जानलेवा हो सकता है फैट!

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Overweightकैंसर के मरीज की परंपरागत इमेज है एक दुबला-पतला, कमजोर सा इंसान। एक ऐसा व्यक्ति जो अब कोई काम करने योग्य नहीं रहा। यही वजह है कि आमतौर पर कोई भी यह तर्क आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता कि एक खुशमिजाज़, थुलथुल व्यक्ति भी कभी कैंसर से पीड़ित हो सकता है। लेकिन आज का सच यही है।

पुरुषों मे, जिनका बीएमआई सामान्य से ऊपर होता है, उनमे कोलोन कैंसर (Colon Cancer) होने का खतरा 55% बढ़ जाता है। इसी तरह से महिलाओं मे भी बीएमआई (BMI) सामान्य से अधिक रहने पर गर्भाशय और ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा 50% तक बढ़ जाता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों मे ही, खाने की नली (Food Pipe), किडनी (Kidney), पित्ताशय और पाचन-ग्रंथि के कैंसर होने का खतरा बढ़ता है। यह विभिन्न प्रकार के ब्लड कैंसर और लिंफोमा कैंसर के खतरे को भी बढ़ता है।

फैट और कैंसर के बीच का लिंक क्या है???…. इसका कोई सीधा साधारण जवाब नहीं है। लेकिन जमा हुआ फैट एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स का एक बड़ा स्रोत है। और अतिरिक्त एस्ट्रोजन एंडोमेट्रिअल और ब्रेस्ट कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। फैट कोशिकाएँ हाई-इंसुलिन जैसे ग्रोथ फैक्टर के लिए भी जिम्मेदार होती हैं। कोशिकाओं के गुणन मे भी इनकी भूमिका होती है; इनमे से कुछ केमिकल कोशिकाओं के गुणन को कंट्रोल से बाहर कर देते हैं, जो कैंसर का कारण बनता है।

फैट कोशिकाएँ ऐसे केमिकल का उत्पादन करती हैं जिससे सूजन वाली अनुक्रिया कैंसरस अनुक्रिया मे बदल जाती है। मूलत: सबसे महत्वपूर्ण कारण कोशिकाओं की ग्रोथ और गुणन प्रक्रिया का “नियंत्रण से बाहर” होना मालूम पड़ता है। ऐसा लगता है कि फैटी कोशिकाएँ ऐसे केमिकल का उत्पादन करती हैं जो इम्यून सिस्टम के उस नाजुक बैलेंस को प्रभावित करता जिसकी कोशिकाओं के गुणन, विभेदन और समाप्ती मे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

भारतीयों के लिए इस न्यूज का क्या मतलब है? खाने की कमी या कोई कमी नहीं! हमारी आबादी का 10% हिस्सा मोटापे से पीड़ित है!!! डायबीटीज़, इस्केमिक हार्ट डीजीज, ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियों के मामले मे हम पहले ही अन्य देशों से काफी आगे पहुँच गए हैं। अगर मोटापे की महामारी को अभी नियंत्रित नहीं किया गया तो हम कैंसर के मामले मे भी आगे पहुँच सकते हैं!!!!

लेकिन लोगों का फोकस कार्डियोवस्क्युलर डीजीज और टाइप 2 डायबीटीज़ और इसके मेडिकल मैनेजमेंट पर रहता है। हमे बढ़ते कैंसर के खतरे को लेकर भी चिंतित होने कीJa जरूरत है।

Written By:
Dr. Atul N.C. peters
Expert bariatric, metabolic & Minimal Eccess Surgery

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