बचें कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से

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Computer-Eye-Syndrome
शरीर के किसी भी अंग के लगातार इस्तेमाल से उसकी मसल्स मे थकान होना आम बात है। और यह थकान लगातार जारी रहे तो स्थायी समस्या की वजह भी बन सकती है। टेनिस एल्बो बीमारी इसका एक उदाहरण है। लेकिन हमारी आँखों का क्या, जो पूरे दिन कंप्यूटर और मोबाइल जैसे स्मार्ट गैजेट के इर्द-गिर्द घूमती रहती हैं! आँखों की मसल्स (Eye muscle) को भी थकान होती है, और परिणामस्वरूप कई दिक्कतें भी आती हैं, जिन्हें हम कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (Computer Vision Syndrome) कहते हैं। आइये जानते हैं इनके बारे मे:

क्या है कंप्यूटर विजन सिंड्रोम
एक कंप्यूटर की स्क्रीन पर पढ़ना कोई किताब अथवा पेपर पढ़ने से अलग होता है। कंप्यूटर स्क्रीन पर पढ़ने से आंखों को कहीं ज्यादा थकान होती है। यही वजह है कि कंप्यूटर पर लगातार काम करने वाले लोग अक्सर आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायत करते हैं। इन शिकायतों की वजह उनकी आंखों की मांसपेशियों पर लगातार पड़ने वाला दबाव होता है। कंप्यूटर के इस्तेमाल से होने वाली आंखों की समस्याओं के लिए आजकल विशेषज्ञों ने एक अलग नाम दिया है। ‘कंप्यूटर विजन सिंड्रोम’ के तहत आंखों की उन्हीं समस्याओं को शामिल किया जाता है जो लगातार कंप्यूटर के इस्तेमाल से होती हैं। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम यानी सीवीसी के आम लक्षण हैं आंखों में तनाव, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, आंखों का रूखापन और गर्दन एवं कंधे में दर्द आदि।

करें बचाव के उपाय
हम डिवाइसेज के इस्तेमाल से परहेज नहीं कर सकते हैं लेकिन आँखों का बचाव तो कर ही सकते हैं। अपनाएं ये उपाय:
करें एंटीरिफ्लेक्शन स्क्रीन का इस्तेमालः आस-पास की रोशनी की चमक कंप्यूटर के स्क्रीन पर पड़ती है और रिफ्लेक्शन आंखों की मांसपेशियों पर दबाव डालती हैं। इस रिफ्लेक्शन या चमक की वजह से आंखों का तनाव बढ़ता है। इससे बचने के लिए अपने मॉनिटर पर एंटीरिफ्लेक्शन स्क्रीन लगाएं। इससे रिफ्लेक्शन का असर कम होगा और आपकी आंखों पर चमक नहीं पड़ेगी। अगर संभव हो तो अपने कमरे की दीवारों पर गाढ़े और मटमैले रंग पेंट कराएं। इससे इनसे रोशनी का रिफ्लेक्शन कम पड़ेगा।

अपनी आंखों को दें आरामः कंप्यूटर पर लगातार घंटों काम करने से बचें। हर दो घंटे के अंतराल में आंखों को थोड़ा आराम जरूर दें। बस सिस्टम के पास से हटें और कुछ देर के लिए अन्य जगहों पर देखें। शरीर को स्ट्रेच करें और पूरे शरीर को आराम देने के लिए अपने हाथों और कमर की मसल्स को भी स्ट्रेच करें। कंप्यूटर के सामने बैठकर खाना न खाएं ताकि कम से कम खाना खाने के दौरान आपकी आंखों को आराम मिल जाए। अपनी नियमित की बैठकें कंप्यूटर के बिना करें, स्क्रीन के बजाय यहां पेन और पेपर का इस्तेमाल करें। आंखों, गर्दन और कमर को आराम देने के लिए ऑफिस के भीतर ही कुछ मिनट राउंड लगाएं।

