सुबह के समय तेज चलता है बुजुर्गों का दिमाग

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बुजुर्गों का दिमाग दिन के काबी समय के मुक़ाबले सुबह के समय ज्यादा एक्टिव रहता है। ऐसे मे उन्हें दिमागी काम सुबह ही करने की कोशिश करनी चाहिए।

जर्नल ऑफ साइकोलजी एंड एजिंग (journal Psychology and Aging) मे जी हाल ही मे आई एक स्टडी रिपोर्ट मे कहा गया है कि, बुजुर्गों की दिमागी हालत की सही जांच मे दिन के समय का भी अहम रोल होता है। बुजुर्ग सुबह के समय ज्यादा एक्टिव और क्रिएटिव होते हुए ध्यान बंटाने वाली बातों को अवॉइड करने मे भी आसानी से सफल हो जाते हैं। रिसर्च के वैज्ञानिकों ने 16 यंग लोगों की एक टीम को चुना, जिनकी उम्र 19-30 साल थी और 16 ऐसे लोगों को चुना गया जिनकी उम्र 60-82 साल के बीच थी। दोनों टीमों ने 1:00 A M से 5:00 P M के बीच कई बार मेमोरी टेस्ट मे हिस्सा लिया। टेस्ट के दौरान दोनों ग्रुपों को कोई पहले बताई गई बात को रीकाल करना था और कप्म्युटर स्क्रीन पर कुछ पिक्चर और वर्ड्स सेट करने क कहा गया था।

टेब दोनों फ्रूप टेस्ट दे रहे होते थे उस दौरान वैज्ञानिक एफएमआरआई (फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेन्स इमेजिंग के जरिये उनके ब्रेन स्कैन करते थे। इससे उन्हें यह पता लगता था कि दिमाग का कौन सा हिस्सा कब ज्यादा एक्टिव हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि सुबह के समय बुजुर्गों का दिमाग भी उतना ही काम कर रहा था जितना कि यंग लोगों का। इतना ही नहीं ध्यान भटकाने वाली सूचनाओं को अवॉइड करने के मामले मे बुजुर्ग कहीं ज्यादा सफल हो रहे थे। लेकिन दूसरी ओर दोपहर बाद के टेस्ट मे बुजुर्गों का ग्रुप सुबह के मुक़ाबले काफी कम एक्टिव था। ऐसे मे उन्हे फोकस करने मे दिक्कत हो रही थी। क्योंकि जब कोई व्यक्ति अपना पूरा ध्यान किसी काम मे लगाना चाहता है, उस समय दिमाग के आराम कि स्थिति में होने से दिक्कत होती है।
इस रिसर्च का सबसे सुनहरा रिजल्ट यह है कि सुबह 8:30 से 10:30 के बीच किए गए टेस्ट मे बुजुर्गों का दिमाग यंग लोगों के मुक़ाबले बेहतर काम करता हुआ मिला।

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