जीन से जुड़े हैं आपकी इंटेलिजेंस के तार

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intelligenceवैज्ञानिकों ने पहली बार दो ऐसे जीन समूहों (genes) का पता लगाया है जिनका सीधा संबंध इंसान की बुद्धि (intelligence) से है। एम1 और एम3 नामक ये जीन नेटवर्क संभवतः इस बात का निर्धारण करते हैं कि मनुष्य दिमागी तौर से कितना चुस्त दुरुस्त है।

ये जीन नेटवर्क मनुष्य की याददाश्त, एकाग्रता, प्रोसेसिंग स्पीड और विवेक क्षमता को नियंत्रित  करते हैं। वैज्ञानिकों ने इस बात का भी पता लगाया है कि प्रत्येक नेटवर्क में सैकड़ों जीन होते है और ये नेटवर्क संभवतः मास्टर रेगुलेटर स्विचेस द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिक इन मास्टर स्विच का पता लगाना चाहते हैं और यह भी देखना हैं कि  फेरबदल करना संभव है।

यह रिसर्च शुरूआती अवस्था में है लेकिन वैज्ञानिक अंततः यह जानना चाहेंगे कि जीन नेटवर्क के इस ज्ञान का उपयोग क्या मनुष्य की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के  डिपार्टमेंट ऑफ  मेडिसिन के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख रिसर्चर डॉ. माइकल जॉनसन का कहना है कि हमें यह मालूम है कि इंटैलिजेंस में जेनेटिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन अभी तक हमें यह मालूम नहीं है कि बुद्धि के विकास के लिए कौन सा जीन प्रासंगिक है।

नई रिसर्च में इंसानी इंटैलिजेंस में सम्मिलित कुछ जीनों रेखांकित किया गया है और यह दर्शाने की  कोशिश गई है कि ये आपस में यह किस तरह   से एक  दूसरे  प्रभावित करते हैं। सबसे  दिलचस्प बात यह है कि हमने जिन जीनों को पता लगाया है उनका संभवतः एक ही रेगुलेटर है। इसका अर्थ यह हुआ कि हम उस  पूरे जीन समूह के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं जिनका संबंध इंसानी इंटैलिजेंस से है, हालांकि यह अभी सिर्फ सैद्धांतिक संभावना है।

वैज्ञानिकों ने अभी इस मार्ग पर सिर्फ पहला कदम रखा है। नेचर न्यूरोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में रिसर्चरों की टीम ने एपिलेप्सी के मरीजों के ब्रेन सैम्पल की जांच की थी। ये नमूने उनकी न्यूरोसर्जरी के बाद लिए गए थे। जांच के दौरान मानव मस्तिष्क में  हजारों  विश्लेषण किया गया और नतीजों को उन स्वस्थ लोगो की आनुवंशिक सूचनाओं से मिलाया गया जिन्होंने आईक्यू टेस्ट दिया था। उन्होंने आस्टिज्म और बौद्धिक कमजोरी जैसे अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर से पीड़ित व्यक्तियों की आनुवंशिक सूचनाओं का भी अध्ययन किया। इसके पश्चात कंप्यूटर मॉडलों के जरिए वे स्वस्थ  बौद्धिक क्षमताओं के लिए जिमेदार जीन नेटवर्क की पहचान करने में सफल रहे।

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