अब पैड नहीं, करें मेन्स्ट्रूअल कप का इस्तेमाल

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menstrual cup

सैनिटरी नैपकिन यानि पैड के बिना किसी महिला की जिंदगी कितनी मुश्किल हो सकती है यह आप अच्छी तरह से समझ सकती हैं।तकरीबन एक दशक पहले सैनिटरी नैपकिन मार्केट मे आया और बेहद कम समय मे यह देश के कोने-कोने तक पहुँच गया। इसमे कोई शक नहीं है कि इसने महिलाओं की जिंदगी मे एक क्रांति ला दिया है। इसकी वजह अस्वच्छता की वजह से फैलने वाली तमाम बीमारियों पर भी अंकुश लगा है। लेकिन शहरों के बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए इसके नए विकल्प की मांग तेजी से बढ़ रही है। जिसे पूरा करने मे मेन्स्ट्रूअल कप (menstrual-cup) अहम भूमिका निभा रहा है। अब बहुत सारी शहरी महिलाएं मेंसट्रूअल कप (menstrual-cup) इस्तेमाल करने लगी हैं।

क्या है मेंसट्रूअल कप

मेंसट्रूअल कप सिलिकन से बना होता है, जो बेहद मुलायम होता है। सीनियर गायनेकोलोजिस्ट डॉ. नीरा अग्रवाल कहती हैं, मेंसट्रूअल कप सैनिटरी नैपकिन के मुक़ाबले सस्ता पड़ता है। एक कप तकरीबन 400 से 700 रुपए का आता है और अगर इसे सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो यह सालों तक चलता है। एक कप 28  ग्राम तक  ब्लड स्टोर कर सकता है। दिन मे 2 से 3 बार आपको कप बदलने की जरूरत पद सकती है। लेकिन इसे अच्छी तरह से साफ करके आप बार-बार इसका इस्तेमाल कर सकती हैं।

प्रदूषण पर लगाम

सैनिटरी नैपकिन हाइजेनिक होने के साथ-साथ ईको फ्रेंडली भी होता है। सैनिटरी नैपकिन बनाने मे सिंथेटिक मटीरियल का इस्तेमाल होता है, जिसे डीकम्पोज्ड होने यानि गलने मे बहुत लंबा समय लगता है। और एक महिला अपने जीवनकाल मे तकरीबन 10,000 नैपकिन इस्तेमाल करती है। ऐसे मे इसे डीकम्पोज्ड करना एक बड़ा मुद्दा है।

फायदे हैं कई

-खर्च कम आता है, क्योंकि एक कप 15 सालों तक चलता है।

-सैनिटरी वेस्ट लैंडफिल तक नहीं पहुंचता, इसलिए ईको फ्रेंडली है।

-ब्लड का संपर्क हवा से नहीं होता इसलिए दुर्गंध भी नहीं फैलती।

-यह वेजाइना की प्रकृतिक नमी को खत्म नहीं करता है।

-इसे लगाकर आप स्विमिंग कर सकती हैं और लंबी यात्राओं मे भी आराम महसूस करेंगी।

आ सकती हैं ये दिक्कतें

-पैड के मुक़ाबले इसका इस्तेमाल करना थोड़ा कठिन होता है।

-अगर आप इसका सही इस्तेमाल नहीं जानती हैं तो इसे लगाना और हटाना मुश्किल हो सकता है।

 

 

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