बेहद खास है फर्स्ट एड की ये जानकारी

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important information about first aidआम तौर पर हमें छोटी-मोटी बीमारी या चोट वगैरह लग जाने पर डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत महसूस होती है। लेकिन फौरन ऐसा करना कई बार संभव नहीं होता, और हमें स्वयं ही शुरुआती इलाज करना पड़ता है। ज़ाहिर है, हमें प्राथमिक चिकित्सा की बुनियादी जानकारी ज़रूर रखनी चाहिए। यहां हम ऐसी ही कुछ उपयोगी तरकीबें बता रहे हैं।

1- शरीर के किसी हिस्से के जल जाने पर बर्फ को कभी न रखें। इससे घाव ठीक होने में ज्यादा वक्त लेगा। इसी प्रकार मक्खन या घी लगाने से भी परहेज करें। जलने या झुलसने पर वहां 10 मिनट तक ठंडा पानी डालते रहें। जले के जख्म को पट्टी या साफ रुई से ढंक दें और मरीज को डॉक्टर के पास ले जाएं।

2- कटने-छिलने पर खून बंद करने के लिए कसकर पट्टी बांधने की पुरानी तरकीब न अपनाएं। इससे ब्लड सरकुलेशन मे बाधा आएगी और घाव बिगड़ जायेगा। घाव को डिस्टिल वॉटर से धोएं। छोटे-मोटे कट और खरोंच तो अपने आप ठीक हो जाते हैं, इसलिए कोई मरहम लगाकर यूं ही छोड़ दीजिए। ऐसा नाकाफी हो, तो साफ कॉटन या बैंडेज को थोड़ा प्रैशर से घाव पर 15-20 मिनट तक दबाए रखिये। इतने प्रैशर के बाद भी अगर खून बहना बंद न हो, तो फौरन डॉक्टर को दिखायें। अगर घाव चौथाई इंच से गहरा हो तो सिलाई करनी होगी। अगर पांच साल से टेटनस का इंजेक्शन न लगवाया हो, तो लगवा लें। इसके एक माह बाद बूस्टर लेकर अगले पांच साल के लिए बेफिक्र हो जाएं। एंटी-बायोटिक क्रीम का लेप करके घाव ठीक होने तक रोज पट्टी बांधें।

3- पिम्पल, फोड़ा या फुंसी होने पर उसे छीलें या फोड़ें नहीं। इससे दर्द व संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। अगर अपने आप फूट जाए, तो भी चमड़ी को न खींचें। ये चमड़ी कुछ दिन में या तो अपने आप टूट कर गिर जाएगी, या फिर से चिपक कर घाव को ठीक कर देगी। एंटीसेप्टिक क्रीम लगाकर गॉज़-पट्टी या रुई से फफोले को कवर कर दें।

4- नकसीर आने या नाक से खुन बहने पर पीछे की तरफ झुकना ठीक नहीं। इससे खून विंड पाइप में जाकर सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकता है। इसके बजाय आरामदायक मुद्रा में सीधे बैठ जाएं और थोड़ा-सा आगे की ओर झुकें। इसके बाद नाक को उस बिंदु पर पकड़कर दबाएं, जहां ऊपर से आने वाली हड्डी खत्म हो जाती है। खून रुकने तक ऐसा ही करते रहें। अगर नाक के आसपास बर्फ छुआएं, तो फायदा देगा। नकसीर बंद होने के बाद नाक न सिनकें। इससे थक्का टूटकर दोबारा खून आ सकता है।

5-गला रुंधने या दम घुटने पर मरीज़ की पीठ न ठोकें। इससे अवरोधक विंड पाइप में और गहरे फंस सकता है। मरीज को पानी न पिलाएं और खांसने को कहें। खाना खाते वक्त नली में फंसा भोजन का टुकड़ा निकालने का यही तरीका है। अगर किसी वजह से ये मुमकिन न हो, तो मरीज के पीछे खड़े होकर उसके दोनों कंधों के मध्य पांच-सात बार मुक्के या हथेली के पिछले हिस्से से जोर से मारें। हर मुक्के के बाद मुंह चेक करें और अवरोधक दिख रहा हो, तो उसे निकाल दें।

6- टखने या घुटने में मुरड़ आने पर उस हिस्से में हरकत करने से न तो दर्द कम होगा और न ही सूजन जाएगी। चार काम करें। एक, संबंधित हिस्से को विश्राम दें। दो, आधे-आधे घंटे के फासले पर बीस मिनट के लिए बर्फ लगाएं। तीन, अगर सूजन आने से पहले ही आपने इसे ठीक कर लिया है, तो हल्के से कसकर पट्टी बांध दें। चार, संबंधित हिस्से को उठाकर सीने के करीब लाइए, ताकि सूजन कम हो।

