ऑनलाइन एबार्शन: खतरे का एक नया ट्रेंड!

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ऑनलाइन एबार्शन  ( Online Abortion ) सुनकर अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह खतरे का नया ट्रेंड है, जो शहरी यूथ को तेजी से प्रभावित कर रहा है।

कृतिका शर्मा का अपने एक कलीग से प्रेम था। अक्सर ऑफिस के काम से उन्हें साथ में ही शहर से बाहर जाना पड़ता था। काम के दौरान मौज मस्ती के बीच एक दिन कृतिका को पता चला कि वह प्रेगनेंट है। घर परिवार व समाज में बदनामी के डर से उसने खुद से ही एबोर्शन करने का फैसला किया। जानकारी के लिए कृतिका ने इंटरनेट सर्च किया। नेट पर पढ़ी जानकारी के मुताबिक ओरल पिल्स (Oral Pills) के जरिए अबॉशर्न कृतिका को बहुत सरल दिखाई दिया. वह दवाई खरीद कर ले आई और खुद से से ही बिना किसी डॉक्टर की सलाह लिए गोलियों का सेवन कर लिया। दवा की दूसरी डोज लेते ही बहुत तेजी से ब्लीडिंग शुरू हो गयी, और दस दिनों से ज्यादा हो जाने के बाद भी ब्लीडिंग बंद नहीं हुई। वह बेहद कमजोरी महसूस कर रही थी, लेकिन किसी भी डॉक्टर से सलाह नहीं ली। आखिर में उसकी हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाया गया।

नर्चर आईवीएफ सेंटर की गाइनकोलॉजिस्ट एवं ऑब्सटेट्रिशियन डॉ. अर्चना धवन बजाज बताती हैं, जब मैने जांच की तब कृतिका का हीमोग्लोबिन घटकर 5 ग्राम रह गया था। उसे 4 यूनिट खून चढ़ाया गया और इमरजेंसी ट्रीटमेंट दिया गया। बिना किसी डॉक्टर के ऑब्जरवेशन में अबॉर्शन पिल लेने की वजह से उसका पूरी तरह से गर्भपात नहीं हो पाया था और संक्रमण भी बहुत अधिक फैल गया था। उसके यूट्रस से अवशेष निकाला गया। समय रहते इलाज शुरू हो जाने की वजह से कृतिका की जान बच सकी।

डॉ. बजाज कहती हैं, “यह सिर्फ कृतिका की बात नहीं है, आजकल यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। जो लड़कियों के लिए एक बड़ा खतरा है। दवा द्वारा अबॉर्शन की प्रक्रिया को परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय द्वारा 2002 में मान्यता प्रदान की गई है। मेडिकल अबॉर्शन निर्देशों के अनुसार प्रेग्नेंसी के 7 हफ्तों के भीतर दवा द्वारा अबॉर्शन किया जा सकता है। अर्थात पीरियडस के अगले तीन हफ्तों के अंदर माइफप्रोस्टिन व मीसोप्रोसटल अबॉर्शन पिल ली जा सकती है। लेकिन यह दवा हमेशा डॉक्टर के सुपरविजन में ही ली जानी चाहिए। क्योंकि अबॉर्शन हो जाने के बाद डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के जरिये जांच करता है कि गर्भपात ठीक प्रकार से हुआ या नहीं।

मगर आज कल की लड़कियों ने निर्धारित दिशा निर्देशों को दरकिनार कर दिया है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल 18 लाख से 67 लाख गर्भपात खुद से किए गए मेडिकल अर्बाशन के द्वारा होते हैं। डॉ अर्चना बताती हैं कि इंटरनेट से जानकरी लेकर एबोर्शन करना जानलेवा भी हो सकता है। सेल्फ अबॉर्शन के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं जैसे कि अत्यधिक ब्लीडिंग, अधूरा गर्भपात, ब्लड में इन्फेक्शन, स्ट्रोक या मौत। कभी-कभी बांझपन की समस्या भी हो सकती है।

नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत महिला मृत्यु दर में सालाना 8 प्रतिशत मृत्यु दर (अर्थात 4600 मृत्यु ) अबॉर्शन के कारण होती है। मेडिकल अबॉर्शन, गर्भपात की सरल प्रक्रिया है लेकिन यह हमेशा डॉक्टरी सुपरविजन में ही किया जाना चाहिए।
Dr Archana Dhawan

Dr. Archana Dhawan Bajaj

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