क्या कहता है आपके सपनों का संसार!

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सपने देखना नींद का एक अहम पार्ट होता है। दुनिया मे ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जो सपने न देखता हो, लेकिन सपनों को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग धारणाएं हैं। कोई इसे असल जिंदगी की उलझनों का नतीजा मानते है तो कोई मन मे दबी भावनाओं का प्रतिबिंब। कुछ लोग तो पूर्व जन्म से भी इसका संबंध बताते हैं। आखिर क्या कहता है आपके सपनों का संसार? आइये जानते हैं:

दो घंटे होती है सपनों की लाइफ
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, आपकी नींद का औसतन 20-25% हिस्सा सपनों का होता है। अधिकतर लोगों के लिए यह समय दो घंटे का रहता है।

मरने के सपने से डरना नहीं
खुद के मरने का सपना देखना बहुत ही आम बात है। अक्सर लोग ऐसे सपनों के दौरान नींद मे ही खूब रोते हैं। और नींद से जागने के बाद भी सपने के याद रहने तक सिर मे भारीपन और मन की उदासी महसूस करते हैं। जबकि सच यह है कि इससे आपकी असल ज़िंदगी का कोई लेना-देना नहीं होता।

सपने मे करता है कोई पीछा
यूनिवर्सिटी ऑफ मोंट्रियल की एक स्टडी के मुताबिक गिरने, किसी के पीछा करने, स्कूल जाने अथवा एग्जाम मे देर से पहुँचने का सपना आना सबसे आम बात है। स्टडी के मुताबिक सेक्स से रिलेटेड सपने सबसे कम आते हैं।

खुशबू से भी है सपनों का संबंध
रिसर्च के दौरान वॉलंटियर्स को दो ग्रुप मे बांटा गया। एक ग्रुप को टूटे हुए अंडों के साथ और दूसरे ग्रुप को गुलाब की खुशबू के साथ रखा गया। जो ग्रुप अंडों की स्मेल के साथ सोया उसको बुरे सपने आए और गुलाब की खुशबू के साथ सोने वालों ने अच्छे सपने देखे। यानी स्मेल का सीधा संबंध दिमाग के उस हिस्से से है जो सपने के लिए जिम्मेदार होता है।

दवाओं का भी पड़ता है असर
कुछ दवाएं हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर डालती हैं जिसके चलते बुरे सपने आ सकते हैं। इनमे डिप्रेशन की दवाएं, नारकोटिक्स और बार्बिचुरेट शामिल हैं।

महिलाओं को आते हैं ज्यादा सपने
स्लीप स्टडीज़ मे पाया गया है कि महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा सपने आते हैं। हालांकि इसकी सही वजह का अब तक पता नहीं चल सका है।

संभव है सपनों पर नियंत्रण!
सपनों पर नियंत्रण तो शायद नहीं हो सकता है, लेकिन इसकी वजह से आपकी नींद को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। इसके लिए दवाओं और अल्कोहल का इस्तेमाल कम से कम करें। भरपूर नींद लें।

प्रेग्नेंसी मे आते हैं ज्यादा सपने
प्रेग्नेंट महिलाओं को अन्य लोगों की तुलना मे ज्यादा सपने आते हैं और उन्हें ये ज्यादा देर तक याद भी रहते हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि ऐसा प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के चलते होता है। दूसरा कारण यह भी है कि इस दौरान महिलाओं को नींद ज्यादा आती है, वे ज्यादा सोती हैं इसलिए आम दिनों कि तुलना मे ज्यादा सपने भी देखती हैं।

ब्लाइंड लोगों नहीं आते विजुअल सपने!
स्टडीज़ मे यह पाया गया है कि जो लोग जन्म से अंधे होते हैं उन्हें विजुअल सपने भी नहीं आते हैं। जिन लोगों की आँखों की रोशनी जीवन के शुरुआती सालों मे चली जाती है, उनके साथ भी अमूमन ऐसा ही होता है। लेकिन ऐसे लोग जिनकी आँखें बाद मे चली जाती हैं, वे विजुअल सपने देखते हैं।

ल्यूसिड ड्रीम देखने वाले भी कम नहीं
एक डच फिजीशियन फ़्रेडरिक वैन ईडेन ने 1913 मे ल्यूसिड ड्रीम (lucid dream) शब्द की खोज की थी। ये वह सपने होते हैं, जिसमे व्यक्ति को यह होश रहता है कि वह सपना देख रहा है।

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