विटामिन-डी की कमी से डिमेंशिया!

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बुजुर्ग लोगों में विटामिन डी की कमी डिमेंशिया और अल्जाइमर के खतरे को दोगुना कर सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल में हुई एक स्टडी मे पाया गया है कि जिन लोगों में विटामिन डी की कमी थी, उनमें डिमेंशिया और अल्जाइमर की बीमारी डेवेलप होने की आशंका दोगुने से भी ज्यादा थी।

वैज्ञानिकों ने उन बुर्जुग अमेरिकी लोगों का अध्ययन किया था, जिन्होंने कार्डियोवेस्कुलर हेल्थ स्टडी में भाग लिया। उन्होंने पाया कि जिन व्यस्कों में विटामिन डी की कमी थोड़ी सी ही थी, उनमें किसी भी तरह का डिमेंशिया पैदा होने का खतरा 53 प्रतिशत था। वहीं जिनमें विटामिन डी कमी का स्तर गंभीर था, उनमें यह खतरा 125 प्रतिशत था। ऐसे ही नतीजे अल्जाइमर बीमारी के बारे में भी पाए गए। कम कमी वाले ग्रुप में इस बीमारी का खतरा 69 प्रतिशत था जबकि गंभीर रूप से विटामिन डी की कमी वाले लोगों में इसका प्रतिशत 122 था।

इस स्टडी में 65 साल या इससे ज्यादा उम्र के उन 1,658 व्यस्कों को शामिल किया गया था, स्टडी की शुरुआत के समय बिना किसी मदद के चल सकते थे, डिमेंशिया, हार्ट की समस्या या स्ट्रोक से फ्री थे। इन पर 6 साल तक स्टडी की गई। यह देखा गया कि किस-किस में अल्जाइमर या डिमेंशिया की दूसरी किस्में देखने को मिलती हैं। स्टडी की अगुवाई कर रहे डॉ. लेवेलेन ने कहा, ”हमने विटामिन डी के निचले स्तर और डिमेंशिया एवं अल्जाइमर के बीच का संबंध पता लगाने की उम्मीद की थी लेकिन नतीजे काफी हैरान करने वाले थे। हमने पाया कि यह संबंध हमारी उम्मीद से दोगुना था। ”अब यह साबित करने के लिए मेडिकल जांच जरूरी हैं कि क्या मछली या विटामिन डी के सप्लिमेंट खाने से अल्जाइमर और डिमेंशिया को रोका या डिले किया जा सकता है?

उन्होंने कहा, ”हमें इस शुरूआती स्तर पर सावधान रहने की जरूरत है और हमारे हालिया नतीजे यह नहीं दिखाते कि विटामिन डी कम होने से डिमेंशिया हो ही जाता है। यह स्टडी रिपोर्ट न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई है।

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