अकेले नहीं आता मोटापा

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obesity-is-a major-factor-for-many-lifestyle-diseasesजिन लोगों में टाइप-2 अथवा वयस्क उम्र में होने वाली डायबीटीज (diabetes) का पता लगता है उनमें से 80 प्रतिशत लोग मोटे (Obese) होते हैं। जिन लोगों को कार्डियोवस्कुलर बीमारियां होती हैं उनमें से बड़ी संख्या में लोग मोटापे (Obesity) की चपेट में होते हैं। कार्डियोवस्कुलर बीमारियों, डायबीटीज और स्टृोक का खतरा कई गुना बढ़ाने के साथ-साथ मोटापा (Obesity) स्लीप एप्निया, गाल ब्लैडर की पथरी और समय से पहले ऑस्टियोआर्थराइइटिस होने की भी एक बड़ी वजह है। अधिक मोटापा ब्लड कोलेस्टृॉल और टृाईग्लिसराइड का स्तर भी बढ़ा देता है, अच्छे यानी एचडीएल कोलेस्टृॉल की मात्रा कम कर देता है और ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है।

अनेक बीमारियों का एक बचाव
संक्षेप में कहें तो, अगर कोई अपने शरीर का वजन स्वस्थ सीमा के अंदर रखे तो उसे कई जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बेहद कम रहता है और वह लंबे समय तक स्वस्थ और उत्पादक जीवन जी सकता है। लेकिन आजकल बड़ी संख्या में भारतीय जीवनशैली संबंधी बीमारी जिसे मोटापा या ओबेसिटी कहते हैं, की चपेट में आ रहे हैं।

मोटापे मे पंजाब है नंबर वन
ओबेसिटी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, 30 मिलियन भारतीय मोटापे की चपेट में हैं और अगले कुछ वर्षों में यह संख्या दोगुना होने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक मोटापे के मामले में एशिया में चाइना के बाद भारत का स्थान आता है। एक नैशनल हेल्थ एंड फैमिली सर्वे के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा मोटे लोगों की आबादी 3 राज्यों पंजाब केरल और गोवा में है। भारत में 30 प्रतिशत पंजाबी, 24 प्रतिशत केरल वाले और 21 प्रतिशत गोवा के निवासी सामान्य से अधिक वजन वालों की श्रेणी में आते हैं।

मोटापा भी है एक बीमारी
अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन ने वर्ष 2013 में मोटापे को बीमारी की श्रेणी में रखा है। मानवीय सभ्यता के शुरूआती दौर में इंसान खाने की चीजों के अभाव में जीता था। ऐसे में हमारे शरीर में कैलोरी एकत्र करके रखने की आदत बन गई। इसके साथ आज के समय में शारीरिक व्यायाम कम करने वाली जीवनशैली और खाने की अनुपयुक्त आदत बड़ी संख्या में भारतीयों को मोटापे की चपेट में ले जा रही है।

भारतीयों को है ज्यादा खतरा
हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा मोटापे की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाली आबादी के लिए उपयुक्त बॉडी मास इंडेक्स 18-23 माना जाता है वहीं अन्य मूल के लोगों के लिए यह मानक 19-25 का है। 30 से अधिक बीएमआई होने का मतलब है आप मोटापे की चपेट में हैं। हम भारतीयों को मेटाबोलिक सिंडृोम होने का खतरा भी अधिक रहता है। हमें पेट के आस-पास का मोटापा अधिक परेशान करता है। हम भारतीय उपमहाद्वीप के लोग पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में मोटापे को कम झेल पाते हैं। हालांकि 10 साल पहले की तुलना में आज के समय में लोग मोटापे को लेकर ज्यादा जागरूक हो गए हैं लेकिन इस जागरूकता का कोई खास लाभ इसलिए नहीं मिल पा रहा है क्योंकि लोग इसके नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम नहीं उठा रहे हैं।

ये वजहें हैं जिम्मेदार
पैकेज्ड जंक फूड की आसान उपलब्धता जिनमें काफी ज्यादा मात्रा में कैलोरी होती है कम फाइबर होता है और नमक ज्यादा होता है इसके इस्तेमाल और साथ कम सक्रिय यानी सिडेंटरी जीवनशैली, जिसमें लोग बाहर निकलकर एक्सरसाइज करने के बजाय वर्चुअल दुनिया के संपर्क में रहना अधिक पसंद करते हैं, इन सभी कारणों के चलते शहरी युवा मोटापे जैसी समस्या की चपेट मे तेजी से आ रहे हैं। अब पैदल चलकर ऑफिस जाने अथवा साइकल चलाकर स्कूल जाने का ट्रेंड लगभग खत्म हो चुका है। लोग थोड़ी दूर जाने के लिए भी गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं। दो फ्लोर सीढ़ियां चढ़ने के लिए भी एलिवेटर का इस्तेमाल करते हैं और बच्चे दौड़ने अथवा पार्क में खेलने के बजाय विडियो गेम खेलना पसंद करते हैं। ये सारी वजहें मिलकर मोटापे की समस्या को बढ़ाने का काम कर रही हैं जिसके चलते अन्य संबंधित बीमारियों जैसे कि हाइपरटेंशन, दिल की बीमारियां, ऑस्टियोआर्थराइटिस आदि भी बढ़ रहा है।

तनाव एक अन्य कारक है जिसके चलते वजन बढ़ता है। तनाव में अक्सर लोग ज्यादा खाते हैं। जब हम खाते हैं तब ब्रेन में एक प्रकार का हार्मोन बनता है जो हमारी तनावग्रस्त नर्व्ज को आराम पहुंचाता है। यही हार्मोन एक्सरसाइज के दौरान भी बनता है और इससे भी उतना ही आराम महसूस होता है। ऐसे में तनाव के समय खाने के बजाय हमें एक्सरसाइज करने की कोशिश करनी चाहिए।

डॉ. अंशुमन कौशल,
कंसल्टेंट मिनिमली इनवेसिव बेरियाटिृक सर्जन,

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