। बेहतर है कि आप अल्कोहल-फ्री डिडयोडरंट चुनें। अन्य हानिकारक केमिकल्स हो सकते हैं पैराबींस-यह एक तरह का कृत्रिम प्रिजर्वेटिव है जिसका इस्तेमााल कॉस्मेटिक्स में काफी ज्यादा मात्रा में होता है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इस केमिकल से स्तन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। डियोडरंट में इस्तेमाल होने वाले जिन अन्य केमिकलों की जांच और इनसे बचने की जरूरत होती है वे हैं, प्रॉपलीन ग्लायकोल, टृाइक्लोजन, टृाइथेनोलामाइन और आर्टिफिशियल रंग।

सेंसिटिव स्किन है तो तेज खुशबू से करें परहेजः हर किसी के लिए आर्टिफिशियल खुशबू अच्छी नहीं होती। अधिकतर डियोडरंट में अल्कोहल के साथ खुशबू वाले ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी कुछ खुशबुएं त्वचा पर कॉस्मेटिक एलर्जी की वजह बन सकती हैं। तो अगर आपको खुशबू से एलर्जी है तो मंद खुशबू वाले डियोडरंड चुनें और डियोडरंट को त्वचा पर छिड़कने के बजाय कपड़ों पर डिछ़कें।

डियोडरंट या एंटी-पर्सपिरेंट्स? क्या आप जानते हैं डियोडरंट और एंटी-पर्सपिरेंट में अलग-अलग संयोजन होता है और इनका इस्तेमाल भी अलग-अलग होता है? एंटीपर्सपिरेंट ऐसे डियोडरंट होते हैं जो पर्सपिरेशन बंद करने के लिउ पसीने की ग्रंथियों पर काम करते हैं। दूसरी ओर, डियोडरंट अंडरआर्म की दुर्गंध रोकता है क्योंकि इसमें खुशबू होती है और त्वचा पर दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकने वाले एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं। तो आपको एंटी-पर्सपिरेंट की जरूरत है अथवा डियोडरंट की, यह बात आपके शरीर की जरूरत पर निर्भर करती है। अगर आपको अत्यधिक मात्रा में पर्सपिरेशन नही होता है, बावजूद इसके आपको पसीने की दुर्गंध परेशान करती है तो आपके लिए डियोडरंट सही चुनाव हो सकता है। दूसरी ओर, अगर आपको अत्यधिक पसीने के साथ दुर्गंध की समस्या होती है तो आापके लिए एंटी-पर्सपिरेट सही चुनाव हो सकता है।

स्टिक अथवा स्प्रेः यह आपकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर है। जो लोग डियोडरंट को सीधे त्वचा पर लगाना पसंद करते हैं वे अक्सर स्टिक लेना पसंद करते हैं। वहीं कुछ लोग डियोडरंट को शर्ट पर स्प्रे करना पसंद करते हैं, तो उन्हें स्प्रे बेहतर लगता है। दोनों का इस्तेमाल आसान होता है। हालांकि, कई बार स्टिक आपके कपड़ों पर धब्बे छूट जाते हैं, खासतौर से तब जब आपके कपड़ों का रंग गाढ़ा हो।

 

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