ठंड न बढ़ा दे माइग्रेन की समस्या

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How to deal with migraine in winter
एलर्जी की तरह माइग्रेन (Migraine) के मामले में भी अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग ट्रिगर (Trigger) काम कर करते हैं जो उनकी दिक्कतें बढ़ाने का काम करते हैं। कुछ लोगों में एसिडिटी की वजह से सिरदर्द बढ़ जाता है तो कुछ लोगों में धूप लगने से अथवा ज्यादा शोर-गुल परेशानी का कारण बन जाती है। इसी तरह से कुछ लोगों में ठंड (Winter Migraine) भी ट्रिगर का काम करता है। ऐसे मे माइग्रेन पीड़ितों की तकलीफें बढ़ जाती हैं। हालांकि थोड़ी सी सावधानी बरतें तो समस्या से बचा जा सकता है। आइये जानते हैं:

ठंड में ऐसे बढ़ता है माइग्रेन
माइग्रेन (Migraine) से पीड़ित लोग किसी भी तरह के बदलाव को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं। यह बदलाव सोने या जागने के वक्त में हो, सामान्य दिनचर्या में हो अथवा मौसम के मिजाज में, हर चीज का असर पड़ता है। ठंड की शुरूआत के साथ पर्यावरण में कई तरह के बदलाव दिखाई देते हैं-तापमान में गिरावट आती है, वातावरण मे मोइश्चर का स्तर कम होता है, ऐटमॉस्फेरिक प्रेशर कम होता है और ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। ये सारी स्थितियां माइग्रेन पीड़ितों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

ट्रिगर से बचें
माइग्रेन के दर्द से बचने का सबसे अच्छा तरीका है इसके टिृगर से बचाव, लेकिन ठंड में कई बार ऐसा कर पाना संभव नहीं होता है। ऐसे में समाधान होता है ठंड के सीधे संपर्क में आने से खुद को बचाना। इसके लिए आपको खुद को अच्छी तरह से कवर करके रखने की जरूरत होती है।

ऐसे रोकें विंटर माइग्रेन अटैक को
आप वातावरण के टेम्परेचर को नियंत्रित नहीं कर सकते लेकिन आप इसे सिरदर्द का ट्रिगर बनने से निश्चित रूप से रोक सकते हैं:

कैप या मफलर लगाएं: ठंडी हवाएं आपके सिस्टम को एक तरह का शॉक देती हैं जिससे आपके गर्दन और सिर की नसें सिकुड़कर टाइट हो जाती हैं। इस हिस्से को हमेशा ढककर और गर्म रखकर हम ऐसी स्थिति से बचाव कर सकते हैं। अगर आपको हमेशा सिर ढककर रखना अच्छा नहीं लगता है, तो भी ऐसा करें। जब भी आप कहीं बाहर जाएं अपने साथ टोपी और मफलर जरूर रखें और इसका इस्तेमाल करें। कुछ मिनटों का एक्सपोजर भी आपकी दिक्कतें बढ़ा सकता है।

मुंह और नाक ढककर रखें: हम सब ठंड से बचाव के लिए स्वेटर, कोट, जैकेट और यहां तक कि टोपी भी पहनते हैं लेकिन हममें से अधिकतर लोग अपने चेहरे को खुला ही रखते हैं। जबकि मुंह और नाक से सांस लेने के दौरान जब ठंडी हवाएं हमारे भीतर प्रवेश करती हैं तब ये फेफड़े के संक्रमण जैसी दिक्कतों की वजह बनती हैं। ऐसे में जब भी आप घर से बाहर निकलें मफलर या शॉल से खुद को इस तरह ढकें ताकि आपका मुंह और नाक भी ढकी रहे। इससे आपके शरीर में गर्म हवा ही प्रवेश करेगी।

पूरी नींद है जरूरी: नींद पूरी न होने से सिरदर्द कभी भी बढ़ सकता है, चाहे सर्दी हो या गर्मी। अगर आपको माइग्रेन है तो अपनी नींद का कोटा हमेशा पूरा करें। समय पर सोने जाएं, देर रात तक टीवी या सोशल मीडिया में व्यस्त न रहें। इसके साथ ही सुबह सोकर उठने की अपनी दिनचर्या भी एक समान रखें, भले ही कितनी भी ठंड क्यों न हो। अक्सर नींद का स्केड्यूल प्रभावित होने से भी समस्या होती है, चाहे नींद कम हो या ज्यादा। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, समय पर नाश्ता करें और अपना किसी भी टाइम का खाना खाना न भूलें। किसी भी तरह की साइनस संबंधी दिक्कत होने से खुद को बचाए रखें क्योंकि इससे समस्या और बढ़ सकती है।

डॉक्टर से मिलें: समस्या के बारे में समझने के लिए किसी डॉक्टर से मिलें और मेडिकल इंटरवेनशन के बारे में जानें। न्युरोलॉजिस्ट आपको कुछ दवाएं लिख सकते हैं जिससे आपको एसिडिटी नहीं होगी और आपकी ओवरऑल हेल्थ ठीक रहेगी। डॉक्टर आपको समस्या के ट्रिगर से बचाव के उपाय भी बता सकते हैं। अन्य समाधान जैसे कि मेडिटेशन, न्यूट्रीश्नल सप्लिमेंट्स, जीवनशैली में बदलाव जैसे कि एक्सरसाइज में बढ़ोत्तरी आादि फायदेमंद हो सकता है।

ऐसे लोगों के लिए जिनमें परंपरागत तरीकों से कोई लाभ नहीं होता है, उनमें ओनाबोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए जिसे आमतौर पर बोटॉक्स के नाम से जानते हैं, फायदेमंद हो सकता है। इसे यूएसए के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा उन वयस्क मरीजों को देने के लिए मान्यता दी गई है जिन्हें महीने में 15 से ज्यादा दिनों तक सिरदर्द होता है और हर बार समस्या 4 घंटे से अधिक देर तक रहती है। गंभीर दर्द से राहत दिलाने में यह काफी कारगर है।

यह दवा दर्द और इन्फ्लेमेशन के लिए जिम्मेदार केमिकल रिलीज करने वाली नर्व्ज को अस्थायी रूप से बंदकर देती है। हालांकि पुराने माइग्रेन को स्थायी रूप से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन ओनाबोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए माइग्रेन अटैक की बारंबारता और उसकी गंभीरता को निश्चित रूप से कम कर सकता है। माइग्रेन की गंभीरता के हिसाब से इस दवा का असर 3-5 महीने तक रहता है। बाद की सिटिंग में मरीज को दवा की कम डोज की जरूरत हो सकती है।

Dr. PUNEET AGARWAL
SENIOR NEUROLOGIST,
MAX SUPERSPECIALTY HOSPITAL
New Delhi

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