सिर्फ बुजुर्गो की बीमारी नहीं रही अल्जाइमर्स

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alzheimers deseaseअल्जाइर्स एक दिमागी बीमारी है। इससे एक आम इंसान की मानसिक क्षमता इस कदर कम हो जाती है कि वह अपने शरीर की सामान्य प्रक्रियाओँ तक को भूल जाता है। भारत में, 50 लाख से भी ज़्यादा लोग मानसिक बीमारी का सामना कर रहे हैं, जिसमें से 80 प्रतिशत लोगों को अल्जाइमर्स है। डॉक्टरों का कहना है कि 2030 में यह संख्या दोगुनी हो सकती है। अब तक इसका कोई इलाज उपलब्ध न होने के कारण समस्या का प्रबंधन ही एकमात्र उपाय है।

सबसे गम्भीर बात यह है कि अब वृद्धावस्था की समस्या मानी जाने वाली यह बीमारी अब युवाओँ को भी अपनी चपेट में ले रही है। इसके लिए काफी हद तक तनावपूर्ण जीवन और सिडेन्टरी लाइफस्टाइल जिम्मेदार है। ऐसे में उन उपायोँ के बारे में जान लेना और उन्हेँ समय पर अपना लेना बेहद जरूरी है जो आपको इस समस्या से बचाने में मददगार हो सकते हैं।

  1. सामाजिक मेलजोल

यूके के शोधकर्ताओं के अनुसार ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच रहने से इस रोग से बचा जा सकता है। जितना हो सके परिवार, मित्र, बच्चों के साथ वक्त गुजारने से डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा कम होता है।

  1. शारीरिक सक्रियता

बताया गया है कि शारीरिक रूप से आप जितने एक्ट‍िव होंगे डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा उतना ही कम होगा। जो लोग रोज 68 मिनट शारीरिक रूप से एक्टिक रहते है उनका मेटाबॉलिज्म अच्छा रहता है जिससे इस बीमारी से बचाव हो सकता है।

  1. संतुलित आहार

डिमेंशिया और अल्जाइमर से बचने के लिए संतुलित भोजन बेहद जरूरी है। अपने आहार में फल, सब्जी, मछली, दूध, अंडे का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। इससे आपको इस बीमारी से  बचाव होगा।

  1. शौक का रहे साथ

अपनी हॉबी यानि की शौक को साथ लेकर चलना आज के समय में आसान काम नहीं है, लेकिन अगर आप ऐसा कर सकेँ तो आपकी सेहत हमेशा चकाचक रहेगी। शोध में ये पाया गया है कि किसी भी हॉबी पेंटिंग, पॉटरी कला जैसे एक्टिविटी अपनाने से आप अल्जाइमर्स से 45% तक बचाव कर सकते है।

 

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