ऑर्थराइटिस को कर सकते हैं मैनेज

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oldest are healthierऑर्थराइटिस का सीधे शब्दों में मतलब जोड़ों में जलन से है। इस स्थिति में जोड़ों में दर्द, जकड़न और सूजन की शिकायत होती है। जीवनशैली में बदलाव के चलते आजकल यह समस्या आम हो गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे मैनेज नहीं कर सकते हैं। अगर थोडा ध्यान रखा जाए तो ऑर्थराइटिस के दर्द को काफी हद काबू किया जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे:
ऑर्थराइटिस वाले भी कर सकते हैं एक्सरसाइज
जी हां, व्यायाम करने से जोड़ों का दर्द और जकड़न कम होती है। इससे लचीलापन, स्टेमिना और ताकत बढ़ती है। इसके अलावा यह वजन कम करने में भी सहायक होता है।

ये गलती न करें
इस बीमारी से बचने के लिए जरूरी है कि आप व्यायाम करें। व्यायाम न करने से जकड़न, कार्डियोवॉस्कुलर बीमारियां होने का डर रहता है। निश्क्रिय जीवनशैली से शरीर कमजोर हो जाता है।

कैसे करें इलाज
इलाज किसी व्यक्ति की जीवनशैली, व्यक्तिगत जरूरतों और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसके मुख्यत: चार लक्ष्य होते हैं।
– दर्द को निर्देशानुसार दवा और थेरेपी के द्वारा नियंत्रित करें।
– रेस्ट और जेंटल कसरत के द्वारा जोड़ों के दर्द में आराम मिल सकता है।
– शरीर का वजन मेंटेन रखें।
– स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और खाने में पर्याप्त पोषक तत्व लें।

ऑर्थराइटिस में कौन सी कसरत बेहतर
स्ट्रेच प्रतिदिन करें : ऑर्थराइटिस में सबसे बेहतर व्यायाम स्ट्रेचिंग है। इससे प्रत्येक जोड़ में लचीलापन रहता है। ज्यादा दर्द होने की स्थिति में किसी थेरेपेस्टि की मदद से जेंटल स्ट्रेच करने पर आराम मिलता है।

कार्डियो व्यायाम : पहले ऑर्थराइटिस के इलाज में ज्यादा जोड़ों के दर्द से बचने के लिए एरोबिक एक्सरसाइज नहीं कराई जाती थी। जोड़ों में जलन जब ज्यादा न हो, तब एरोबिक एक्सरसाइज सुरक्षित और प्रभावी होती है। कम तीव्रता का कार्डियोवॉस्कुलर व्यायाम जैसे कि तैराकी, साइक्लिंग और चलने से फिटनेस में सुधार होता है।

खेल और बागवानी
गोल्फ और बावानी करने से फिटनेस और दिमाग की मानसिक अवस्था बेहतर होती है।

तैराकी है एक बढ़िया कसरत
तैराकी को ऑर्थराइटिस के इलाज में सबसे बेहतर व्यायाम माना जाता है। इस व्यायाम में वजन नहीं उठाना पड़ता है, जिससे जोड़ों में तनाव कम होता है। इसलिए जिन लोगों को ऑर्थराइटिस, पीठ और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है, उनके लिए पानी में वर्क आउट करना बेहतर होता है।
कसरत में बदलाव
– शुरुआत धीरे-धीरे करें।
– ऐसे स्टेप न दोहराएं जिससे जोड़ों में दर्द हो।
– अपनी शारीरिक सीमा और जरूरत के मुताबिक शारीरिक गतिविधियां अपनाएं।

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