सुबह की सुस्ती-पा सकते हैं निजात!

Share:

morning sickness a good sign in pregnancyमाँ बनने की खुशी का एहसास होने से पहले मॉर्निंग सिकनेस यानी सुबह के समय की सुस्ती बेहद आम होती है, जो कि किसी के लिए भी अच्छा अनुभव नहीं हो सकता है। लेकिन अधिकतर मामलोँ में मॉर्निंग सिकनेस अजन्मे बच्चे की सेहत के लिए किसी भी प्रकार से बुरा असर नहीं डालती है और यह गर्भावस्था में होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है।

बल्कि तमाम क्लीनिकल स्टडीज में पाया गया कि मॉर्निंग सिकनेस स्वस्थ गर्भावस्था का एक लक्षण है। बिना उल्टी और मितली वाले मामलोँ की तुलना में ऐसे मामलोँ में गर्भापात और स्टिलबर्थ का खतरा कम रहता है।

60% गर्भवती महिलाओँ को होती है ऐसी समस्या

मॉर्निंग सिकनेस का एहसास तकरीबन 60 फीसदी गर्भवती महिलाओँ को होता है, जिनमेँ से 40 फीसदी महिलाओँ को उल्टियाँ भी आती हैं। सबसे खराब बात यह होती है कि हमेँ यह पता नहीं चलता कि ऐसा कब महसूस होगा। दरअसल इस स्थिति के लिए मॉर्निंग सिकनेस सही नाम नहीं है। कुछ महिलाओँ को जहाँ सुबह के समय परेशानी महसूस होती है और दिन बढने के साथ-साथ आराम महसूस होने लगता है वही कुछ महिलाओँ को पूरे दिन में कभी भी समस्या होती है। कई बार मामूली मितली से ही हालत खराब हो जाती है तो कई बार, बार-बार मितली और उल्टी का एहसास परेशान कर के देता है और समस्या नियंत्रण से बाहर हो जाती है।

छठवेँ हफ्ते से होती है समस्या

गर्भधारण के आमतौर पर मितली के एहसास की शुरुआत गर्भावस्था के छठवेँ हफ्ते के बाद होती है। मगर कुछ इक्का-दुक्का मामलोँ में यह चौथे हफ्ते से ही शुरू हो जाता है और आगे के महीनोँ में स्थिति और खराब होने लगती है। अधिकतर महिलाओँ को एक महीने के बाद मितली और उबकाई की समस्या से आराम महसूस ह्ने लगता है। हालांकि यह स्थिति पूरे गर्भावस्था में कभी भी महसूस हो सकती है। हालांकि कुछ महिलाओँ को बच्चे के जन्म के समय तक इस समस्या से दो-चार होना पडता है।

मितली और उल्टी के साथ-साथ कुछ महिलाओँ को खाने से विमुखता, 5% तक वजन में गिरावट, युरीन आने में कमी, डीहाइड्रेशन, सिरदर्द, भ्रम, बेहोशी, पीलिया, गम्भीर रूप से थकावट, लो ब्लड प्रेशर, दिल की धडकने तेज होना, त्वचा में खिंचाव और अवसाद या डिप्रेशन भी महसूस हो सकता है। इस गम्भीर स्थिति को हाइपरमेसिस ग्रेविडरम कहते हैं जिसकी पहचान बहुत ज्यादा मितली, उल्टी, वजन में कमी और इलेक्ट्रोलाइट डिस्टर्बेन्स के रूप में की जा सकती है। ऐसे मामलोँ में अक्सर गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड जाती है ताकि उन्हे इंट्रावीनस लाइन के माध्यम से तरल पदार्थ और पोषण दिया जा सके। हाइपर्मेसिस का इलाज न होने की हालत में गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड सकता है क्योंकि इसमेँ शरीर का इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो जाता है। लेकिन स्थिति चाहे जो भी हो, गर्भवती महिला को बिना अपने डॉक्टर की सलाह के मॉर्निंग सिकनेस के इलाज के लिए कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।

अगर आप को मामूली मितली और उल्टी का एहसास होता है तो कुछ आसान उपायोँ से आराम मिल सकता है:

थोडा-थोडा और कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर भोजन लेँ

दिन में कई बार थोडा-थोडा खाते रह्ने से आपका पेट कभी खाली नहीं रहेगा। ज्यादा प्रोटीन वाली चीजेँ और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स जैसे कि साबुत अनाज और सब्जियाँ फायदेमंद साबित हो सकती हैं। आप जो भे खाएँ, धीरे-धीरे खाएँ।

