अब सूई नहीं, सूईदार कैप्सूल!

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अगर मरीजों को सूई या गोली में से एक को चुनना पड़े तो वे निश्चित रूप से गोली का ही चुनाव करेंगे लेकिन दुर्भाग्य से अनेक दवाएं, खासकर बड़े प्रोटीनों से बनाई जाने वाली दवाएं गोली के रूप में नहीं दी जा सकतीं क्योंकि ये पेट में सोखे जाने से पहले ही बिखर जाती हैं।

इस बाधा को दूर करने के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के रिसर्चरों ने एक ऐसा ड्रग कैप्सूल निर्मित किया है जिस पर सूक्ष्म सूइयां लगी हुई हैं। मरीज द्वारा कैप्सूल को निगले जाने के बाद ये सूइयां पेट की भीतरी दीवार में दवा को इंजेक्ट कर देती हैं। जानवरों पर किए गए परीक्षणों में रिसर्च टीम ने पाया कि कैप्सूल ने त्वचा पर लगाए जाने वाले इंजेक्शन की तुलना में इंसुलिन को ज्यादा कारगर तरीके से शरीर के अंदर पहुंचाया।

रिसर्चरों ने हालांकि अपने कैप्सूल का परीक्षण इंसुलिन से किया है, उन्हें यकीन है कि भविष्य में बायोफार्मासियुटिकल दवाओं की डिलिवरी के लिए इस तरह के सूई युक्त कैप्सूल्स का प्रयोग हो सकता है। इन दवाओं में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबॉडीज शामिल हैं। सैंटा बरबरा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रफेसर समीर मित्रगोत्री ने इस एप्रोच को काफी दिलचस्प बताया है। प्रोटीन ड्रग्स को मुंह से देना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में नई विधि काफी कारगर हो सकती है।

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