दर्द की वजह ‘रेस्टलेस लेग सिंड्रोम’ तो नहीं

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Person sleeping in bed
हाल में ही मैंने अपने अपने पति को रात में नींद और दर्द से परेशान होते हुए देखा। थोड़ा रिसर्च करने पर पता लगा की यह एक स्लीपिंग डिसऑर्डर है जिसको रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (RLS) के नाम से जाना जाता है। इसमे रात के समय जब बॉडी रिलैक्स होने की पोजीशन लेती है तो आपकी टांगो में बेचैनी बढ़ जाती है जो दर्द क रूप में आपके दिमाग पर हावी हो जाती है।
टीस की तरह उभरता है दर्द
दिमाग नींद की स्थिति में जाना चाहता है लेकिन दर्द नींद पर हावी होने लगता है । ऐसा लगता है कि पैर मे सूई चुभ रही है ।

स्ट्रेस है पहली वजह
स्ट्रेस इसका प्रथम कारण है। इस भागदौड़ की ज़िन्दगी में हम भूल जाते हैं के नींद को आरामदायक बनाना बहुत ज़रूरी है । मेडिकल की माने तो आज के समय में 10 में से एक व्यक्ति RLS से पीड़ित है। यह मध्य आयु वर्ग के पुरुष व महिला में आम है। बचपन में इसका माइल्ड इफ़ेक्ट आपके शरीर पर दिखना शुरू हो जाता है। वैज्ञानिकली, यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। 50 वर्ष की उम्र के बाद यह दिक्कत और बढ जाती है।

सेल्फ हेल्प तकनीकें हैं मददगार
1. डी- स्ट्रेस – सोने से पहले अपने दिमाग में चल रहे खयालो को शांत कर ध्यान करें और रिलैक्स मुद्रा में लाने की कोशिश करें।
2. डी-क्लटर – अपने बैडरूम को बैडरूम रखें। हमारा मतलब है सोने की जगह को अपने कम्फर्ट के अनुसार बनाएं। कोई भी एंटरटेनमेंट जैसे इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, टीवी, सेलफोन आदि का उपयोग न करें।
3. व्यायाम करें – रोज़ अपनी बॉडी को १-२ घंटे दें। अपनी बॉडी टाइप और क्षमता के हिसाब से एक्सरसाइज करें।
4. धूम्रपान छोड़ें – अगर आप धूम्रपान करते हैं तो यह समय है छोड़ने का, तम्बाकू रक्त के बहाव में रूकावट डाल देता है जिसका परिणाम सीवियर RLS हो सकता है।
5. कॉफ़ी, चाय, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि पदार्थों का सेवन कम करें।
6. काफ स्ट्रेच, हिप स्ट्रेच, और फ्रंट थाई स्ट्रेच जैसे कुछ एरोबिक व्यायाम करना RLS में आराम देता है।
7. कोशिश करें क अपने सोने के समय से 1 घंटे पहले रिलैक्स करें। हॉट बाथ इस मामले में मॉस पेशियों को आराम देता है।
8. अगर आप को कभी-कभी माइल्ड से मॉडरेट दर्द हो तो आप ओवर द काउंटर दवाइयां जैसे एसिटामिनोफेन का सेवन कर सकते हैं।
9. सबसे ज़रूरी विटामिन और मिनरल की कमी भी रेस्टलेस सिंड्रोम का कारन बन सकते हैं। रेगुलर चेक-अप और अपने खाने का ध्यान रखते हुए हमें इन चीज़ों को नहीं भूलना चाहिए:
आयरन की कमी एक आम कारण माना गया है।
मैग्नीशियम (250 to 500 mg) सोने से आधे घंटे पहले सेवन से आपके लक्षण सुधरते नज़र आएंगे।
विटामिन डी के बारे में की गयी रिसर्च से साबित हुआ है की लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा धूप में जाना चाहिए।
आप भी अगर रेस्टलेस लेग सिंड्रोम से तकलीफ में है तो सबसे ज़रूरी इस बात को समझना हो जाता है की हमारा दिमाग एक प्रथम और परम शक्ति है। इसको शांत करना हमारे लाइफस्टाइल में एक एहम हिस्सा होना चाहिए। योग इसमे सहायक हो सकता है।

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