ऐसे दें खाने मे मिलावट को मात

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how to deal with food adulteration
खाने की चीजों में होने वाली मिलावट (food adulteration) दुनिया भर के लिए एक समस्या बन चुकी है जिसका असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों के मुताबिक, हर साल असुरक्षित खान-पान की वजह से तकरीबन 2 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है, जिनमें अधिकतर बच्चे होते हैं। खाने की ऐसी चीजें जिनमें खतरनाक मिलावट, खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट्स अथवा केमिकल वाले तत्व होते हैं वे 200 से भी ज्यादा बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। लेकिन इस मिलावट को मात देना नामुमकिन नहीं है। आइये जानते हैं कैसे?

भारत के लिए बड़ी है समस्या
’’सुरक्षित खान-पान भारत के लिए एक गंभीर गुद्दा है। हमें यह जानकारी नहीं होती है कि हमारे घर तक पहुंचने वाले भोजन का मूल स्रोत क्या है और यह किन रास्तों से गुजरकर हमारी प्लेट तक पहुंचा है। अक्सर हमारे खाने की चीजों में पेस्टिसाइड, खाने के तेल में पेट्रोलियम ऑयल, जानवरों के मल-मूत्र और खतरनाक बैक्टीरिया आदि पाए जाते हैं। खाने की चीजों में मेटल के हिस्से जैसे कि लीड, मर्करी, कैडमियम और एल्युमिनियम अक्सर पाए जाते हैं। स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं ने खाने में इन तत्वों की सुरक्षित सीमा निर्धारित कर रखी है। मगर खाने की चीजों में सुरक्षित मात्रा से अधिक मिलावट का लगातार इस्तेमाल हमें गंभीर बीमारियों के खतरे के दायरे में धकेलता है। कई बार तो हम तब तक मिलावटी चीजें धड़ल्ले से इस्तेमाल करते रहते हैं जब तक कि हमारी सेहत पर इसका स्पष्ट असर नजर न आने लग जाए।’’

कुछ आम मिलावट और उनके हानिकारक असर:
खतरनाक केमिकल्सः फसलों को कीट-पतंगों और बीमारियों से बचाने के लिए इनमें कीटनाशकों और कृमिनाशकों का इस्तेमाल होता है। हालांकि इन चीजों के इस्तेमाल की एक सुरक्षित सीमा का निर्धारण किया गया है, मगर इनके बारे में अधिकतर किसानों में जागरूकता का अभाव है। ऐसे में फलों व सब्जियों में इन उत्पादों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होता है जो कि फसलों के जरिए खाने वाले के शरीर तक पहुंचता है। सेब जैसे फलों पर आर्सेनिक पाया गया है जिनका छिड़काव लीड आर्सनेट के साथ सेब की फसल पर किया जाता है। आर्सेनिक ब्रेन डैमेज का कारण बन सकता है जिसके चलते थकान, दर्द, चिल्स, लकवा और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। जिन इलाकों में फैक्ट्रियाँ चलती हैं और उनका मलबा बिना साफ किए ही नदियों और झीलों में बहा दिया जाता है, वहां के पानी में अक्सर लीड पाया जाता है। अगर फसलों पर लीड युक्त धूल-मिट्टी जाती है अथवा फूड प्रॉसेसिंग के समय इसका कंटैमिनेशन होता है तो खाने की चीजों में लीड रह सकता है। खाने के कंटेनर के जरिए भी लीड खाने की चीजों तक पहुंच सकता है। अक्सर हल्दी पाउडर और मसालों में लीड क्रोमेट मिलाया जाता है। लीड की प्वॉइजनिंग से इंसोमनिया, एनीमिया, शारीरिक व मानसिक रिटार्डेशन और ब्रेन डैमेज हो सकता है। कैडमियम प्लेटेड डिब्बों में आने वाले फलों के जूस व अन्य ड्रिंक में कैडमियम पाया जाता है जो कि लिवर और किडनी को गंभीर रूप से डैमेज कर सकता है। दूसरी तरफ कोबाल्ड हृदय संबंधी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है।

