डेंगू, चिकनगुनिया में कारगर है देशी इलाज  

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papaya for dengue cureतमाम उपायो के बावजूद डेंगू और चिकनगुनिया हर सीजन में अपना कहर दिखा ही देते हैं। बारिश की शुरुआत के साथ ही डेंगू और चिकनगुनिया ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे में बचाव और इसके प्रबंधन के तरीके जान लेना बेहतर है। वैघर्षि के प्रवक्ता डॉ. रोहित पाराशर कहते हैं, डेंगू ऐसा बुखार है जिसे महामारी के रूप में देखा जाता है। बड़ों के मुकाबले बच्चोँ में यह रोग जल्दी फैलता है। डेंगू जानलेवा भी हो सकता है। डेंगू, चिकनगुनिया एक वायरल बुखार है जो एडीज मच्छर के काटने से होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ हैऐसा जो मुड़ जाता हैऔर यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणाम स्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।

आयुर्वेद के ये नुस्खे हैं कारगर

आयुर्वेद के कुछ नुस्खों से इन दोनों बिमारियों पर काबू पाना संभव है  मेथी, पपीते के पते, गिलोय, पालक चुकन्दर के सेवन से डेंगू और चिकनगुनिया से लड़ा जा सकता है

मेथी- डॉक्टर रोहित पाराशर कहते हैं मैथी की पत्तियां लोकप्रिय आर्युवेदिक औषधि है। आयरन, मैंगनीज, कॉपर, मैग्निशियम और फास्फोरस जैसे तत्वोँ से भरपूर ये पत्तियां बुखार कम करने, डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों को आरामदाक नींद दिलाने के लिये जानी जाती हैं। आप पीने के पानी में मेथी डालकर रातभर छोड दे और फिर इस पानी का सेवन करेँ। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

 पपीता- पपीते के पत्ते डेंगू और चिकनगुनिया में बेहद कारगर उपचार हैं। डेंगू और चिकनगुनिया के शिकंजे में आए मरीज की लगातार गिरती प्लेटलेट्स संख्या बड़ा खतरा होता है। लेकिन पूरे विश्व में किये गये अनेक शोध से स्पष्ट हुआ है कि पपीते के नर्म पत्तोँ के रस का कुछ समय तक लगातार सेवन प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाता है।

 गिलॉय- गिलॉय या गुडुची भारतीय जमीन पर व्यापक रूप से पैदा होने वाली औषधि है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है और मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है। गिलोय की पत्तियों या जड़ों को उबालने और छानने के बाद तैयार औषधीय काढ़ा जोड़ों और लिगामेंट के दर्द में तुरंत राहत देता है। डेंगूचिकनगुनिया के बाद  होने वाले दर्द को दूर करने के लिये भी इसके इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। इसमेँ तुलसी की पत्तियाँ मिलाकर पीने से शरीर की विषाक्तता दूर होती है।

 पालक, चुकंदर- पालक और चुकंदर भी डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों के लिए लाभदायक हैं।  कद्दू का विटामिन तत्व प्लेटलेट बढाने में उपयोगी है। शहद मिलाकर कद्दू का रस दिन में 2 से 3 बार पीयें। चुकुन्दर एंटी ऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है साथ ही इसके हेमोस्टैटिक गुण प्लेटलेट्स संख्या को बढ़ाने में बहुत उपयोगी हैं। इसलिए, 1 से 2 बड़े चमचे चुकंदर के रस को दिन में 3 से 4 बार पीने की सलाह दी जाती है।

  

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