जाने अपने चमकते आम की असलियत  

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mango cubesफलों का राजा आम हममें से ज़्यादातर लोगों का सबसे पसंदीदा फल है और सदियों से हम इसके स्वाद का लुत्फ़ उठाते आए हैं। मुझे आज भी याद है जब हम पेड़ों से आम तोड़कर इसकी मिठास का आनंद लेते थे। हर साल मैं आम के सीज़न के इंतज़ार में रहता हूँ और इसकी कई किस्मों को पसंद करता हूँ। हम भारतीय बेहद भाग्यशाली हैं कि हमें आम की सैकड़ों किस्में किफ़ायती दरों पर उपलब्ध हैं।

कैसे करें उचित और पोषक आम का चयन

एक साधारण ग्राहक को कोई भी फल खरीदने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए है कि गलत तरीके से पकाए गए फल अपना स्वाद, खुशबूऔर पोषण खो देते हैं। हालांकि यह आर्कषक दिख सकता है जिसके चलते सही या गलत की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। आम को सबसे उपयुक्त तरीका यह है कि अधपके या कच्चे आम को खरीदा जाए और इसे घर नैतिक या प्राकृतिक तरीकों से पकाया जाए। सबसे आसान तरीका आम जांचने का यह है कि आम के उपरी हिस्से को ठीक तरीके से परखा जाए। यह थोडा फूला हुआ होना चाहिए। इसके अलावा आप जिस भी आम का चयन करते हैं वो कीट से मुक्त, ओलों से चोटिल, कटाफटा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, आप फल पर थोडा सा दवाब डालकर उसकी ठोसियत को परख सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो फल खरीदते समय इसकी चमकदार त्वचा पर जाएं बल्कि इसकी खुशबु और बाहरी रूपरंग से पहचानने की कोशिश करें।

 ऐसे पकाएं प्राकृतिक तरीकों से आम

जब आप एक बार ठीक तरीके से उपयुक्त आम का चयन कर लेते हैं तो उनको घर ले जाकर प्राकृतिक तरीकों से पकाया जा सकता है। इसके लिए चारों ओर से बंद और सामान्य तापमान वाले कमरे में आम को कागज में लपेटकर एक तश्तरी या डिब्बे में रख देना चाहिए। इसके बाद इसको चारों तरफ से पुराने अखबार या कपडे से ढक देना चाहिए। तीन दिनों तक आम को इसी अवस्था में रखने के बाद आप सुरक्षित और प्राकृतिक तरीकों से पकाए गए आम का स्वाद चख सकते हैं। 

सुरक्षित उपभोग को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण फल पकाने के नैतिक तरीकों जैसेएथीलीनके इस्तेमाल की अनुमति देता है जो फलों को पकाने वाला प्राकृतिक कारक है। यहां इस बात पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि एथीलीन का स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता, इससे पका फल आम जनता के उपभोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि इस तरीके का इस्तेमाल इस क्षेत्र के संगठित उद्योग से जुडी गिनी चुनी ईकाईयां ही करती हैं।

कितना पोषक है आपका आम

आम केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि पोषक तत्वों जैसे विटामिन से परिपूर्ण है और प्राकृतिक रूप से डिटाक्सीफाई एजेंट यानि फलैवनाईडस, करोटीन्स और पॉलीफेनोल्स से युक्त है। इस फल में रेशेदार पाचक फाईबर और शर्करा का सही मात्रा में संतुलन है। इसके अलावा आम में फाईटोन्यूटिशन और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इन पोषक तत्वों के अलावा आम 25 तरीके के विभिन्न कारीटोनाईड से युक्त है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरूस्त रखते हैं और रोगों को जन्म देने वाले कीटाणुओं से सुरक्षा भी प्रदान करते हैं।   

 कितना हानिकारक है कार्बाइड से पका आम

इतनी समृद्ध विरासत को अपने आप में समेटे हुए, आम आज चिंता का विषय बन चुका है। सीज़न शुरू होते ही यह मांगआपूर्ति की चुनौतियों से जूझने लगता है और इसकी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए जाते हैं। बाज़ार की मांग के अनुसार आम की पर्याप्त मात्रा समय पर पक कर तैयार नहीं हो पाती, ऐसे में इसे एक रसायन कैल्शियम कार्बाइड की मदद से पकाया जाता है। इसे  आमतौर परमसालाभी कहा जाता है, जो आम को जल्दी पकाने में मदद करता है। इससे आम में आर्सेनिक एवं फॉस्फोरस के अंश रह जाते हैं। यह बेहद प्रतिक्रियाशील रसायन है, जो नमी के सम्पर्क में आने पर एसीटिलीन गैस पैदा करता है। एसीटिलीन मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और मस्तिष्क को होने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति कम कर देता है, यह मुँह में अल्सर, पेट में जलन और यहां तक कि भोजन विषाक्तता (फूड पॉइज़निंग) का कारण भी बन सकता है। फल पकाने के लिए इस तरह के रसायनों का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के द्वारा खतरनाक बताया गया है और भारतीय कानूनों में भी इनकी अनुमति नहीं है। कुछ ही घण्टों में आम को पकाने वाले ये रसायन दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में प्रतिबंधित हैं, हालांकि ये हमारे देश में आसानी से मिल जाते हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि कैल्शियम कार्बाइड कार्सिनोजैनिक (यानि कैंसर कारक) है और सामान्य मानव शरीर में कई विकारांं का कारण बन सकता है।

कार्बाइड आम के पीछे मुनाफाखोरी है अहम कारण

आइए इसके पीछे मुख्य कारणों को भी जान लें। इस अनैतिक प्रकिया से केवल मांग और आपूर्ति के बीच का अंतराल दूर हो जाता है बल्कि श्रृंखला में शामिल लोगों का मुनाफा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आम जब प्राकृतिक तरीके से पकता है तो इसमें नमी की मात्रा तकरीबन 7-10 फीसदी तक कम हो जाती है और आम का वज़न भी कम हो जाता है। इस नुकसान से बचने के लिए भी अनैतिक प्रथाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से फल पकने में समय भी ज़्यादा लगता है। साथ ही इसके लिए कुछ अतिरिक्त बुनियादी संरचना एवं निवेश की आवश्यकता होती है। इन सब का असर प्रक्रिया में शामिल लोगों के मुनाफे पर पड़ता है।

 हालांकि आज समाज में एल्कॉहल और सिगरेट के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरुकता बढ़ चुकी है, लेकिन हमें अब कैल्शियम कार्बाइड जैसे धीमे ज़हर के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए भी प्रयास करने होंगे।

हम सभी ने बचपन में सीखा हैचमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती!! तो समय गया है कि इस सबक को हम अपने जीवन में भी अपनाएं!

 लेखकः श्री शान्तनु भट्टाचार्यजी, बिजनेस हैडसफल रीटेल, मदर डेरी फूड एंड वेजीटेबिल प्राइवेट लिमिटेड

 

 

 

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