जानलेवा माइक्रो-ऑर्गेनिज्मः कई बार खाने की चीजें असुरक्षित तरीके से स्टोर की जाती हैं जहां कुतरने वाले जानवर पनपते हैं। कई बार प्रॉसेसिंग और पैकेजिंग के दौरान पूरी स्वच्छता नहीं बरती जाती है। इस तरह की स्थितियां खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस के पनपने का कारण बनती हैं। इनके चलते उल्टी, पेट में दर्द, डायरिया और हेपटाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ये गंभीर फूड इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं।

खाने के तेल में पेट्रोलियम तत्वः हम खाने के जिन तेलों का इस्तेमाल करते हैं, वे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं भी हो सकते हैं। इनमें मिनरल ऑयल जैसे कि ह्वाइट ऑयल या पेट्रोयम ऑयल की मिलावट की जा सकती है। अगर लंबे समय तक ऐसे मिलावटी तेल का इस्तेमाल किया जाता है तो कई प्रकार के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

अन्य मिलावटः अक्सर सरसों और जीरा जैसी चीजों में कृत्रिम रंगों से रंगे मिलावटी बीज डाले जाते हैं जो कि ग्लॉकोमा और दिल के दौरे की वजह बन सकते हैं। चायपत्ती में अक्सर इस्तेमाल हो चुकी पत्तियां, आयरन फिलिंग अथवा सूखे पत्तों का डस्ट मिलाया जाता है। ये चीजें भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं, जिनमें कैंसर भी शामिल है।

ऐसे रहें अलर्ट?
हालांकि जब तक हम अपने खाने की चीजें खुद न उगाएं तब तक इसे 100 फीसदी सुरक्षित कर पाना संभव नहीं है, लेकिन हां, थोड़ा सतर्क रहकर हम खतरनाक मिलावट के असर को एक सीमा तक नियंत्रित जरूर कर सकते हैं।

करें ये उपायः
साफ-सफाई का रखें ध्यानः फल व सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर इस्तेमाल करें। कच्ची चीजें खाने से बचें। अच्छी तरह से पकाएं और खाने की चीजों को सुरक्षित तापमान पर रखें। इससे बहुत सारी मिलावटों के खतरनाक असर को कम किया जा सकता है।

सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें: हमेशा प्योरिफाइड पानी का इस्तेमाल करें, न सिर्फ पीने के लिए बल्कि खाना बनाने के लिए भी। सप्लाई लाइन से आने वाले पानी का सीधा इस्तेमाल न करें क्योंकि इसमें खतरनाक केमिकल जैसे कि लीड और खतरनाक बैक्टीरिया व वायरस भी हो सकते हैं, जो कई बार पानी पकाने से भी नहीं मरते हैं।

करें सुरक्षित ख़रीदारी: ऐसी दुकानों से अपने खाने की चीजें या ग्रॉसरी न खरीदें जहां गंदगी रहती हो। साफ-सुथरी जगह से ही खरीदारी करें। अगर दुकान गंदी रहती हो तो अपने दुकानदार को इसे ठीक करने के लिए जरूर कहें। यह भी पता करें कि आप जहां से खरीदारी करते हैं वहां फूड इंसपेक्टर जांच के लिए पहुंचते हैं अथवा नहीं।

खुले में बिकने वाली चीजों से करें परहेज:खुले में बिकने वाली दालें और सीरियल के मिलावटी होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन्हें खरीदने से बचें। पैकेज्ड चीजें लें, मगर यह सुनिश्चित करें कि पैकेजिंग सही ढंग से हुई हो और इसकी एक्सपायरी डेट अभी आगे कुछ महीनों बाद की हो।

कम्युनिटी के बारे में रहें सतर्कः आप जिस समुदाय में रहते हैं उसकी नब्ज टटोलते रहना भी जरूरी है। कहने का मतलब यह है कि आपके आस-पास अगर लोग बीमार हो रहे हैं तो यह पता करें कि उन्होंने किसी दुकान विशेष से खाने की चीजें तो नहीं खरीदी थीं, अगर ऐसा है तो तुरंत इस मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें।

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