हार्ट अटैक की आशंका को ऐसे करते हैं मैनेज

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गंभीर हार्ट अटैक के शिकार मरीज को सही ढंग से मैनेज करने का पहला चरण है, जल्दी से लक्षणों को पहचानना, क्योंकि लक्षण सामने आने के बाद जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है,  उसका रिजल्ट  भी उतना ही अच्छा मिलता है।

सीने में दर्द की शिकायत के साथ इमरजेंसी विभाग में पहुंचे मरीज, जिसे हार्ट अटैक की आशंका हो उसमें ईसीजी और सीरम कार्डिएक बायोमार्कर एलिवेशन से एक स्टेमी कर समस्या कनफर्म हो सकती है।

इलाज के पहले चरण हैं

– सीने के दर्द से राहत दिलाना

– शरीर के वाइटल ऑर्गन्स (vital organs) का  असेसमेंट

–  प्राथमिक परक्युटेनियश कोरोनरी इंटरवेंशन यानी पीसीआई अथवा फाइबिलोनिसिस के साथ खून का थक्का तोड़ने अथवा हटाने की थेरपी की शुरूआत करना

– दोबारा क्लॉट होने के खतरे को दूर करने अथवा अल्सिरेटेड ब्लॉक्ड प्लॉक की जगह पर रूकावट न हो इसके लिए एंटी क्लॉटिंग थेरपी देना।

– इसके तहत अलग-अलग तरह की दवाओं के साथ प्रबंधन से लंबे समय के लिए दिक्कतों के खतरे को दूर किया जाता है।

– एंटी-प्लेटलेट दवाएं देना

– बाई वेंटिकल यानी हार्ट के निचले हिस्से के कोष की रीमॉडलिंग से बचाव के लिए एंजियोटेंशन कन्वर्टिंग एंजाइम इनहिबिटर थेरपी (angiotensin converting enzyme inhibitor therapy) देना।

– दिल में डिमैंड को कम करने के लिए बीटा ब्लॉकर्स थेरपी (beta blockers therapy) देना।

– कोलेस्टृॉल कम करने और बीमारी के बढ़ने की रफ्तार को कंट्रोल करने के लिए स्टैटिन थेरपी (statin therapy) देना।

–  अगर हार्ट कैविटी में अब भी थक्का मौजूद है तो ब्लड थिनर (blood thinner) देना।

– कोरोनरी अनाटमी, लक्षणों के रिपीट होने के खतरे के असेसमेंट और डिस्चार्ज होने से पहले एक्सरसाइज टॉलरेंस टेस्ट (exercise tolerance test) एवं बाएं वेंटिकुलर की कार्यक्षमता के मेजरमेंट के आधार पर  एडीशनल थेरपी देना।

खास पस्थितियां

1.   हार्ट अटैक संबंधी 80 पर्सेंट से ज्यादा मौतें 65 साल की उम्र के आस-पास वालां में होती हैं।

2.   उम्रदराज मरीजों में अक्सर टिपिकल टाइप  का लक्षण दिखता है, जिसमें साइलेंट अथवा बिना पहचाने गए हार्ट अटैक भी शामिल हैं।

3.   मरीज के अस्पताल पहुंचने और खून का थक्का खत्म करने वाली दवा देने की शुरूआत के बीच 30 मिनट से कम समय का गैप होना चाहिए।

4.   लक्षण सामने आने से पहले चार घंटे के भीतर अगर क्लोट डिजोल्विंग दवाएं दी जाएं तो मरीज को फायदा होने की उम्मीद  अधिक रहती है, खासतौर से पहले 70 मिनट के भीतर।

5.   क्लॉट डिजॉल्विंग एंजियोप्लास्टी पहले 90 मिनट के भीतर की जानी चाहिए।

 

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