दो रुपए मे यूट्रस के कैंसर की जांच!

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uterus cancer screening cheaper
बलिराम सिंह

ब्रेस्ट कैंसर के बाद देश में सर्वाधिक महिलाएं गर्भाशय के कैंसर (Uterus Cancer) से पीडि़त हो रही हैं। महंगी जांच की वजह से अधिकांश महिला मरीज समय पर टेस्ट नहीं करा पाती हैं, लेकिन अब ऐसी महिलाएं मात्र दो रुपए में ही गर्भाशय कैंसर की स्क्रीनिंग करा सकती हैं। दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों के एक अध्ययन से यह साबित हुआ है। अस्पताल का यह शोध जर्नल ऑफ करेंट मेडिसिन रिसर्च और प्रैक्टिस में प्रकाशित हुआ है। इस शोध से देश की उन महिलाओं में उम्मीद जगी है जो समय पर जांच न करा पाने की वजह से मौत का शिकार हो जाती हैं।

ऐसे लगाया जाता है पता-
गर्भाशय द्वार पर रुई में 3.5 से 5 फीसद एसिटिक एसिड लगाया जाता है। जिससे प्रोटीन जमने के कारण सर्विक्स में सतह का रंग बदलकर सफेद हो जाता, जो कि सर्वाइकल कैंसर का संकेत है। इस जांच की रिपोर्ट महज कुछ देर में ही प्राप्त हो जाती है, जबकि पेप स्मीयर जांच रिपोर्ट आने में 24 घंटा लग जाता है। इसके अलावा वीआइए जांच का परिणाम 93.1 फीसदी और पेप स्मीयर जांच का परिणाम 86.2 फीसदी सही है। अस्पताल की गायनेकोलॉजी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. हर्षा खुल्लर का कहना है कि वर्ष 2008 से 2010 के बीच 500 महिला मरीजों पर अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि वीआइए जांच से 18 फीसद व पेप स्मीयर जांच से करीब 12 फीसद मरीजों में सर्वाइकल कैंसर का पता चला।

यह सिर्फ स्क्रीनिंग जांच है
गंगाराम अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गीता मेदिरत्ता का कहना है कि यह केवल स्क्रीनिंग जांच है। स्क्रीनिंग जांच में रिपोर्ट पॉजेटिव आने के बाद बायोप्सी की जाती है। इसमें कोई शक नहीं कि पेप स्मीयर ज्यादा विश्वसनीय जांच है लेकिन देश में काफी तादाद में जांच के लिए वीआइए टेस्ट देश के महिलाओं के लिए एक आशा भरी उम्मीद की किरण है।

ग्रामीण-छोटे शहरों की महिलाओं को समस्या-
बता दें कि फिलहाल गर्भाशय कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए पेप स्मीयर जांच की जाती है, जिसमें लगभग 12,00 रुपये खर्च आता है। जांच महंगा होने के कारण अभी तक इस बीमारी की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू नहीं किया जा सका है। यह टेस्ट ग्रामीण क्षेत्र अथवा छोटे शहरों में उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह से इन क्षेत्रों में रहने वाली अधिकांश महिलाएं जांच से वंचित रह जाती हैं।

ऐसे में डॉक्टरों का दावा है कि देश में जनसंख्या अधिक होने के कारण दो रुपये की वीआइए (विजुअल इंस्पेक्शन एसिटिक एसिड-सिरकायुक्त केमिकल) जांच बीमारी की रोकथाम के लिए असरदार साबित हो सकता है। इसके लिए किसी लैब की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और सामान्य डॉक्टर भी यह टेस्ट कर सकता है। लिक्विड के उपयोग के बाद डॉक्टर मात्र देखकर बीमारी की स्थिति बता सकता है।

क्या कहते हैं आंकड़े-
प्रत्येक साल गर्भाशय कैंसर के मामले-1.23 लाख
बीमारी की वजह से प्रत्येक साल महिलाओं की मौत-70 हजार

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