डीहाइड्रेशन से बचने के लिए लेते रहे हैं तरल पदार्थ

अच्छी सेहत के लिए शरीर में भरपूर नमी आवश्यक है। अधिकतर माएँ सुबह के समय इसलिए बीमार महसूस करती हैं क्योंकि वे 8 गिलास तरल की आवश्यक मात्रा नहीं ले पाती हैं। आपके शरीर में तरल पदार्थ की जितनी कमी होगी आप उतनी ही थकावट महसूस करेंगी। अगर ज्यादा पानी पीना आपके लिए मुश्किल होता है तो फ्लैट और बिना कैफीन वाला कोला भी पी सकती हैं, अथवा आइस क्यूब के जरिए पानी या फल का जूस चूस्की की तरह ले सकती हैं। ऐसा देखा गया है कि ठंडी चीजेँ लेने में आसानी रहती है।

भरपूर आराम लेँ

थकान, तनाव और बदहवाशी मितली की समस्या को और बढा सकती है। गर्भावस्था में भरपूर आराम करना बेहद जरूरी होता है। तनाव से राहत के लिए आप मेडिटेशन अथवा प्री-नेटल योगासन कर सकती हैं। और सबसे महत्वपूर्ण है, रात के समय जितना अधिक हो सके उतने घंटे नींद लेँ।

जो अच्छा लगे वही खाएँ

वही चीजेँ खाएँ जो आपको अच्छी लगेँ, भले ही एक चीज बार-बार क्यूँ न खाना पडे। उन चीजोँ के इस्तेमाल से बचेँ जिनसे आपकी मितली की समस्या बढ जाती है। जब तक आप सामान्य रूप से हर चीज न खाने लग जाएँ तब तक के लिए कुछ ऐसी चीजोँ के विकल्प तलाशेँ जो पोषण से भरपूर होँ और आपको अच्छी भी लगेँ। जिन चीजोँ की महक से आपको उबकाई आती है उनसे बचने की कोशिश करेँ। साइट्रस फलोँ के जूस, दूध, कॉफी और कैफीन वाली चाय आपकी समस्या को बढा सकती है।

खाने के तुरंत बाद लेटेँ नहीं

खाने के तुरंत बाद लेटने से बचेँ क्योंकि ऐसा करने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है। खाकर तुरंत लेटने से एसिड रिफ्लक्स भी हो सकता है जिसके चलते पेट का एसिड आपके गले तक आ सकता है और आपके गले में जलन का एहसास होता है। कुल मिलाकर, अगर आप खाने के तुरंत बाद सो जाएंगी तो उठने के समय आपको पेट भरा-भरा होने का एहसास होगा। ऐसे में सोने जाने से पहले अपना खाना हजम होने के लिए भरपूर समय देँ।

खाना स्किप न करेँ

इसका मतलब यह है कि आपको अपना पेट कभी खाली नहीं रहने देना है। दिन भर में तीन बार भरपूर भोजन करने के बजाय 6-8 बार थोडा-थोडा खाएँ। जब आपका पेट खाली होगा तब मितली आने की आशंका ज्यादा रहती है। इसके साथ ही, थोडा-थोडा खाने से आपका भोजन आसानी से हजम हो जाएगा और मितली या उल्टी आने की आशंका कम रहेगी।

ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन न खाएँ

ज्यादा फैट वाला खाना न खाएँ क्योंकि इसे हजम होने में अधिक समय लगता है। साथ ही मसालेदार, एसिडिक और तली हुई चीजेँ न खाएँ इससे आपका पाचन तंत्र इरिटेट हो सकता है। बिना मसाले वाला खाना खाएँ। हमेशा ठंडा खाना खाएँ क्योंकि अक्सर गर्म खाने से महक आती है। ऐसी चीजेँ या महक से दूर रहेँ जिनसे आपको परेशानी महसूस होती है। ऐसे पेय का इस्तेमाल करेँ जो ठंडा, कसैला या मीठा हो।

अदरक या निम्बू के जूस से मितली में आराम मिल सकता है

पेट को आराम देने और उबकाई से राहत के लिए अदरक का इस्तेमाल करेँ। अगर आपको असली अदरक का जूस मिल जाए तो बेहतर है। अदरक वाली चाय बनाने के लिए गर्म पानी में ताजा अदरक घिस कर डालेँ, अथवा जिंजर कैंडी अथवा क्रिस्टलाइज्ड जिंजर ले सकती हैं। मितली से राहत के लिए नीम्बू भी ट्राई कर सकती हैं। ज्यादातर महिलाओँ को नीम्बू की खुशबू और स्वाद से आराम महसूस होता है। खट्टी कैंडीज, ताजा कटा नीम्बू आपको काफी आराम दिला सकता है।

आपका खाना किसी और को बनाने देँ

आपके करीबी लोगोँ को थोडा अतिरिक्त सहयोग और मदद करने के लिए कहेँ। अगर कोई और खाना पका सके तो बेहतर है, लेकिन अगर ऐसा सम्भव नहीं है तो बिना मसाले वाला और कम तेल-घी वाला भोजन लेँ, जैसे कि बेक्ड आलू या बिना हैवी फिलिंग के सैंडविच आदि बनाएँ। इन्हेँ बनाना आसान होगा।

डॉ. शिल्वाकंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकॉलजीपारस ब्लिस हॉस्पिटलपंचकुला

Share:

Leave a reply