दाँत खोल सकते हैं आपके राज़

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हम कहाँ पले-बढ़े हैं, इस बाद का खुलासा हमारे दाँत आसानी से कर सकते हैं। एक नई स्टडी के मुताबिक, जैसे-जैसे हमारे दांतों के इनामेल (tooth enamel) का विकास होता है, यह उस शीशे (lead) के आइसोटोप कंपोज़ीशन (isotope composition) को अपने अंदर लॉक करता रहता है, जिसके संपर्क मे हम आते हैं।

क्योंकि दुनिया भर की अलग-अलग जगहों पर शीशे के प्रदूषण की मात्रा अलग-अलग होती है, ऐसे मे अलग-अलग जगहों के लोगों के दांतों के इनामेल मे भी इसकी मात्रा अलग-अलग रहती है। जर्नल साइंस ऑफ द टोटल एनवायर्नमेंट (जर्नल Science of the Total Environment) मे छपी इस रिपोर्ट मे यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लॉरिडा के रिसर्चर डॉ. जॉर्ज कैमनेव का कहना है कि यह नई खोज पुलिस को कोल्ड केसेज सॉल्व करने मे मदद मिलेगी। उदाहरण के तौर पर बुरी तरह से खराब हो चुकी बॉडी के दांतों को टेस्ट कर उसके भौगोलिक बैकग्राउंड का आसानी से पता लगाया जा सकेगा।

शीशा (Lead) चार रूपों मे मौजूद है, जिन्हें आइसोटोप्स कहते हैं। अलग-अलग जगह के एनवायर्नमेंट मे आइसोटोप्स की मात्रा अलग-अलग होती है, उदाहरण के तौर पर पहाड़ और मैदानी इलाकों मे। ऐसे मे हर जगह के सैंपbल का आइसोटोप प्रोफाइल अलग-अलग होगा।

शीशे का आइसोटोप प्रोफ़ाइल हमे यह जानने मे भी मदद कर सकता है कि किस जगह के लोग ऐसी एक्टिविटी मे ज्यादा शामिल हैं जिनसे वातवरण मे लीड का प्रदूषण बढ़ता है। क्योंकि बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, सांस लेने से हवा के साथ और मिट्टी के संपर्क मे आने से अंजाने मे ही शीशे को अपने शरीर के अंदर लेते हैं।

दांतों का इनामेल बचपन के एक्सपोजर को ही लॉक करता है। हमारी हड्डियाँ हमेशा रीजनरेट होती रहती हैं, लेकिन दाँत के इनामेल बचपन मे ही डेवलप होते हैं। हमारे दाँत बचपन के अलग-अलग उम्र मे निकलते हैं। ऐसे मे प्रोफ़ाइल टेस्ट से यह भी पता लगाया जा सकता है कि बचपन मे व्यक्ति कहाँ-कहाँ घूमा है। उदाहरण के तौर पर हमारे पहले दाढ़ का इनामेल 3 साल मे बन जाता है। बाकी दांतों का इनामेल कंप्लीट होने मे 5 साल का समय लग जाता है।

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