किडनी स्टोन की वजह सप्लिमेंट तो नहीं!

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विटामिन डी का ज्यादा इस्तेमाल भी हो सकता है जिम्मेदार

विटामिन डी की कमी से शहरी आबादी में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां आम है, लेकिन आजकल विटामिन डी की अधिकता से भी कई तरह की समस्याएं सामने आने लगी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, इसके चलते किडनी स्टोन हो रहा है। खासतौर से महिलाओं में।

फैशन ट्रेंड बनने लगा है सप्लिमेंट
आजकल जिसको देखो वही खुद को फ़िटनेस कोंशियस दिखाने मे जुट गया है। धड़ल्ले से विटामिन्स, प्रोटीन, आइरन, कैल्शियम जैसी चीजों के सप्लिमेंट लेना इस ट्रेंड का खास हिस्सा बन गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल विटामिंस सप्लिमेंट्स लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कुछ लोगों को लगता है कि इसका जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे उतना सेहत के लिए अच्छा होगा। लोगों की इसी सोच के चलते तमाम विज्ञापन भी आने लगे हैं, जिन्हें देखकर अपनी मर्जी से लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से नहीं करते, ऐसे में इसका फॉलोअप भी नहीं होता है।

नेचुरल सोर्स हैं बेस्ट
सीनियर फिजीशियन डॉ. ए. के. झिंगन कहते हैं कि आमतौर पर सर्दियों और बारिश के मौसम में शरीर में विटामिन डी का लेवल कम हो जाता है, क्योंकि इन दिनों सूरज का एक्सपोजर कम होता है। एक स्वस्थ व्यक्ति को हर रोज 2000 यूनिट विटामिन डी की जरूरत होती है, जो कि 30 मिनट धूप में रहने और खाने में डेयरी प्रॉडक्ट और फलों के इस्तेमाल से पूरी हो जाती है, लेकिन दिल्ली जैसे शहरों में लोग धूप के संपर्क में आने से बचते हैं। जो धूप में निकलता भी है वह सनस्क्रीन आदि लगाकर, जो कि धूप के साथ विटामिन डी को शरीर में पहुंचने से रोकता है।

डॉक्टर की सलाह है जरूरी
सीनियर इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं कि तमाम अध्ययनों से यह पता लगा है कि विटामिन डी की कमी से चेस्ट इंफेक्शन, दिल की समस्याएं, इंसुलिन की सेंसिटिविटी कम होने और डायबीटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे शरीर का मेटाबोलिक सिस्टम भी प्रभावित होता है। आगे चलकर यह ऑस्टियोपोरोसिस का कारण भी बनता है। ऐसे लोगों को अगर सप्लिमेंट नहीं दिया जाए तो उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और हल्के दबाव से भी टूट सकती हैं। ऐसे में 60, 000 यूनिट हफ्ते में एक बार देते हैं। रॉकलैंड हॉस्पिटल के ओर्थोपेडिक एक्सपर्ट डॉ. पी. के. दवे कहते हैं, बाकी विटामिन वॉटर सोल्युबल होते हैं, लेकिन विटामिन डी फैट सॉल्युबल होता है। ऐसे में इसे हमेशा फुल क्रीम दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है। फैट के बिना लेने से इसका फायदा नहीं होता। एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में विटामिन डी का लेवल 30 से 50 एन-मोल प्रति लीटर होना चाहिए। सप्लिमेंट लेने से ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों में फ्रैक्चर होने का खतरा 37 पर्सेंट कम हो जाता है। हर किसी को अपनी मर्जी से सप्लिमेंट नहीं लेना चाहिए। अगर लेते हैं तो पहले अपने शरीर में इसके स्तर की जांच कराएं। अगर यह 30 एन-मोल से कम हो तो लें और तीन महीने बाद लेवल की जांच कराएं। अगर यह 50 एन -मोल तक पहुंच जाए तो इस्तेमाल बंद कर दें। इससे हाइपर विटामिनोसिस से बच जाएंगे।

हाइपर विटामिनोसिस के लक्षण
प्यास और पेशाब ज्यादा लगना, उल्टी, थकावट, एनीमिया, वजन कम होना, हाथ पैरों में झनझनाहट आदि महसूस होना।

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