गर्भाशय कैंसर: इन बातों को कभी न करें अनदेखा

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70 में से 1 महिला को गर्भाशय का कैंसर (Ovarian Cancer) होता है। यह गायनेकोलॉजी से संबंधित सबसे खतरनाक कैंसर में से एक है। चूंकि अब तक गर्भाशय कैंसर की जांच के लिए कोई भी भरोसेमंद डाइग्नोस्टिक स्क्रीनिंग उपलब्ध नहीं है, ऐसे में एडवांस स्टेज तक पहुंचने तक या तो इसकी पहचान नहीं हो पाती है अथवा रिपोर्ट गलत आती है। 75 पर्सेंट से भी अधिक मामलों में इसका पता एडवांस स्टेज में पहुंचने के बाद चलता है। सिर्फ 19 पर्सेंट मामलों का ही शुरूआत में पता लग पाता है। जिन महिलाओं की समस्या का एडवांस स्टेज में पहुंचने के बाद पता लगता है उनमें से अधिकतर 5 साल तक भी जीवित नहीं रह पाती हैं।

यह कैंसर नहीं करता कोई भेदभाव
गर्भाशय कैंसर कोई भेदभाव नहीं करता है। यह किसी भी उम्र और किसी भी समुदाय की महिला को हो सकता है। यहां तक कि 1 साल की बच्ची को भी गर्भाशय कैंसर का पता चल चुका है। गर्भाशय कैंसर को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी इससे बचाव के आगे सबसे बड़ा रोड़ा है।

रिस्क फैक्टर्स
अनुवांशिक कारण
-गर्भाशय कैंसर के हर पांच में से एक मामले में पारिवारिक इतिहास जिम्मेदार होता है और जीन में बदलावों के साथ अगली पीढ़ी में खतरा और बढ़ जाता है। इसमें बीआरसीए1 और बीआरसीए2 जीन में बदलाव शामिल है, जो कि स्तन और गर्भाशय कैंसर से संबंधित है।
– ब्रेस्ट कैंसर, गर्भाशय कैंसर या कोलन कैंसर का व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक इतिहास
-उन महिलाओं को गर्भाशय कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है जिनके किसी करीबी रिश्तेदार में गर्भाशय, स्तन या कोलन कैंसर का इतिहास रहा हो। कैंसर के पारिवारिक इतिहास वाली महिलाओं को शुरू से ही अपने डॉक्टर से बात करके यह जानकारी लेनी चाहिए कि उनके लिए कौन सी स्क्रीनिंग आदि कराना फायदेमंद रहेगा।

उम्र बढ़ना
अनचाही इनफर्टिलिटी
कभी भी अपने परिवार की महिला सदस्यों, दोस्तों और सहकर्मियों और खासतौर से अपने फैमिली फिजिशियन से गर्भाशय कैंसर से जुड़े संभावित जीवन-रक्षक उपायों के बारे में चर्चा करने से बिल्कुल न हिचकें। जितना ज्यादा हमें जानकारी होगी, शुरूआत में बीमारी का पता लग पाने की उम्मीद उतनी ही अधिक होगी। इससे गर्भाशय कैंसर के खिलाफ जंग हारने का खतरा भी काफी कम हो जाएगा।

लक्षण
हालांकि गर्भाशय कैंसर के लक्षण गंभीर या गहरे नहीं होते हैं, खासतौर से शुरूआती दिनों में, लेकिन ये पूरी तरह साइलेंट भी नहीं होते हैं। जब इसे एक साइलेंट बीमारी के तौर पर ध्यान देते हैं तो पता चलता है कि गर्भाशय कैंसर से पीड़ित 95 पर्सेंट महिलाओं को अस्पष्ट लेकिन स्थायी लक्षण होते हैं। ओवेरियन कैंसर से पीड़ित महिलाओं में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैंः
-सूजन
-पेड़ू में या पेट में दर्द
-खाने में परेशानी महसूस होना और जल्दी पेट भरा हुआ महसूस होना
-बार-बार पेशाब आना

गर्भाशय कैंसर के अन्य लक्षणों में बहुत ज्यादा थकान, अपच, छाती में जलन, पेट खराब होना, कमर के निचले हिस्से में दर्द और पैरों में दर्द जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। आंतों की आदत में बदलाव जैसे कि कब्ज या डायरिया होना, वजन कम होना, माहवारी अनियमित होना और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण भी इसमें दिखाई दे सकते हैं।
अगर इनमें से कुछ लक्षण आपको दिखाई दें और ये 2 हफ्तों तक बरकरार रहें तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

गर्भाशय कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट
अगर महिला में कोई भी लक्षण दिखाई न दे तो गर्भाशय कैंसर की जांच के लिए कोई भी विश्वसनीय तरीका उपलब्ध नहीं है। हालांकि नियमित गायनेकॉलजी टेस्ट के दौरान गर्भाशय कैंसर का पता लगाने के दो तरीके हैं। पहला है ब्लड टेस्ट जिसमें प्रोटीन के जिसे सीए-125 कहते हैं का बढ़ा हुआ लेवल जांचते हैं। दूसरा तरीका है गर्भाशय का अल्ट्रासाउंड।

गर्भाशय कैंसर की सर्जरी
अगर बीमारी का शक होता है तो गायनेकोलॉजिक अंकॉलजिस्ट द्वारा सर्जरी कराया जाना चाहिए, जिन्हें महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम संबंधी कैंसर के इलाज की ट्रेनिंग मिली हो। इस सर्जरी का उद्देश्य होता है, जहां तक हो सके कैंसर वाले हिस्से को हटा देना।

’’साइलेंट किलर’’ से लेकर एक ’’ह्विस्परिंग बीमारी’’
गर्भाशय कैंसर पूरी तरह ’साइलेंट’ बीमारी नहीं है लेकिन इसके लक्षणों को पहचानने के लिए महिलाओं को अपने शरीर की ह्विस्परिंग आवाज को सुनना और इसके लक्षणों को पहचानना पड़ता है।

Dr. Neera Aggarwal
MS – Obstetrics and Gynaecology , MBBS
Gynecologist/Obstetrician

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