चश्मे में एंटीरिफ्लेक्शन और एंटी फटीग लेंस लगवाएं: अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर आप अपनी यह मुश्किल आसान कर सकते है। अगर लेंस लगाकर आप लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं तो ये आंखों का मॉइश्चर छीनकर आपकी आंखों को रूखा बना सकते हैं। अगर आप एंटी फटीग और एंटी ग्लेयर लेंस वाले चश्मे इस्तेमाल करें तो बेहतर है। क्रिजाल एंटी फटीग लेंस आपकी इस जरूरत को पूरा कर सकते हैं। इनमें एंटीरिफ्लेक्शन तत्व होते हैं जो कंप्यूटर स्क्रीन से आंखों पर पड़ने वाले दबाव से राहत दिलाने में कारगर होते हैं। यहां तक कि अगर आपको आंखों की रोशनी ठीक करने वाले चश्मे की जरूरत न भी हो तो भी कंप्यूटर पर काम करते समय एंटी-फटीग लेंस वाले चश्मे लगाने की सलाह दी जाती है।

आंखों का ल्यूब्रिकेशन जरूरीः जब हम पलकें झपकाते हैं तब आंखों को चिकनाई मिलती है। लेकिन जब हम कंप्यूटर पर काम कर रहे होते हैं तब सामान्य रूप से पलकें नहीं झपका पाते हैं। इससे आंखों में रूखापन हो सकता है और आंखों में इरिटेशन होती है। यही वजह है कि कंप्यूटर पर लगातार काम करने वालों को डॉक्टटर ल्युब्रिकेंट आई डृॉप इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। हर 3-4 घंटे बाद आंखों को पानी से धोना भी फायदेमंद रहता है। इससे आंखों को आराम मिलता है और नमी भी मिलती है।

दूरी और पोजिशन का भी रखें ध्यानः आपका कंप्यूटर कहां रखा गया है अथवा आप की सीट कहां है इसका भी असर पड़ता है। ऐसी जगह कंप्यूटर रखें जहां आप सीधे और पीठ को सीधी करके बैठ सकें। आपका कंप्यूटर इस तरह से रखा होना चाहिए जिससे आप सीधे बैठकर स्क्रीन पर देख सकें, इसके लिए आपको गर्दन घुमाने या झुकाने की जरूरत न पड़े। साथ ही नजदीक से स्क्रीन को न देखें, एक सुरक्षित दूरी बरकरार रखें। अगर आप सही पोजिशन में बैठेंगे तो पीठ और गर्दन के दर्द से भी बचे रहेंगे। अपने फर्नीचर इस तरह से लगवाएं जिससे आपकी आंखें कंप्यूटर स्क्रीन से 20-24 इंच की दूरी पर रहें। स्क्रीन का मुख्य फोकस आपकी आंखों से 10-15 डिग्री नीचे होना चाहिए ताकि आपकी गर्दन और सिर सही स्थिति में रहें।

एडिक्शन से बचें: कंप्यूटर पर पूरे दिन काम करना आपके लिए अनिवार्य हो सकता है, मगर सोशल नेटवर्किंग साइट पर स्टेटसस अपडेट करने, दोस्त को स्माइली भेजने या ह्वाट्सऐप पर चैट करने के लिए पूरे दिन अपने स्मार्टफोन के साथ आंखें चिपकाकर रखना कभी जरूरी नहीं हो सकता है। स्मार्टफोन को अपने जीवन पर हावी न होने दें। शाम का एक समय फिक्स कर लें जिसके बाद ह्वाट्सऐप और फेसबुक अपडेट न देखें। कभी भी स्मार्टफोन को अपने बेड पर लेकर न जाएं इससे आपकी नींद डिस्टर्ब हो सकती है और आपकी आंखों को मिलने वाली बेहद जरूरी आराम नहीं मिलेगा। याद रखें तकनीक आपकी सहूलियत के लिए है न कि आप तकनीक के लिए हैं।

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