अस्थमा प्रबंधन के लिए ट्रिगर्स को पहचानें

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how-to-manage-asthma-in-winterसे-जैसे तापमान में गिरावट आती है, वैसे-वैसे ठंड के चलते होने वाली समस्याएं बढ़ने लगती है। चूंकि इन दिनों पूरा उत्तर-भारत ठंड की चपेट मे है, ऐसे मे सर्दी-जुकाम से लेकर अर्थराइटिस और अस्थमा अटैक (Asthma Attack) तक के मामले बढ़ गए हैं। जिससे निबटने के लिए जरूरी है थोड़ा अलर्ट रहना। तो आइये जानते हैं, मौसमी बदलाव के साथ आप अस्थमा (Asthma) पर कैसे रख सकते हैं काबू:

समझें कारणों को
अस्थमा अटैक (Asthma Attack) जैसे एलर्जिक रिएक्शन ट्रिगर्स (Trigger) से चलते हैं। अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग चीजें ट्रिगर् का काम करती हैं। ऐसी कई वजहें हैं जिनके चलते सर्दियों में अस्थमा अटैक बढ़ जाते है:

-बर्फीली ठंडी हवाएं रेस्पिरेटरी सिस्टम पर कठोर हो सकती हैं जिससे एलर्जी बढ़ सकती है। घर से बाहर निकलना तो हर किसी के लिए जरूरी होता है। ऐसे में आप खुद को चाहे जितना ढक लें, ठंड से पूरी तरह से बच पाना असंभव होता है। जब आप सांस के जरिए ठंडी हवाओं को अंदर लेते हैं, यह सीधे आपके फेफड़े तक पहुंचती है और रिएक्शन के लिए टिृगर का काम करती है।

-ठंड के चलते लोग ज्यादा से ज्यादा समय घर के भीतर रहना चाहते हैं। ऐसे में घर के भीतर के एलर्जी वाले टिृगर जैसे कि फफूंदी, जानवरों की खुस्की और धूल के कण आदि प्रभावित कर सकते हैं। और घर में रहते हुए आप इसी माहौल में सांस लेने को मजबूर होते हैं।

-ठंड में सर्दी-जुकाम एक आम समस्या है और एक बार इसकी चपेट में आ जाने के बाद आपका रेस्पिरेटरी सिस्टम अन्य समस्याओं की चपेट में आने के लिए ज्यादा उन्मुख हो जाता है।

-हम गर्मियों के दिनों की तुलना में ठंड के मौसम में घर की साफ-सफाई भी ज्यादा नहीं करते हैं। ऐसे में कारपेट, गद्दों आदि में धूल के कण जमे हो सकते हैं। और जैसा कि हम सब जानते हैं, धूल अस्थमा के लिए टिृगर का काम करती है।

-ठंड में समस्या की एक अन्य वजह है कोहरा। जब घना कोहरा शहर के प्रदूषण के साथ मिलता है तब वातावरण में प्रदूषण वाले कोहरे की एक चादर फैल जाती है। यह रेस्पिरेटरी सिस्टम की समस्या बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऐसे प्रभावित करता है अस्थमा
अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो फेफड़े तक हवा को ले जाने और बाहर लाने वाली नली को प्रभावित करती है। जिन लोगों को एलर्जी की समस्या होती है उनका सिस्टम वातावरण की एलर्जी को लेकर काफी संवेदनशील होता है। ऐसे में उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है। श्वसन मार्ग अवरूद्ध होने का मतलब है सांस लेने में तकलीफ महसूस होना, छाती जकड़ जाना और खांसी होना। सांस लेने में घुर्राहट होना अस्थमा की एक पहचान है। ये लक्षण रात के समय और सुबह तड़के ज्यादा प्रभावी रहते हैं।
प्रदूषक जैसे कि सल्फर डाइऑक्साइड, नाइटृोजन ऑक्साइड, ठंड वातावरण और ज्यादा नमी अलग-अलग लोगों के लिए अस्थमा के टिृगर का काम करते हैं।

क्या करें
नाक ढककर रखें: जब हम अपने शरीर को ढकने के लिए सारे उपाय कर रहे होते हैं। कोट, पैंट, मफलर और टोपी आदि लगा रहे होते हैं तब यह बिल्कुल नहीं सोचते कि हमारे फेफड़ों तक हवा नाक के जरिए ही पहुंचती है। अस्थमा के मरीजों के लिए, ठंड में बाहर निकलते समय नाक को ढककर रखना जरूरी है।

घर को रखें एलर्जी से मुक्तः यह सुनिश्चित कर लें कि आपके कारपेट और गद्दे धूल मिट्टी से मुक्त हों। इसके संपर्क में आने से बचाव के लिए माइट प्रूफ कवर लगाएं। फफूदी से बचाव के लिए घर को साफ और सूखा रखें। बाथरूम को सूखा रखने और फफूंदी को बढ़ने से रोकने के लिए बीच-बीच में अपने बाथरूम के एग्जॉस्ट फैन चला दिया करें।

आग से दूरी बना कर रखें: जब आग जलती है तब इससे कुछ ऐसे प्रदूषक निकलते हैं जो आपके श्वसन तंत्र को बंद कर सकते हैं। ऐसे में आग बिल्कुल न जलाएं। गर्माहट के लिए रूम हीटर इस्तेमाल करें खासतौर से ऑयल हीटर अथवा ब्लोवर।

संक्रमण से बचाव करें: ठंड में होने वाला वायरल कई बार कोल्ड और फ्लू के गंभीर स्टृेन का परिणाम होता है। संक्रमण से बचाव के लिए आपको व्यक्तिगत स्वच्छता का बेहद ध्यान रखना चाहिए। जब भी बाहर से घर में आएं अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं। यह सुनकर अजीब लगेगा लेकिन बेहतर है कि आप इन दिनों हाथ मिलाने से बचें। क्योंकि वायरस के हस्तांतरण का यह प्राथमिक जरिया होता है। ऐसे फ्लू से बचाच के लिए जो आपके लिए अस्थमा अटैक का टिृगर बन सकते हैं, फ्लू व न्युमोनिया का टीका लगवाएं।

इम्यूनिटी बढ़ाएँ: आपकी तैयारी ठंड आने से पहले शुरू हो जानी चाहिए। खूब सारा विटामिन सी, फल व सब्जियां आदि खाएं। इससे संक्रमण के प्रति आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़े|

Dr Raj Bhagat (1)

 

 

By Dr Raj Bhagat,

Chest Physician, Pathik Nursing Home


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