अंगदान के लिए सफदरजंग मे खुलेगा ‘नोट्टो’

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दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पहला नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गनाइज़ेशन (नोट्टो) 18 महीने मे शुरू हो जाएगा। यह सेंटर दिल्ली के 24 ऑर्गन रिट्रीवल एवं ट्रांसप्लांटेशन केंद्रों के साथ ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़ा होगा। 13 अगस्त को मनाए जाने वाले अंगदान जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य मे लोगों को जागरूक करते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से डोनरों से ऑर्गन और टिश्यू प्राप्त करने और इसे स्टोर करने एवं जरूरतमंद मरीजों तक उसका पहुँचना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह नई पहल की है।

देश को चाहिए अंगदान क्रांति
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा ‘मैं भारत में एक अंगदान क्रांति देखना चाहता हूं। लेकिन उससे पहले मैं अंग एवं प्राप्ताकर्ताओं के बीच एक अत्या्धुनिक इंटरफेस सिस्टैम लाऊंगा। वर्तमान में केवल कुछ प्राइवेट अस्पहताल ही अंग उपलब्धतता पर जानकारी मुहैया करा रहे हैं, जहां आम लोगों के लिए खर्च वहाँ कर पाना संभव नहीं होता। जल्द ही सरकारी संस्थान किडनी, हार्ट, फेफड़े, हड्डी, टिश्यू, कॉर्निया और स्किन के तुरंत वितरण की सुविधा गरीबों के लिए फ्री और जो लोग खर्च करने की स्थिति मे हैं उनके लिए मामूली कीमत पर उपलब्धक कराएंगे।

टेस्ट रहा सफल
बुधवार यानी 6 अगस्त को इंदिरा गांधी हवाई अड्डे तथा गुडगांव के एक प्राइवेट हॉस्पिटल के बीच सफलतापूर्वक एक टेस्ट किया गया, जिसमें एक आर्टिफ़िशियल हार्ट को ट्रैफिक के बेहद व्य्स्ती समय मे 15 मिनट के भीतर 15.4 किलोमीटर की दूरी पर ले जाया गया। सामान्य दिनों मे इसमें कम से कम दोगुना समय लग गया होता। जून में चेन्नीई में इस ‘ग्रीन कॉरीडोर’ सिस्टम के इस्ते माल से दो हार्ट ट्रांसप्लांटेशन किए गए थे। उन्होने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य परिषद की अगली बैठक में राज्य सरकारों के साथ सभी राज्यों की राजधानियों में नोट्टो जैसे संस्थानों की स्थािपना पर बात करेंगे।

काफी पीछे हैं हम
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर अंगदान की दर मात्र 0.16 है जबकि स्पेन में यह 40 और अमेरिका में 35 व्यक्ति प्रति 10 लाख है। उन्होने नई पीढ़ी से अंगदान को लेकर सोच बदलने और क्रान्ति लाने की अपील की। उन्होने बताया कि, मैंने और मेरी पत्नी ने 1990 में ही अपने अंगदान का संकल्प लिया था। दिल्ली मे लोगों को अंगदान के बारे मे जागरूक बनाने के लिए एक गैर-सरकारी संगठन ‘दधीचि देहदान समिति’ अच्छी भूमिका निभा रहा है। पिछले कई वर्षों में इस संगठन से जुड़कर 3,000 से अधिक लोगों ने देहदान के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख और पिछले महीने दिवंगत हुए विहिप नेता गिरिराज किशोर भी शामिल हैं।

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