अब शरीर के अंदर फिट होगी एमआरआई मशीन!

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IMPLANTABLE CARDIOVERTER-DEFIBRILLATOR SYSTEM

पेसमेकर जैसे डिवाइस लगवाने वाले मरीजों के लिए है काफी कारगर

65 साल के सुरेन्द्र जैन के दिल मे समस्या थी, जिसके लिए एक साल पहले उन्हें पेसमेकर लगवाना पड़ा था। पिछले दिनों दोबारा उन्हें कुछ तकलीफ हुई तो डॉक्टर ने एमआरआई कराने की सलाह दी, मगर उनकी पेसमेकर के चलते एमआरआई नहीं हो सकी। ऐसे मे मजबूरन उन्हें बिना पर्याप्त टेस्ट के ही इलाज मे एक्सपेरिमेंट करने पड़े।

दरअसलअब तक इस तरह के इंप्लांट लगवाने वाले मरीजों का एमआरआई नहीं हो सकता था, क्योंकि इंप्लांट और एमआरआई के सिस्टम एक-दूसरे के कार्य को प्रभावित कर सकते हैं। इस तरह की समस्या का सामना कोई भी इंप्लांटेबल कार्डिएक डिवाइस (implantable cardiac device) लगवाने वाले 50 से 75% मरीजों को करना पड़ता था।
अब एक कंपनी ने नई तकनीक के जरिये इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है। यह समाधान है इंप्लांट किया जाने वाला कार्डियोवर्टर डीफिब्रीलेटर सिस्टम (IMPLANTABLE CARDIOVERTER-DEFIBRILLATOR SYSTEM)। यह शरीर के अंदर इंप्लांट कर दिया जाता है, जिससे जरूरत पड़ने पर मरीज का फुल बॉडी स्कैन किया जा सके। ईवेरा एमआरआई आईसीडी सिस्टम की इस डिवाइस को पहली बार गुरुवार को गुड़गाँव के मेदान्ता मेडिसिटी मे इस्तेमाल किया गया।

कंपनी का दावा है कि यह पहला और एकमात्र आईसीडी सिस्टम है जो मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआईरआई) स्कैन के लिए परफेक्ट है। इसे शरीर के किसी भी हिस्से पर पोजिशन किया जा सकता है। इस डिवाइस को डॉ. बलबीर सिंह ने इंप्लांट किया जो मेदांता, दि मेडीसिटी, गुड़गांव में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी और पेसिंग विभाग में चेयरमैन हैं।

एक अनुमान के मुताबिक आईसीडी मरीजों में से 63 प्रतिशत को डिवाइस लगवाने के बाद 10 साल के अंदर एमआरआई कराने की जरूरत होती है।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि, “हम मरीजों को यह लेटेस्ट तकनीक (latest medical technology) उपलब्ध कराने वाले पहले हॉस्पिटल हैं। इससे डिवाइस लगवाने वाले मरीजों की एमआरआई भी सुरक्षित और बेहतर ढंग से की जा सकेगी।
ईवेरा एमआरआई कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह शरीर मे आराम से फिट हो जाए। ईवेरा एमआरआई की बैटरी क्वालिटी बेस्ट है और पिछले डिवाइसेज़ की बैटरी की तुलना मे लंबे समय (11 साल) तक चलती है।

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