तेजी से पाँव पसार रही ऑस्टियोमैलेसिया

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बोन फॉरमेशन मे कमी और मिनरल की डेंसिटी कम होने की वजह से भारत में हड्डियों से जुड़ी बीमारियां आम हो गई हैं। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या के बारे में तो हम सब अच्छी तरह से जानते हैं, मगर एक बीमारी (Bone Disease) ऐसी है जो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसको लेकर हम बिलकुल जागरूक नहीं हैं। यह बीमारी है ऑस्टियोमेलेसिया (Osteomalacia), जो हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है।

क्या होता है असर
इस बीमारी में हड्डियां सॉफ्ट हो जाती हैं, जिसकी वजह हड्डियों का डेवेलपमेंट सही ढंग से न होना। ऑस्टियोपोरोसिस (Osteomalacia) जहां पहले से अच्छी तरह से बनी हड्डियों को प्रभावित कर उन्हें कमजोर बना देता है वहीं ऑस्टियोमेलेसिया (Osteomalacia) हड्डियों के डेवेलपमेंट की प्रक्रिया पर असर डालता है। ऑस्यिोमेलेसिया (Osteomalacia) की आम वजहों में से एक विटामिन डी की कमी भी है, जो कि भारत में बेहद आम बात हो चुकी है।

लक्षणों पर करें गौर
क्या आपको हड्डियों में एक भारीपन वाले दर्द का एहसास होता है अथवा मांसपेशियों में बेहद कमजोरी महसूस होती है, खासतौर से उन मांसपेशियों में जो हड्डियों को सपोर्ट करती हैं? क्या पैरों में कमजोरी बढ़ने की वजह से आपको चलने अथवा सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई महसूस होने लगी है? अगर हां, तो अपनी हड्डियों की जांच तुरंत कराएं।

रखें ख़याल
अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राजीव के शर्मा कहते हैं, ’’ऑस्टियोमेलेसिया (Osteomalacia) तब होती है जब हड्डियों को उनके विकास प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रीशन नहीं मिल पाता है। इसकी सबसे आम वजह है शरीर में कैल्शियम व अन्य मिनरल्स को सोखकर उसे हड्डियों को बनाने में इस्तेमाल करने की क्षमता का अभाव होना। विटामिन डी एक ऐसा तत्व है जो शरीर को कैल्शियम, फॉस्फेट व अन्य पोषक तत्वों को सोखने के लिए तैयार करता है। जब शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है, तब हड्डियों की फॉरमेशन प्रभावित होती है, ऐसे में हड्डियां मुलायम और कमजोर बनती हैं, जो इतनी नाजुक होती हैं कि हल्की चोट से भी फ्रैक्चर हो सकती हैं।’

विटामिन डी की कमी होने पर शरीर कैल्शियम को प्रॉसेस कर हड्डियों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं कर पाता है, इससे हड्डियों की संरचना मजबूत नहीं बनती है। अगर कमजोर हड्डियों का विकास होता है तो कई बार ये गलत शेप में मुड़ जाती हैं, ऐसे में अपंगता भी हो सकती है।
विटामिन डी की कमी के चलते भारत में ऑस्टियोमेलेसिया होना आम बात हो गई है। यह एक विडंबना ही है कि विटामिन डी का मुख्य स्रोत धूप है और भारत में धूप की कोई कमी नहीं है, बावजूद इसके यहां के लोगों में विटामिन डी की कमी है। जब आपकी त्वचा धूप के संपर्क में आती है तब विटामिन डी को प्रॉसेस करती है, जिसका इस्तेमाल शरीर में तमाम प्रकार से होता है। इससे बचाव के लिए रोज कम से 15 से 20 मिनट तक धूप के संपर्क में रहना जरूर है।

हेल्थ की अन्य समस्याएँ भी हैं जिम्मेदार
जिन लोगों की छोटी आंत को हटाने वाली सर्जरी हुई होती है उनके शरीर में भी विटामिन डी को सोखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। किडनी और लिवर संबंधी बीमारियां होने पर भी शरीर की विटामिन डी सोखने की प्रक्रिया पर पड़ता है। फॉस्फेट भी हड्डियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है, खाने में इसकी कमी से भी समस्या बढ़ती है। कई बार, दौरा पड़ने और ब्रेन से जुड़ी समस्याओं के इलाज हेतु इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी ऑस्टोमेलेसिया की वजह बनती हैं।

शुरुआत मे नहीं दिखाई देते लक्षण
ऑस्टियोमेलेसिया के शुरूआत में अक्सर कोई लक्षण सामने नहीं आता है। लेकिन जैसे -जैसे बीमारी का असर बढ़ता है वैसे-वैसे हड्डियां मुलायम और कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डियों में दर्द का एहसास होता है।

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