मौसमी एलर्जी को रखें अपने घर से दूर

Share:

how-to-combat-winter-allergy
जैसे ही सर्दियों का मौसम शुरू होता है एलर्जी (winter allergy) की समस्या अपने उफान पर पहुंच जाती है, जिससे बचाव के लिए पहले से ही कुछ उपाय कर लेना ठीक रहता है
सर्दियों की एलर्जी (winter allergy) आपको बीमार कर सकती है, इससे आपकी नाक बहनी शुरू हो जाती है अथवा बंद हो जाती है और साथ में गले में खरास भी हो जाती है। आंखों में खुलजाहट और लाली आ जाती है, छींक और कफ की समस्या बढ़ जाती है। फफूदी और धूल-मिट्टी के कण, जानवरों की रूसी और कुछ परफ्यूम जैसी चीजें एलर्जी की समस्या बढ़ाने का काम करते हैं। ठंड के मौसम में, आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जानवरों की खुस्की, धुआं, गैस का फ्यूम, मिट्टी के कण जैसी चीजें आपकी नाक बहने या इसे बंद करने का कारण बन सकते हैं। कोल्ड यानी सर्दी जुकाम एक मौसमी समस्या है, लेकिन एलर्जी लंबे समय तक परेशान करती है।

ठंड मे ज्यादा एक्टिव हो जाते है एलर्जी के ट्रिगर्स
मौसमी ट्रिगर्स (triggers), जैसे कि जानवरों की खुस्की, फफूदी और मिट्टी के कण जैसी चीजें पूरे साल वातावरण में मौजूद रहते हैं, लेकिन ठंड के मौसम में ये इसलिए ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं क्योंकि लोग कमरे की सारी खिड़कियां और दरवाजे आदि बंद कर लेते हैं और ठंड से बचाव के लिए रूम हीटर आदि चला लेते हैं। ऐसे में कमरे का वातावरण इन चीजों के पनपने के लिए अनुकूल हो जाता है।

इस तरह की एलर्जी के असर को तभी नियंत्रित किया जा सकता है जब आप यह समझ सकें कि समस्या की वजह क्या है। समस्या बढ़ाने वाले घर के अंदरूनी संभावित कारण इस प्रकार हैं:
फफूंदी के जीवाणुः जब सांस लेने के दौरान अस्थमा के मरीजों के शरीर में वातावरण में मौजूद फफूंदी के जीवाणु प्रवेश कर जाते हैं तब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है, ये जीवाणु आपको नजर नहीं आते हैं। हवा में पुआल जैसे कण भी समस्या बढ़ाने की वजह हैं। फंगस बाथरूम और बेसमेंट जैसी नमी वाली जगहों पर पनपता है।

धूल के कणः धूल के कण साफ दिखने वाले वातावरण में भी मौजूद रहते हैं। घर के अंदर मौजूद धूल कण आंखों से पानी आने की समस्या, नाक बंद होने और लगातार छींक आने जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ये आपके तकिए, गद्दों, कमरे की सजावटी चीजों, पर्दों और कारपेट आदि में जमा रहता है।

जानवरों की खुस्कीः ठंड में एलर्जी की समस्या बढ़ाने का काम पालतू जानवरों के फर नहीं बल्कि जानवरों के लार और मूत्र में मौजूद प्रोटीन करता है। जानवरों की खुस्की बहुत ही हल्की होती है और यह आसानी से आपके कपड़ों, जूतों और बालों में चिपक जाती है।

आप समस्या की वजह पहचानकर ठंड में होने वाली एलर्जी से बच सकते हैं। ठंड में हम आमतौर पर नाक बहने, खांसी, आंखों में खुजली व जलन, छींक आने और यहां तक कि आंखों के आस-पास काले घेरे जैसे लक्षणों से दो-चार होते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण एक हफ्ते से अधिक समय तक बरकरार रहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बचाव के कुछ उपायों को अपना लेना हमेशा बेहतर रहता हैः

घर के वेंटिलेशन का करें इंतजामः जैसे ही सर्दियां आती हैं हम अपने कंबल, गद्दों, सॉफ्ट ट्वायज, तकिए और उनी कपड़ों से नजदीकी बढ़ा लेते हैं। इन चीजों में धूल के कण आसानी से अटक जाते हैं। हम अपनी खिड़कियां और दरवाजे बंद कर लेते हैं और कंपाने वाली ठंड से बचने के लिए घर में हीटर जला लेते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि घर में सूरज की रोशनी प्रवेश नहीं कर पाती, जिसके चलते फफूदी पनपती है। सर्दियों में कई बार एक्जिमा की समस्या भी बढ़ जाती है जिसका संबंध धूल कणों की एलर्जी से होता है। इससे बचाव के लिए सूरज की रोशनी को घर में आने दें!

बनाएं एक एक्शन प्लानः पर्दों और कारपेट आदि को नियमित रूप से वैक्यूम क्लीनर की सहायता से साफ करें। अपने कंबल और स्वेटर आदि कम से कम हफ्ते मंे एक बार धूप में रखें। सजावटी पौधे भी एलर्जी की वजह बन सकते हैं। इनकी जगह आर्टिफिशियल पौधे रखकर आप एलर्जी के खतरे को कम कर सकते हैं। साथ ही फर्स से कारपेट हटाना भी एक समाधान हो सकता है। अपने रूम हीटर और एयर कंडीशनर की सफाई भी नियमित रूप से करें।
रहें सावधानः धूम्रपान करने और अगरबत्ती जलाने से बचें। मिट्टी के कणों और फफूदी पनपने से रोकने के लिए घर में नमी के स्तर को सामान्य रखें। इसके लिए ह्युमिडिफायर और डीह्युमिडिफायर का इस्तेमाल करें।

अपने घर को करें स्कैनः आपको नियमित रूप से अपने घर की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए और ऐसी जगहों की सफाई करनी चाहिए जहां जीवाणुओं के पनपने की आशंका हो। अपने बेसमेंट की सफाई करें और ऐसी चीजों को हटा दें जिनमें मिट्टी के कण जमा होने का खतरा हो।
एलर्जी को कभी नजरअंदाज न करें। डॉक्टर को दिखाएं, इससे आपको दवाएं, नाक के लिए स्प्रे और इनहेलर जैसी चीजों के बारे में जानकारी मिल जाएगी जो ठंड में आपको एलर्जी के लक्षणों से राहत दिलाएंगे।

Share:
0
Reader Rating: (0 Rates)0

Leave a reply