जानें कैंसर सम्बंधी मिथ्स और सच

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कैंसर उन चन्द बीमारीnational-cancer-awareness-dayयों मे से एक है जिसके कारण हर साल हजारों जानें जाती हैं। इसके वाबजूद केंसर के पिड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ये स्थिती सिर्फ हमारे देश की ही नही बल्कि विश्व भर मे कैंसर एक बड़ी समस्या है। जिस कारण हर वर्ष 4 फरवरी को वर्ड कैंसर डे के तौर पर मनाया जाता है। वही जहां इस बीमारी को हमारे देश को बेइलाज समझा जाता है और केंसर के बारे कई ऐसे मिथ भी लोगों मे फैले हुए है। जिनके कारण लोग कई बार बेवजह तनाव में पड़ जाते है और पिड़ीत के साथ साथ परिजन भी परेशान हो जाते हैं। इस बीमारी के लिए जागरुकता बढ़ाना भी केंसर से लड़ने के लिए अहम है।
कैंसर के कुछ मिथ :
कैंसर छुआछुत से फैलता है
आमतौर पर कैंसर छुआछुत से एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति मे आसानी से नही फैलता। वाबजूद इसके कि जब ऑर्गेन या टिशु ट्रांसप्लांट किया जाना हो। वही यदि डोनर को पहले कभी कैंसर रहा हो ऐसी स्थिती मे कैंसर का एक इंसान से दुसरे व्यक्ति के शरीर मे प्रवेश का खतरा रहता है। लेकिन इस स्थिति मे भी रिस्क कम ही हैं । 10000 मे से सिर्फ 2 केसों मे ऐसा पाया गया है। डॉक्टरस भी कैंसर के रिकार्ड वाले डोनर से ऑर्गेन ट्रांसप्लांट को अवॉइड करते है।
कुछ केसस मे कैंसर बैक्टीरिया (हेलीकोवेक्टर पाईलोरी) या वाइरस (पेपीलोमा वाइरस और HPV) के द्वारा भी फैलता है। जैसा कि हम जानते है कि बैक्टीरिया और वाइरस एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक पहुचते हैं। लेकिन इन बैक्टिरिया और वाइरस द्वारा कभी-कभी होने वाला कैंसर इंसान से इंसान मे नही पंहुच सकता।

फैमिली हिस्ट्री है सबसे अहम कारण

जीन्स मे आए बदलावों के कारण कैंसर होता है। और सिर्फ 5-10 प्रतिशत मामलों मे ही कैंसर जीन्स के कारण या मां-बाप से बच्चों तक पंहुचता है। इस तरह के कैंसर को फैमिलीयल या हेरिडेटरी कैंसर कहते हैं। बाकी बचे हुए 90-95 प्रतिशत मामलों मे कैंसर जीन्स में लाईफस्टाइल, रेडियेशन के सम्पर्क मे आने या तम्बाकु के इस्तेमाल के कारण आए बदलावों के कारण होता है।

मीठा खाने से कैंसर और बढ़ता है
कई बार आपने लोगों को कहते हुए सुना होगा कि मीठा कैंसर के लिए ईधन का काम करता है और बढ़ता जाता है। पर अभी तक हुई सैकड़ो रिसर्च मे इस बात की पुष्टि नही हो पाई है कि मीठा खाने से कैंसर पर अच्छा या बुरा कोई प्रभाव पड़ता है। इसके उलट शरीर की कोशिकाओं को बढ़ने के लिए ग्लुकोज की आवश्यकता पड़ती है जो कि मीठे से मिलता है।

एक उम्र के बाद कैंसर का इलाज मुमकिन नही
कैंसर ट्रीटमेंट के लिए उम्र की कोई सीमा नही है। बुर्जगों का इलाज भी जवान लोगों की तरह ही किया जा सकता हैं। हां कई बार ज्यादा उम्र के लोगों को ब्लड प्रेशर और डाईविटिज जैसी कई और आम बीमारीओं के चलते उनके ट्रीटमेंट मे जटिलता बढ़ जाती है।

मोबाईल फोन या रिमोर्ट से हो सकता है कैंसर
मोबाईल फोन या रिमोर्ट कंट्रोल जैसी रोजमर्रा की चीजें जिनका हम अपनी डेली लाईफ मे काफी ज्यादा इस्तेमाल करते है। इस तरह की चीजें जिनसे हम रेडिएशन के सम्पर्क मे आते है कैंसर का कारण बन सकती है। हालांकि इस बात मे सच्चाई है कि मोबाईल से रेडिएशन होता है पर ये बहुत लॉ एनर्जी रोडिएशन होता है। अभी तक किए गए किसी अध्ययन मे नही पाया गया है कि मोबाईल के रेडिएशन से कैंसर खतरा है।

बॉडी डिओडरेन्ट और हेयर डाई बन सकते है कारण
कुछ लोगों का मानना है कि बॉडी डिओडरेंट से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। पर यह भी मात्र एक मिथ ही है। इसी तरह कुछ लोग हेयर डाई के इस्तेमाल को भी कैंसर के खतरे के रूप मे देखते है। पर दोनों ही मामलों मे कोई साईनटेफिक थियोरी मौजूद नही है।

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TagsCancer

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