इंडियंस को ज्यादा होता है डायबीटीज़ का खतरा

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Pot belly obesity
मायोस्टेटिन जीन के चलते पेट पर जल्दी चढ़ता है फैट और मसल्स होती हैं कम

इंडियंस जेनेटिक रूप से ही डायबिटीज़ प्रोन होते हैं। इसके लिए मायोस्टेटिन जीन भी काफी हद तक जिम्मेदार है, जो कि शरीर में अधिक मात्रा में फैट जमाने और कम मसल्स बनने का कारण होता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में फैट जमा होने, लिपिड डिसॉर्डर और दिल की बीमारियों के साथ-साथ शरीर की फिटनेस और स्पोर्ट्स में प्रदर्शन के लिए भी जिम्मेदार होता है। ये बातें एक नई स्टडी से सामने आई हैं। आईसीएमआर की मदद से एम्स व कई अन्य इंस्टिट्यूट के रिसर्चरों द्वारा की गई यह स्टडी रिपोर्ट ‘प्लॉस वन जर्नल में छपी है।
रिपोर्ट में बताया गया है, इस बात का अंदाजा पहले लग चुका था कि भारतीय जेनेटिक तौर पर भी डायबीटीज प्रोन होते हैं, मगर इसके लिए जिम्मेदार जीन पर अब तक कोई रिसर्च नहीं हुई थी। इस स्टडी में पहली बार मसल संबंधी जीन (मायोस्टेटिन) का पता लगा है, जो डायबीटीज का खतरा बढ़ाने वाले कई शारीरिक बदलावों के लिए जिम्मेदार है। इसी की वजह से वे भारतीय भी पेट के मोटापे की चपेट में आ जाते हैं जो शरीर के पूरे वजन के हिसाब से पतले की कैटिगरी में आते हैं। इस तरह का मोटापा ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ाता है।
सीनियर डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं कि मसल्स शरीर की महत्वपूर्ण फैक्ट्री होती है जो ग्लूकोज को जलाती है। मसल्स कम होने पर फैट ज्यादा बढ़ता है और पेट पर जमा होता है। इससे टॉक्सिक बनता है जो कि पैन्क्रियाज, लिवर और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों को डैमेज करता है। स्टडी का हिस्सा रहे डॉ. सूर्य प्रकाश भट्टï कहते हैं कि इस स्टडी को आधार बनाकर समय रहते लाइफ स्टाइल और खान-पान में सुधार कर भारतीयों में होने वाले डायबीटीज के खतरे को कम किया जा सकता है। इस स्टडी में डायबीटीज फाउंडेशन, एम्स के बायोकेमिस्ट्री डिपार्टमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ जिनॉमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेकनॉलजी जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी, फोर्टिस-सी डॉक आदि के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

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