सुधार की ओर एक कदम है बजट

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हर राज्य में एक एम्स बनना चाहिये और कुल जीडीपी का 2% हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। तब जाकर देश की स्वास्थ्य जरुरतो को पूरा किया जा सकेगा। ऐसा मानना है इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल का।

डॉ. अग्रवाल के अनुसार साल 2017-18 का बजट देश की स्वास्थ क्षेत्र को बेहतर बनाने की दिशा मे एक कदम है। इस बजट मे मेडिकल प्रेक्टिस को सुधारने, मेडिकल एजुकेशन को बढ़ावा देने और हेल्थ को डिजीटल करने (जैसे हेल्थ रिकार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने) मे जोर दिया गया है। वे आगे कहते हैं कि रिसर्च और डवलपमेन्ट पर गौर करने की जरूरत है।

 होलिस्टिक फिजीशियन डॉ रवि तुलि ने बजट में महिला एवं शिशु कल्याण की राशि बढ़ाने के फैसले को लेकर सराहना की। वहीं उन्होनें कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री योग का प्रचार करते हैं। उसी तरह उन्हें और भी पुरानी पद्धतियों जिनमें ड्रग फ्री तरीकों से इलाज किया जाता है। ऐसी पद्धतियों को बढ़ावा देने की लिए जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है।  

सुधार की ओर एक कदम है यह बजट

फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने 2017-18 का आम बजट पेश किया। इस बजट से आम लोगों को काफी उम्मीदें थी क्योंकि सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाले प्रधानमंत्री अपने हर भाषण मे विकास की बात करते हैं। इस बजट मे स्वास्थ के क्षेत्र में भी कई योजनाओं की घोषणा अरूण जेटली ने की। फाइनेंस मिनिस्टर ने अपने भाषण मे स्वास्थ सुविधाओं की पंहुच को और बढ़ाने और देश के हर नागरिक तक पंहुचाने कि बात की।

हेल्थ सेक्टर के लिए क्या है इस बजट में

-मेडिकल एजुकेशन सिस्टम बढ़ाने के लिए गुजरात और झारखण्ड मे दो नए एम्स खोले जाएगें  और मेडिकल एजुकेशन मे 25000 पीजी सीटें भी बढ़ाई जाएंगी।

-महिला एवम शिशु कल्याण की राशि को 1.56 लाख करोड़ से बढ़ाकर 1.84 लाख करोड़ करने की भी घोषणा की गई।

-वरिष्ठ नागरिकों के हेल्थ रिकार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा।

-जेटली ने कहा कि सरकार का उद्देशय मेटर्ल मोर्टेलिटी रेट को कम करके 2020 तक 100 लाना है जो कि वर्ष 2011-13 मे 167 था।

-वित्त मंत्री के अनुसार टीबी को 2025, लेपरोसी को 2018 और मिसल्स को 2020 तक देश से खत्म कर दिया जाएगा।

-सरकार डिपलोमेट नेशनल कोर्स देश के कई मेडिकल इंस्टिट्यूशन मे शूरु करेगी।

-प्रधानमंत्री जन औषधी योजना की घोषणा की गई। इस योजना के तहत गरीबों तक सस्ती दवाएं और स्वास्थ सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य है।

-जेटली ने दिसम्बर में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का जिक्र किया। जिसमें गर्भवती महिलाओं को 6000 रू दिए जाएगें।

 

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