आयुर्वेद से मैनेज करें हेपटाइटिस

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हेपेटाइटिस मे लिवर मे इन्फ़्लेमेशन हो जाता है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसके ज़्यादातर मामलों मे शुरुआती डीनो मे लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। आयुर्वेदाचार्य और जीवा आयुर्वेदा के डायरेक्टर डॉ. प्रताप चौहान कहते हैं कि यह जौंडिस (पीलिया), भूख न लगना या घबराहट महसूस होने की वजह के रूप मे सामने आ सकता है। अगर हेपटाइटिस का 6 महीनों तक इलाज नहीं किया जय तो यह खतरनाक हो सकता है। हेपटाइटिस के लिए इन्फेक्शन, अल्कोहल, कुछ दवाएं या ऑटो इम्यून डीजीज भी जिम्मेदार हो सकती है।

5 तरह का होता है हेपटाइटिस वायरस
हेपटाइटिस मुख्य रूप से 5 तरह का होता है, ए, बी, सी, डी और ई, इनके अलावा टाइप एक्स और जी भी होता है। हेपटाइटिस ए इन्फेक्टेड खाना या पानी से होता है। हेपटाइटिस बी एक एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डीजीज) है। हेपटाइटिस सी, इसके वाइरस से इन्फ़ेक्टेड व्यक्ति के ब्लड के सीधे संपर्क मे आने से होता है। हेपटाइटिस डी की चपेट मे सिर्फ वही व्यक्ति आ सकता है जो पहले से हेपटाइटिस बी से इन्फेक्टेड हो। हेपटाइटिस ई वायरस से इन्फेक्टेड पानी पीने से हेपटाइटिस ई की चपेट मे आ सकते हैं। अगर हेपटाइटिस इन्फेक्शन के लिए ए, बी, सी, डी और ई, मे से कोई भी वायरस जिम्मेदार न हो तो यह हेपटाइटिस एक्स का मामला होगा। हेपटाइटिस जी वायरस का असर भी दिखाई देता है।

शुरुआती लक्षण
हेपटाइटिस के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे हो सकते हैं, जिसमे डायरिया, थकान, भूख कम लगना, हल्का बुखार, शरीर मे दर्द, पेट मे दर्द, उल्टी और वजन घटना आदि शामिल है।

आपका सबसे बिजी ऑर्गन होता है प्रभावित
डॉ. चौहान कहते हैं, लीवर आपके शरीर का सबसे बिजी ऑर्गन होता है। यह इंसान के मेटाबोलिज़म मे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे ये सारे फंक्शन मैनेज होते हैं:
1. बाइल (पित्त) का प्रॉडक्शन जो कि शरीर मे फैटी एसिड को तोड़ने और इसे पचाने का काम करता है
2. ब्लड प्रोटीन और कई अन्य जरूरी एंजाइम्स का प्रॉडक्शन
3. टॉक्सिन और वेस्ट के नुकसान को कम करना और शरीर से हटाना
4. चूंकि हमारे शरीर और हेल्थ के लिए लीवर सबसे जरूरी ऑर्गन है, ऐसे मे इसको ठीक रखने के लिए हमे हर जरूरी उपाय करने चाहिए

हेपटाइटिस मे आयुर्वेद के नियमों से करें लीवर का बचाव
डाइट और लाइफस्टाइल मे बदलाव
-हॉट, स्पाइसी, ऑयली और हेवी खाने से परहेज करें, वेजिटेरियन खाने को प्राथमिकता दें
-रिफाइंड आटा, पॉलिश किया हुआ चावल (व्हाइट राइस), सरसों का तेल, सरसों के बीज, हींग, मटर, प्रिजर्व्ड़ फूड, केक, पेस्ट्री, चॉकलेट, एल्कोहल और सोडा वाले ड्रिंक से परहेज करें।
-होल व्हीट आटा, ब्राउन राइस का इस्तेमाल बढ़ाएँ, खाने मे केला, आम, टमाटर, पालक, आलू, आंवला, अंगूर, मूली, नींबू, सूखे खजूर, किशमिश, बादाम और इलायची ज्यादा शामिल करें।
-इस हालत मे जरूरत से ज्यादा फिजिकल वर्क न करें। पूरा आराम करें। धूप मे आग के पास देर तक न रहें।

करें ये घरेलू उपाय

• 1 चम्मच रोस्टेड बार्ली पाउडर 1 कप पानी मे मिलाएँ। इसमे 1 चम्मच शहद डालें और दिन मे दो बार लें।
• एक चम्मच तुलसी के पत्ते का पेस्ट एक कप मूली के जूस मे मिलाएँ। इसे दिन मे दो बार 15 से 20 दिनों तक इस्तेमाल करें।
• एक कप गन्ने का रस लें, इसमे आधा चम्मच तुलसी पत्ते का पेस्ट मिलाएँ और दिन मे दो बार लें। यह ध्यान रखें कि जूस हाइजेनिक तरीके से तैयार किया गया हो।

हेपेटाइटिस डे पर जागरूकता कार्यक्रम
हेपटाइटिस डे के उपलक्ष्य मे जीवा आयुर्वेदा की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर आयुर्वेदाचार्य और जीवा आयुर्वेदा के डायरेक्टर डॉ. प्रताप चौहान ने बताया कि आयुर्वेद के नियमों के हिसाब से चलकर हेपटाइटिस को आसानी से मैनेज किया जा सकता है।

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