7- किसी व्यक्ति को बिजली का झटका लगने पर उसे खींचने की हिमाकत भूलकर भी न करें। स्विच ऑफ करके उस व्यक्ति का करंट से संपर्क फौरन खत्म करने का प्रयास करें। मेन स्विच तक पहुंच न हो, तो किसी सूखे, विलग ब्लॉक (जैसे टेलीफोन डाइरेक्ट्री) पर खड़े होकर विद्युत कुचालक (जैसे लकड़ी का स्केल, झाड़ू का हैंडल) से उस व्यक्ति को करंट के स्रोत से अलग कर दें। मरीज की सांस और नब्ज चेक करें, कृत्रिम सांस दें और फौरन डॉक्टर को बुलाएं।

8- अगर कीड़े ने काट खाया है, लेकिन घाव मामूली है, तो उसे मामूली जख्म की तरह साफ पानी से धोकर एंटीबायोटिक क्रीम लगा दें और पट्टी बांध दें। घाव गहरा हो तो साफ, सूखी रुई से घाव को तब तक दबाएं, जब तक कि खून बंद न हो जाए। जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं।

9- मधुमक्खी के काटने पर डंक को उंगलियों या प्लकर से निकालने की कोशिश करेंगे, तो यह ज्यादा नुकसानदेह होगा। डंक को हटाने के लिए चाकू, ब्लेड जैसी धारदार चीज का इस्तेमाल करें। इसके बाद संबंधित हिस्से को साबुन और पानी से धो डालें। इसके बाद बर्फ के टुकड़े कपड़े में लपेटकर आइस पैक दें, ताकि दर्द और सूजन न आए। हाइड्रोकॉर्टिसन क्रीम या कैलेमाइन लोशन दिन में तीन-चार बार लगाने से काटे का असर काफी हद तक कम हो सकता है। एंटीहिस्टेमाइन खाना भी ठीक रहता है। अगर मरीज को मधुमक्खियों से एलर्जी(जल्द सूजन आए या सांस में तकलीफ हो) है, या उसे ढेर सारी मक्खियों ने काट लिया है, या डंक उसके नाक, मुंह और गले के भीतर की तरफ लगे हैं, तो उसे फौरन इमरजेंसी में ले जाकर दिखाएं।

10- सांप या बिच्छु जैसे किसी विषैले जीव के काटने पर संबंधित हिस्से को काटें या चूसें नहीं। इससे संक्रमण हो सकता है। इसे निचोड़ कर जहर निकालने की तरकीब भी न आजमाएं। पिड़ित को फौरन इमरजेंसी में ले जाएं। रास्ते में उस हिस्से को कतई न हिलाए, और संभव हो तो दिल से नीचे के लैवल पर रखें। संबंधित हिस्से को गरम पानी और साबुन से धो दें। आसपास अंगूठी, गहने या कोई चुस्त वस्त्र पहन रखे हों, तो उतार दें। इससे सूजन नहीं आएगी। काटे गए हिस्से के ऊपर की तरफ पट्टी बांधना भी ठीक रहता है।

11- अगर किसी ने गलती से या जानबुझकर ज़हर या कोई विषेला पद्धार्थ खा लिया है, तो उससे उल्टी करवाना सही आइडिया नहीं है। ऐसे में मरीज को पानी पीने के लिए भी न दें। देखें कि मरीज ने पूरा ज़हर निगल तो नहीं लिया है? अगर मुंह में ज़हर का कुछ भाग अटका हुआ है, तो उसे पोंछ कर मरीज को डॉक्टर के पास ले जाएं।
इलाज के दौरान ज़हर के पैकेट या बोतल को साथ रखना काफी उपयोगी सिद्ध होगा। मरीज को शांत चित्त रखने से जहर का असर ज्यादा तेजी से नहीं फैलता। अगर मुंह में या उसके आसपास लाल चकत्ते या छाले हो गए हों, तो चेक करें कि जहर उसके कपड़ों में या आंख, कान जैसे शरीर के दूसरे हिस्से में तो नहीं लग गया? ऐसे कपड़े को फौरन हटा दें और प्रभावित अंग को ठंडे या गुनगुने पानी से 15-20 मिनट तक धोएं।

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